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वक्त की कमी का रोना रोने वालों के लिए नजीर है, RED के इंजी. नरेन्द्र सिंह पटेल-प्रमिला सिंह की जिंदगी

नई दिल्ली/चित्रकूट, नीरज भाई पटेल (नेशनल जनमत)  

कहते हैं कि जब कोई इंसान अपनी सामाजिक जिम्मेदारी समझता है तो अपने व्यस्त जीवन में से सामाजिक कार्यों के लिए वक्त भी निकाल लेता है। मशीन बनकर जीवन यापन करने वालों के पास अक्सर ये बहाना होता है कि हम करना तो बहुत कुछ चाहते हैं लेकिन हमारे पास वक्त की कमी है।

ऐसे ही नौकरीपेशा लोगों के लिए नजीर हैं उत्तर प्रदेश के चित्रकूट जिले के निवासी नरेन्द्र सिंह पटेल। बनाडी गांव के निवासी नरेन्द्र सिंह ग्रामीण अभियंत्रण विभाग (RED) में अवर अभियंता (JE) के पद पर कार्यरत हैं। लेकिन अपनी नौकरी के साथ ही अपनी सामाजिक जिम्मेदारी को बखूबी निभा रहे हैं।

गरीब बच्चों को गांव जाकर पढ़ाते हैं- 

सरकारी सेवा के साथ-साथ सुबह-शाम व छुट्टी के दिनों मे गाँव के गरीब बच्चों को उनके गांव जा कर पढ़ाते हैं। कुछ बच्चों को अपने घर मे अपने बच्चों की तरह रखते हैं। इन्होंने गांव के गरीब बच्चों को पढ़ाना अपना लक्ष्य बना लिया है।

जब बहुत से सरकारी सेवक ऑफिस के बाद आराम फरमाते हैं और समय ना होने की दुहाई देते हैं तब नरेन्द्र सिंह पटेल बच्चों को पढ़ाने, पेड़ लगाने व लोगों को नशे के प्रति जागरूक करने का काम करते हैं। पांच बच्चों को वो अपने घर पर रखकर पढ़ाते हैं और खाने-पीने से लेकर कपड़ों की व्यवस्था भी करते हैं।

इसके अलावा दर्जनों बच्चे पढ़ने आते हैं और फिर शाम होते ही अपने घर लौट जाते हैं। इनके पढ़ाए हुए बच्चे पढ़ाई के साथ-साथ नशा मुक्ति अभियान में भी सक्रिय भूमिका निभाते हैं। बच्चों को किताबी शिक्षा के अलावा नरेन्द्र सिंह बच्चों की मानसिक स्थिति के अनुसार उनको देश-विदेश की प्रमुख घटनाओं की जानकारी और परिस्थिति से अवगत कराते रहते हैं।

गाड़ी में हमेशा रहते हैं टाट-पट्टी और बोर्ड-  

बच्चों को पढ़ाती हुई प्रमिला सिंह पटेल

नरेंद्र सिंह अपनी गाड़ी मे दो टाट पट्टी बिछाने के लिये व तीन व्हाइट बोर्ड हमेशा रखे रहते हैं और समय मिलते ही बच्चों के बीच निकल जाते हैं। सबसे बड़ी बात ये है कि इनकी पत्नी प्रमिला सिंह भी बिना किसी भेदभाव के सभी समाज के बच्चों को एक साथ एक साथ बैठाकर पढ़ाती हैं।

समय मिलने पर पटेल दंपति बच्चों को घुमाने के लिए भी ले जाते हैं। अभी तक बच्चों को इलाहाबाद, मेघालय, सिक्किम, असम जैसी जगहों का भ्रमण कराया जा चुका है। नरेंद्र सिंह पहले चित्रकूट में ही तैनात थे अब इनका स्थानांतरण मिरजापुर हो गया है। फिर भी ये  चित्रकूट के बच्चों की देख रेख कर रहे हैं और अब मिरजापुर मे भी अभियान शुरू कर रहे हैं।

ना कोई संस्था ना कोई चंदा- 

इन सामाजिक कार्यों के लिए नरेन्द्र सिंह और प्रमिला सिंह ने दिखावे के लिए न कोई संस्था बनाई है और न ही किसी से कोई चंदा लिया है। इनका कहना है कि अधिकांश लोग अपनी समस्या को सरकार पर लादते हैं जबकि हमें अपने को बदलना चाहिए और सभी को अपने अधिकार के साथ अपने कर्तव्य भी समझना चाहिए।

इनकी नजरों मे जातिवाद, आतंकवाद, नशा, जुआ हमारे देश के लिये अभिशाप हैं। इनका मानना है कि यदि हमें विकसित देश अमेरिका, जापान, रुस व यूरोपीय देशों की बराबरी मे आना है तो सारे भेदभाव मिटा कर सभी भारतीयों को कठिन मेहनत करना पड़ेगा। इनकी पत्नी प्रमिला सिंह भी इनके हर कदम में इनका साथ देती हैं।

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