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जानिए नकल माफियाओं के अरबों के धंधे पर कैसे पानी फेर दिया IAS आशुतोष निरंजन ने

नई दिल्ली। नीरज भाई पटेल ( नेशनल जनमत) 

10 वीं में पिछले साल गोंडा के 92 प्रतिशत की तुलना में इस बार सिर्फ 64 प्रतिशत और 12 वीं पिछले साल के 96 प्रतिशत की तुलना में इस बार सिर्फ 54 प्रतिशत परीक्षार्थी पास हुए. इतने खराब रिजल्ट के बाद भी गोंडावासी खुश हैं और अपने पूर्व जिलाधिकारी आशुतोष निरंजन को दुआएं दे रहे हैं. जानते हैं क्यों? क्योंकि तत्कालीन डीएम आशुतोष निरंजन ने अकेले गोंडा जिले में इस साल नकल माफियाओं के करीब एक अरब रुपये पर पानी फेर दिया है.

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पीएम ने कहा था गोंडा को नकल मंडी- 

जिले में नकल रोकने की तैयारी में जुटे डीएम आशुतोष निरंजन को उस समय और बल मिल गया, जब विधानसभा चुनाव के दौरान गोंडा में जनसभा को संबोधित करने आए पीएम नरेंद्र मोदी ने गोंडा को नकल मंडी करार दिया. इस बात को चैलेंज की तरह लेते हुए आशुतोष निरंजन ने नकल रोकने के लिए पूरी सरकारी मशीनरी को मैदान में उतार दिया.

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पढ़िए किस रणनीति से इस नकल मंडी में नकल की सप्लाई ध्वस्त कर दी गई- 

पूरे जिले को चार जोन, 30 सेक्टर में बांटते हुए वहां वरिष्ठअधिकारियों को तैनात किया गया. जिले के सभी 224 परीक्षा केंद्रों पर न्यूनतम 2 तथा अधिकतम 4 स्टेटिक व सुपर स्टैटिक मजिस्ट्रेट तैनात करके नकल माफियाओं की कमर तोड़ दी गई.

राजनीतिक माफिया ही गोंडा के नकल माफिया हैं- 

गोंडा में धुरंधर राजनीतिज्ञ ही गोंडा के नकल माफिया हैं. ये पावर फुल लोग हैं और कर्मचारियों को प्रभावित भी कर सकते हैं इस बात को डीएम आशुतोष निरंजन ने भली भांति समझ लिया था. इसलिए नकल रोकने के लिए वरिष्ठ अधिकारियों के प्रयोग के साथ ही तकनीक का भी इस्तेमाल किया. उनके निर्देश पर व्हाट्सअप पर बोर्ड एग्जाम गोंडा वन, टू और थ्री नाम से तीन ग्रुप बनाए गए.

ग्रुपों में जिले के सभी राजस्व लेखपाल, चकबंदी लेखपाल, ग्राम पंचायत अधिकारियों, कृषि विभाग के तकनीकी सहायकों, लोक निर्माण, सिंचाई, ग्रामीण अभियंत्रण सेवा, समाज कल्याण निर्माण निगम समेत सभी कार्यदाई संस्थाओं के अवर अभियंताओं, सहायक अभियंताओं, अधिशासी अभियंताओं समेत जिले के सभी जनपद स्तरीय अधिकारियों तथा मंडल के करीब 3 दर्जन अधिकारियों के व्हाट्सअप नंबर को जोड़ा गया.

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परीक्षा से कुछ घंटे पहले पता चलता था कि किसी ड्यूटी कहां है- 

अधिकारियों और कर्मचारियों को अपने परीक्षा केंद्र अथवा क्षेत्र की जानकारी इन्हीं तीनों ग्रुप पर मिलती थीं. अगले दिन प्रथम पाली में सुबह 7.30 बजे से होने वाली परीक्षा की ड्यूटी ग्रुप पर ही रात में 11:00 बजे के बाद पोस्ट की जाती थी उसी तरह द्वितीय पाली में होने वाली परीक्षा की ड्यूटी उसी दिन दिव में 11:00 बजे के बाद पोस्ट की जाती थी. जिससे नकल माफियाओं को यह पता न चल सके कि उनके यहां कौन सा अधिकारी या कर्मचारी ड्यूटी पर पहुंच रहा है.

आसान नहीं था नकल माफियाओं को मजबूत तंत्र को तोड़ना- 

छात्रों के परीक्षा केंद्र पर प्रवेश के समय गेट पर उनकी तलाशी की फोटो भी ग्रुप पर पोस्ट करनी होती थी. पूरे समय तक सभी सुपर स्टेटिक मजिस्ट्रेट परीक्षा केंद्र पर रहते थे. तथा परीक्षा के बाद उत्तर पुस्तिकाओं को सील कराके उसकी फोटो ग्रुप पर पोस्ट करके ही परीक्षा केंद्र से रवाना होते थे. प्रत्येक विषय में स्टेटिक मजिस्ट्रेट व सुपर स्टेटिक मजिस्ट्रेट का परीक्षा केंद्र बदल दिया जाता था जिससे कोई भी नकल माफिया किसी से सेटिंग ना कर सके.

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छापामार दस्ते को भी पता नहीं होता था कहां जाना है- 

इसके साथ ही सचल दल नाम से एक अन्य ग्रुप भी WhatsApp पर बनाया गया था, जिसमें सभी आधा दर्जन सचल दल प्रभारियों व उनके सदस्यों के मोबाइल नंबर को जोड़ा गया था. इन सचल दल प्रभारियों को भी रोजाना परीक्षा शुरू होने से 2 घंटे पहले इसी ग्रुप पर सूचना दी जाती थी कि उन्हें किन विद्यालयों अथवा किस रूट पर औचक निरीक्षण के लिए पहुंचना है?

प्रत्येक स्टाफ का परिचय पत्र बनवाया गया था- 

परीक्षा केंद्र पर अवांछित व्यक्तियों की आवाजाही रोकने के लिए चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों समेत सभी कक्ष निरीक्षकों व केंद्र व्यवस्थापकों का जिला विद्यालय निरीक्षक के हस्ताक्षर से परिचय पत्र बनाया गया था जिसे परीक्षा अवधि में केंद्र पर रहने वाले प्रत्येक व्यक्ति को गले में पहनना जरूरी था. केंद्र व्यवस्थापक को छोड़कर मोबाइल इस्तेमाल पर रोक थी.

उत्तर पुस्तिकाएं रास्ते में बदले जाने की शिकायतों के मद्देनजर परीक्षा केंद्र से संकलन केंद्र तक मिनट टू मिनट की रिपोर्टिंग की व्यवस्था भी की गई थी जिससे यह पता चलता रहता था कि परीक्षा केंद्र से संकलन केंद्र पहुंचने में अधिकतम कितना समय लगना चाहिए और बंडल लाने में कितना समय लगा है?

सच में आसान नहीं था गोंडा की प्रभावशाली नकल मंडी को रोक पाना. लेकिन युवा आईएएस आशुतोष निरंजन के हौसले और सूझबूझ ने ये कर के दिखा दिया.

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बेहतर काम के पूर्व सीएम अखिलेश यादव ने दिया था सम्मान- 

यूपीडा के अपरमुख्य कार्यपालक अधिकारी के रूप में आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस के निर्माण में आशुतोष निरंजन के बेहतर काम, क्रियान्यवयन और समयबद्धता को देखते हुए सीएम अखिलेश यादव ने आशुतोष निरंजन को डीएम गोंडा रहने के दौरान सम्मानित भी किया था.

 

 

 

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