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किसानों की हत्या के विरोध में उतरी जेडीयू आज इंदौर जाएंगे जेडीयू नेता शरद यादव

नई दिल्ली। नेशनल जनमत ब्यूरो

मध्य प्रदेश में जारी किसान आंदोलन में कुछ संगठनों को तोड़कर शिवराज सरकार ने आंदोलन खत्म करने की घोषणा कर दी थी. लेकिन हकीकत में किसानों की मांग सुनी ही नहीं गईं थी. मंगलवार को अपनी फसल का उचित मूल्य मांग रहे किसानों पर शिवराज सरकार ने गोलियां चलवा दीं. जिससे 6 किसानों की मौत हो गई, दर्जनों घायल हो गए.

अब किसानों की मौत को हत्या बताते हुए जनता दल यूनाइटेड खुलकर विरोध में आ गई है. जेडीयू के राष्ट्रीय महासचिव अखिलेश कटियार मध्य प्रदेश पहुंच चुके हैं और पूरी स्थिति पर नजर रखे हुए हैं. अखिलेश कटियार ने नेशनल जनमत से बातचीत में बताया कि जेडीयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार इस घटना को लेकर बहुत गंभीर हैं. किसान देश का अन्नदाता है उसके साथ इस तरह का व्यवहार बर्दाश्त नही किया जाएगा.

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उन्होंने बताया कि जेडीयू हर लड़ाई में किसानों के साथ है. इसलिए किसान आंदोलन के समर्थन में और किसानों की हत्या के विरोध में कल यानि सात जून को जेडीयू के वरिष्ठ नेता और सांसद शरद यादव इंदौर पहुंच रहे हैं. शरद जी के आने के बाद हम आगे रणनीति पर फैसला लेंगे.

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मरने वालों में पांच पाटीदार  

 पुलिस फायरिंग में जिन छह लोगों की मौत हुई है उनमें पांच पाटीदार समुदाय से हैं जिसकों लेकर मध्यप्रदेश के अलावा यूपी के पटेल और गुजरात के पाटीदारों में जबरदस्त आक्रोश है.

1-  कन्हैयालाल पाटीदार निवासी चिलोद पिपलिया,

2- बंटी पाटीदार निवासी टकरावद,

3- चैनाराम पाटीदार निवासी नयाखेडा,

4- अभिषेक पाटीदार बरखेडापंथ

5-  सत्यनारायण पाटीदार बरखेडापंथ हैं।

मंदसौर में ही घायल आरिफ नाम के शख्स को इंदौर ले जाया जा रहा था। रास्ते में नागदा के पास उसकी मौत हो गई।

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किसानों की सरकार से क्या मांगें?

– किसान सेना के संयोजक केदार पटेल और जगदीश रावलिया के मुताबिक- किसानों ने मप्र सरकार को 32 सूत्रीय मांग पत्र सौंपा था। इन पर सोमवार को सीएम से चर्चा हुई थी। पटेल के अनुसार की मुख्य मांगे ये हैं-

1) मप्र सरकार ने एक कानून बनाकर किसानों की जमीन लेने के बदले मुआवजे की धारा 34 को हटा दिया था और किसानों के कोर्ट जाने का अधिकार वापस ले लिया था। इस कानून को हटाना किसानों की पहली मांग है।
2) स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशें लागू की जाएं जिनमें कहा गया है कि किसी फसल पर जितना खर्च आता है, सरकार उसका डेढ़ गुना दाम दिलाए।
3) एक जून से शुरू हुए आंदोलन में जिन किसानों के खिलाफ केस दर्ज किए गए हैं, उन्हें वापस लिया जाए। मप्र के किसानों की कर्जमाफी।
4) सरकारी डेयरी द्वारा दूध खरीदी के दाम बढ़ाए जाएं।

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