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अखिलेश यादव के आवास पर पार्टी के 2 वरिष्ठ नेताओं के खिलाफ 7 मई को अनशन करेगा निषाद संघ

लखनऊ, नेशनल जनमत ब्यूरो। 

किसी भी पार्टी की बेहतरी के लिए जरूरी है कि उसके प्रमुख नेता के इर्द-गिर्द ऐसे व्यक्ति हों जो उसे जनमानस की वास्तविक भावनाओं से अवगत कराएं। कार्यकर्ताओं की दिक्कतों को समझते हुए उसे अपने नेता से बताएं और उसका समाधान निकालने का प्रयास करें।

हालांकि राजनीति या किसी भी उच्च पद पर बैठे व्यक्ति के आसपास ज्यादातर एक सीमित दायरा बनता चला जाता है। इस दायरे में आने वाले लोग ही नेताजी के आंख-कान-नाक बन जाते हैं। यही सबसे बड़ी समस्या की जड़ होती है।

फिलहाल बात हो रही है अखिलेश यादव के हाथ में आई समाजवादी पार्टी की। राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के करीबी बन चुके दो लोगों के खिलाफ राष्ट्रीय निषाद संघ व मोस्ट बैकवर्ज क्लासेज एसोसिएशन ने मोर्चा खोल दिया है।

अति पिछड़ी जातियों का महत्व समझना होगा- 

रामगढ़ में इन्ही दोनों संगठनों के बैनर तले आयोजित सामाजिक न्याय सम्मेलन को सम्बोधित करते हुए चौधरी लौटनराम निषाद ने आगे कहा कि हिन्दू अति पिछड़ी जातियों की उत्तर प्रदेश में संख्या 29-30% है, जिसके बिना कोई भी दल विशेषकर भाजपा व सपा-बसपा गठबंधन आगे नहीं जा सकता।

श्री निषाद ने कहा कि खेद जनक है कि पिछड़े वर्ग के आरक्षण व सामाजिक न्याय के संरक्षण हेतु लखनऊ में इन दोनों संगठनों द्वारा कई कार्यक्रम किए गए पर यादव, कुर्मी, कुशवाहा समाज का अपेक्षित सहयोग नहीं मिला। हालांकि उन्होंने आगे कहा कि इनका साथ मिले या न मिले राष्ट्रीय निषाद संघ व एमबीसीआई आरक्षण व सामाजिक न्याय की लड़ाई लड़ता रहेगा।

हिन्दुत्व में बह गई पिछड़ी जातियां- 

अति पिछड़ी जातियों के हिंदुत्व के हवा में बह जाने के कारण ही भाजपा को लोकसभा व विधानसभा चुनाव में अप्रत्याशित सफलता मिली पर अब अति पिछड़ों को होशियारी से काम लेना होगा।

7 मई को अखिलेश के आवास पर प्रदर्शन- 

लौटनराम निषाद ने बताया कि 7 मई को पूर्व मुख्यमंत्री व सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के 4 विक्रमादित्य मार्ग स्थित आवास पर अनशन का कार्यक्रम पार्टी में लोकतांत्रिक व्यवस्था स्थापित करने व संवादहीनता की स्थिति खत्म करने के लिए है।

अखिलेश जी के अत्यंत विश्वनीय व अति करीबी कार्यालय प्रभारी व एमएलसी एसआरएस यादव व गंगाराम की मनमानी व तानाशाही से हम ही नहीं लाखों कार्यकर्ता असन्तुष्ट हैं। मेरा यह अनशन समाजवादी पार्टी के हित मे है।

9 मई को लेंगे अगला निर्णय- 

सपा सुप्रीमो ने गम्भीरता से खामियों को दूर करने का कदम नहीं उठाए तो भाजपा से निपटना कठिन होगा। उन्होंने स्पष्ट तौर पर कहा कि अखिलेश जी गम्भीरता से नहीं लिया तो 9 मई को प्रेस क्लब लखनऊ में कॉन्फ्रेंस कर अगले निर्णय को स्पष्ट कर दिया जाएगा कि सपा के अलावा किसी अन्य दल का साथ देना है कि अपना पोलिटिकल प्लेटफॉर्म बनाना है।

सामाजिक न्याय सम्मेलन को रामसुमिरन विश्वकर्मा, राधेश्याम बिन्द, हरिकिशन केवट, राजेन्द्र निषाद, दीनानाथ राजभर, सरिता चौहान, रविन्द्र शर्मा, जयराम ठाकुर, अंगनलाल बियार, धनेश्वरी गुप्ता, रामजी स्वर्णकार, रामू यज्ञसैनी, हृदयनाथ प्रजापति, राजेश राजभर,

चन्द्रिका भारद्वाज, मोहनलाल निषाद, रमेश बिन्द, पुष्पा पाल, दीपक साहू, हंसराज चौरसिया, महेंद्र बारी, धनेश सबिता, आमोद विश्वकर्मा, अनीस अंसारी, लाल मोहम्मद हज़्ज़ाम, यूनुस मंसूरी, चन्द्रिका प्रसाद पाल, रामसजीवन कसेरा, वसीम राईनी आदि ने भी अपने विचार व्यक्त किये।

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