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खुद की गढ़ी मूर्ति क्यों खंडित कर रहा है ‘नेशनल दस्तक’ फेसबुक पर उठे सवाल

नई दिल्ली। नेशनल जनमत ब्यूरो

नोएडा से संचालित ‘नेशनल दस्तक’ वेबसाइट जो दलितों, पिछड़ों के हिमायती होने का दावा करती है. यही वो वेबसाइट है जो कुछ दिन पहले तक चंद्रशेखर आजाद रावण को देश के दलितों का नायक बता रही थी. उसके खबरों को पढ़ें तो स्पष्ट था कि चंद्रशेखर आजाद रावण दलितों के लिए एक मसीहा की तरह है. और उनका संगठन भीम आर्मी दलितों के लिए उम्मीद की एक नई किरण है.

लेकिन अचानक से ऐसा क्या हो गया कि नेशनल दस्तक की नजर में दलितों का नायक विलेन बन गया. आखिर उसके हाथ में ऐसा कौन सा सबूत लग गया जिससे वो चंद्रशेखर आजाद रावण को आरएसएस का एजेंट साबित करने लगे और माथे पर तिलक लगाए उसकी फोटो पोस्ट करने लगे. वजह सिर्फ एक थी मायावती का आरोप. मायावती के भीम आर्मी पर  लगाते ही नेशनल दस्तक ने यू टर्न ले लिया और जुट गया चंद्रशेखर को आरएसएस का एजेंट साबित करने में.

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मायावती के बयान के बाद लिया यू टर्न – 

दरअसल  सहारनपुर से लौटने के बाद बसपा अध्यक्ष मायावती ने एक प्रेस कांफ्रेस बुलाकर कहा था भीम आर्मी का नेशनल दस्तक से कोई संबंध नहीं है. इतना ही मायावती ने तो यहां तक कही दिया कि चंद्रशेखर आजाद रावण आरएसएस के लिए काम कर रहे हैं. बस फिर क्या नेशनल दस्तक को बैठे बैठाए मुद्दा मिल गया और उसने यू टर्न ले लिया. बस इसके बाद वो अपने ही गढ़े नायक की मूर्ति तोड़ने के अभियान में जुट गया.

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नेशनल दस्तक को दिखा चंद्रशेखर के माथे का तिलक और हाथ की अंगूठी-

मायावती के सवाल उठाते ही नेशनल दस्तक इस उभरते सितारे को आरएसएस से जोड़ने का तरीका ढ़ूंढने लगा. इसी फोटो को लगाकर चंद्रशेखर आजाद रावण को आरएसएस का करीबी बताने की कोशिश की गई. लेकिन इसके लिए जिन हल्के तर्कों का सहारा लिया गया उसमें पहला तर्क था कि चंद्रशेखर रावण माथे पर तिलक लगाए हैं और दूसरा तर्क दिया गया कि वो हाथ में दो अंगूठी पहने हैं.

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अब हाथ में अंगूठी और माथे पर तिलक से कोई कैसे आरएसएस का एजेंट साबित हो रहा है. हैरत की बात ये है कि नेशनल दस्तक ने खुद स्वीकार किया कि इस फोटो की प्रमाणिकता उसे पता नहीं है. सवाल वही है फिर क्यूं इस तर्क के घटिया तर्क प्रस्तुत किए गए.

लिंक पर जाकर पढ़ें आखिर क्यों भड़के सामाजिक कार्यकर्ता-

http://www.nationaldastak.com/story/view/big-news-on-chandrashekhar-ravan-s-rss-connection

सोशल मीडिया पर बुद्धिजीवियों ने  उठाए सवाल-

वरिष्ठ अधिवक्ता और सामाजिक कार्यकर्ता नितिन मेश्राम  नेशनल दस्तक की खबर  क्या भीम आर्मी के चंद्रशेखर रावण का RSS से है कनेक्शन?  पर लिखते हैं-

“बसपा में कैडर अभी बाकी है की सिर्फ मिट्टी के माधो बाकी रह गये है. कोई दिखा नही की भागे उसके पिच्छे। बिना छानबीन किये ये सब चल रहा है…मूर्ख कही के.”

डीयू में एसोसिएट प्रोफेसर रतन लाल  नेशनल दस्तक की खबर  मायावती देश की नेता हैं उन्होंने वैसा ही भाषण दिया  पर लिखते हैं –

कांशीराम के समय बसपा एक राष्ट्रीय पार्टी थी, लेकिन अब क्षेत्रीय रह गई और यहाँ तक कि 19 पर निबट गई, लेकिन अभी भी ‘देश’ की नेता हैं!!! कैसे-कैसे सिद्धांतकार और बुद्दिजीवी वहां कार्यरत हैं,यह तो वही जाने.

लेकिन उनकी ‘बौद्धिकता’ स्पष्ट झलक रही है. और हाँ, समाज की ठेकेदारी कर रहे सभी ‘बुद्धिजीवियों’ और प्रोफेशनल्स को अपनी संपत्ति सार्वजानिक करनी चाहिए: और यह भी बताना चाहिए कि जिस व्यवस्था मे वे काम करते हैं अन्याय के खिलाफ वहां कोई प्रतिरोध करते हैं या फिर….

जंतर मंतर पर रावण ने कहा था- दलित कोटे से जीतकर जो दलितों के काम ना आए उसे फिर जीतने मत दो- रावण

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