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गांव मे किसी ने नहीं सुनी पाक की जीत पर पटाखों की आवाज, पुलिस ने 15 मुस्लिमों को जेल में डाला

नई दिल्ली/बुरहानपुर। नेशनल जनमत ब्यूरो।

चैम्पियंस ट्रॉफी के फाइनल में पाकिस्तान के हाथों भारत क्या हार गया, मध्य प्रदेश के बुरहानपुर जिले के मोहाद गांव के 15 मुसलमानों पर तो आफत ही आ गई। इन 15 मुसलमानों पर आरोप है कि उन्होंने पाकिस्तान के हाथों भारत की हार पर जश्न मनाया और पटाखे फोड़े। अब पुलिस ने जिसको इस मामले में गवाह बनाया है उसका कहना है कि मुझे नहीं पता क्यों गवाह बनाया गया है. जबकि मुझे इस मामले में कोई जानकारी नहीं.

मोहाद गांव के मुस्लिमों पर लगा आरोप- 

मध्य प्रदेश के बुरहानपुर जिले के मोहाद गांव में किसी को इस बात की खबर लगी कि 18 जून को चैंपियंस ट्रॉफी के फाइनल में पाकिस्तान के हाथों भारत की हार पर किसी ने “खुशियां” मनाई थीं या पटाखे जलाए थे। पुलिस ने इस गांव के 15 लोगों पर भारत की हार पर पटाखे जलाने देश विरोध नारे लगाने के लिए राजद्रोह का मुकदमा दर्ज किया था।

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कोली ने कहा पुलिस ने उसे जबरन गवाह बना दिया- 

कोली कहते हैं, “मैंने पुलिस को नहीं सूचित किया। मैं रविवार को एक पड़ोसी की मदद करने थाने गया था जिसे नारे लगाने के लिए पुलिस ले गई थी। मैंने कोई नारा नहीं सुना न ही मैंने पटाखे जलाने की शिकायत की। चूंकि मैं सोमवार को पुलिस थाने गया था इसलिए पुलिस ने मुझे गवाह बना दिया। मैं जज के सामने अपनी बात रखूंगा, पुलिस से मुझे डर है कि कहीं वो मुझे निशाना न बनाए।” 20-30 के बीच की उम्र वाले कोली गांव में डिश एंटीना की मरम्मत का काम करते हैं।

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पुलिस की कारस्तानी से हो गया गांव का माहौल खराब- 

मुस्लिम बहुल मोहाद गांव की अपनी क्रिकेट टीम है। टीम का नाम “‘टारेगट” है। पास के गांवों में होने वाले टेनिस बॉल क्रिकेट मुकाबलों में गांव की टीम खेलने जाती रहती है। टीम में हिन्दू और मुसलमानों दोनों समुदायों के लड़के शामिल रहते हैं। राजद्रोह का मुकदमा दायर होने के बाद गांव में दोनों समुदायों के बीच एक तरह की तल्खी आ गई है।

राजद्रोह का मुकदमा बापस लिया अब साम्प्रदायिक माहौल बिगाड़ने का केस- 

पुलिस ने 15 आरोपियों पर से राजद्रोह का मुकदमा वापस ले लिया लेकिन वो अभी भी जेल में हैं क्योंकि पुलिस ने अब उन पर “सांप्रदायिक सौहार्द्र बिगाड़ने” का मामला दर्ज कर दिया है। पुलिस ने जिन 15 लोगों पर ये मामला दर्ज किया है उनमें से किसी का भी कोई आपराधिक अतीत नहीं रहा है। बुरहानपुर के एसपी आरआर एस परिहार ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि, “आरंभिक जांच के बाद हमें लगा कि धारा 124-ए (राजद्रोह) के बजाय 153-ए (सांप्रदायिक विद्वेष फैलाना) ज्यादा उचित होगी।”

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इन मुस्लिमों के पूर्वज आदिवासी ही थे-

