You are here

खैनी-तंबाकू बेचकर चलता था घर का खर्च, अब IAS बने बिहार के लाल निरंजन कुमार

नई दिल्ली। नेशनल जनमत ब्यूरो

UPSC के 2017 के रिजल्ट में सफल छात्रों की लिस्ट में एक नाम बिहार के नवादा जिले के निरंजन कुमार का भी है. निरंजन कुमार की यूपीएससी में 728 वीं रैंक आई है. बिहार के कुर्मी समुदाय आने वाले निरंजन कुमार की सफलता इसलिए मायने रखती है क्योंकि उनका बचपन मुफलिसी में बीता है. घर का खर्च चलाने के लिए एक मात्रा चार उनके पिता की खैनी-तंबाकू की दुकान थी.

इसे भी पढ़ें-स्टेशन बेचने के बाद आरक्षण खात्मे की ओर प्रभु का अगला कदम, खत्म होंगे 10 हजार पद

पिता की दुकान पर खैनी बेचते थे निरंजन-  

UPSC की परीक्षा पास करने वाले निरंजन स्कूल की पढ़ाई के दौरान पिता की खैनी (तम्बाकू ) की दुकान पर बैठते थे . पिता अरविन्द कुमार पटेल जब भी बाहर जाते निरंजन खैनी ही दुकान संभालते थे .नवादा जिले के पकरि बरावन गांव के अरविन्द कुमार खैनी की दुकान से बमुश्किल 5 हजार रूपये प्रति माह कमा पाते थे . इतने कम पैसे से परिवार चलाना और बच्चो को पढ़ना आसान न था , लेकिन निरंजन ने कभी गरीबी को अपनी पढाई के आड़े नहीं आने दिया . अरविन्द के पिता के पास तीन बेटों और एक बेटी की पढाई के लिए पर्याप्त पैसे नहीं थे .

इसे भी पढ़ें- यूपी बोर्ड नियमों को खूंटी पर टांग टॉप कर गई मिश्रा जी की बेटी, अब FIR की तैयारी

पैसे नहीं थे तो निरंजन ने ले लिया नवोदय विद्यालय में दाखिला- 

निरंजन बचपन से ही पढने में अच्छे थे. लेकिन घर की हालत देख सोचते थे कि आगे पढने के लिए पैसे कहाँ से आएंगे . इसी बीच निरंजन को पता चला कि जवाहर नवोदय विद्यालय में पढाई अच्छी होती है और पैसे भी नहीं लगते. निरंजन को उम्मीद की किरण दिखी और उन्होंने एडमिशन के लिए फॉर्म भर दिया . वह टेस्ट में सफल हुए . 2004 में नवोदय विद्यालय से मैट्रिक परीक्षा पास करने के बाद निरंजन इंटर की पढ़ाई के लिए पटना आ गए

इसे भी पढ़ें- गोली खाई पटेलों-पाटीदारों ने मीडिया चमका रहा है आरएसएस वाले शर्मा जी का

फीस भरने के लिए पैसे नही थे तो निरंजन ने ट्यूशन पढ़ाना शुरू किया-

पटना में रहने का इंतजाम एक रिश्तेदार के पास हो गया, लेकिन इंटर की दो साल की पढाई के लिए 1200 रूपये ट्यूशन फीस भरने के लिए निरंजन के पास पैसे न थे. पैसों के इंतजाम के लिए उन्होंने बच्चो को ट्यूशन पढ़ाना शुरू किया. वह सुबह – शाम बच्चो को ट्यूशन पढ़ाते और खुद दिन में 8 -10 किमी. पैदल चलकर कोचिंग क्लास जाते क्योंकि उनके पास ऑटो का किराया देने तक के पैसे नहीं हुआ करते थे . डेढ़ साल बाद निरंजन ने ट्यूशन से बचाए पैसे से 600 रूपये में सेकंड हैण्ड साइकिल खरीदी .

इसे भी पढ़ें- जाति से ऊपर नहीं उठ पाई देशभक्ति, गांव में शहीद रवि पाल की प्रतिमा नहीं लगने दे रहे सवर्ण

आईआईटी धनबाद पहुंचे निरंजन कुमार- 

इंटर की पढाई के साथ ही निरंजन ने IIT की परीक्षा पास कर ली और ISM धनबाद से माइनिंग में इंजीनियरिंग की पढाई की . इंजीनियरिंग की पढाई के लिए निरंजन ने चार लाख रूपये का एजुकेशन लोन लिया . 2011 में कोल इन्डिया लिमिटेड में असिस्टेंट इंजिनियर के पद पर नौकरी पाने के बाद निरंजन ने लोन चुका दिया . UPSC की परीक्षा में 728 वीं रैंक आने से निरंजन संतुष्ट नहीं है . उनका कहना है उन्हें इंडियन रेवन्यू सर्विसेज में मिलेगी . मैं अगले साल फिर से परीक्षा दूंगा . मेरा टारगेट प्रॉपर IAS बनना है .

Related posts

Share
Share