इस गांव के मुसलमान तड़वी उपनाम लगाते हैं। पड़ोसी राज्य महाराष्ट्र में तड़वी आदिसावी वर्ग में शामिल हैं लेकिन मध्य प्रदेश में वो अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के तहत आते हैं। माना जाता है कि तडवी समुदाय के पूर्वज भील थे जो मुसलमान हो गए थे लेकिन उनके बहुत सारे रीती-रिवाज वही रहे जो पहले थे। गांव में हिन्दू और मुसलमान अलग-अलग टोलों में रहते हैं लेकिन दोनों ही एक दूसरे के तीज-त्योहार में शामिल होते हैं।

पुलिस ने जिसे मन किया उसे उठा लिया- 

गांववालों के अनुसार इस मुकदमेबाजी से दोनों समुदायों के बीच दरार पैदा हो जाएगी। जिन 15 लोगों पर मामला दर्ज किया गया है उनमें से दो को छोड़कर बाकी अनपढ़ हैं और दिहाड़ी मजदूर के तौर पर काम करते हैं। कुछ के घर में न तो टीवी है और न ही मोबाइल। कुछ गांववालों का आरोप है कि भारत और पाकिस्तान के क्रिकेट मैच के बाद पुलिस दो-तीन दिन गांव में घूमती रही और जिसे मन उसे उठा लिया।

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देशद्रोह के आरोप में गिरफ्तार हुए इतबार तड़वी के पिता गुलज़ार तड़वी ने बताया, “ये वक़्त नमाज़ और रोज़े का है. हम लोगों को तो पता ही नहीं कि ऐसा कुछ हुआ है. किसने पटाखे फोड़े, हमें ख़ुद नहीं मालूम. यह सब तो हमें बनाया हुआ लगता है.”

23 साल के मुक़द्दर के पिता सिकंदर का कहना है कि वो लोग ग़रीब है और खेती के साथ ही छोटे मोटे काम करते है, लेकिन इस तरह के मामले से उनका कुछ लेना देना नहीं है. उन्होंने बताया, “हमें कुछ नहीं मालूम कि किसने पटाखे फोड़े. पुलिस रात में एक बजे बच्चों को उठाकर ले गई तब हमें पता चला कि मामला क्या है.”

वही शरीफ के चाचा रशीद ने बताया, “पुलिस आई और इन बच्चों को पकड़कर ले जाने लगी. किसने पटाखे फोड़े हमें तो पता ही नहीं. हम लोगों ने नारे लगाए, ऐसा कहकर हमारा नाम ज़बरदस्ती बदनाम कर दिया.”

ग़रीब परिवारों से हैं आरोपी-

फिरोज़ और बशीर नाम के दो भाइयों को भी हिरासत में लिया गया है. इनके भाई करीम ने बताया, “हम तो नमाज़ पढ़ने गए थे जब लौटे तो पुलिस इन्हें ले जाने के लिये आ गई. गांव का माहौल बहुत अच्छा है. हम लोग हिंदू समाज के लोगों के पास ही काम करते है. इस तरह का काम नहीं करेंगे.”

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गिरफ्तार हुए लोग छोटे मोटे काम करके अपना गुज़र बसर करते है और दिन के 200 से लेकर 300 रुपये कमा लेते हैं. इस मामले में गिरफ़्तार दस लोगों की पैरवी कर रहे वक़ील उबेद शेख़ का कहना है कि इन लोगों का इस मामले से कोई लेना देना नहीं है. उनका आरोप है कि गांव के अंदर कुछ लोग माहौल बिगड़ना चाहते हैं और इस मामले के पीछे उन्हीं का हाथ है.

वो आगे आरोप लगाते हैं, “बुरहानपुर क्षेत्र में अभी कुछ माहौल ऐसा बन गया है कि अगर किसी भी मुसलमान का मामला कोर्ट में आता है तो बजरंग दल और आरएसएस के लोग गवाही देते हैं कि ये लोग पाकिस्तान के समर्थन में नारे लगा रहे थे.”

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