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एक सीएम की देश के पीएम से मुलाकात पर इतना उत्साहित क्यों है कॉरपोरेट मीडिया ?

नई दिल्ली। नेशनल जनमत ब्यूरो

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने शनिवार को भारत की यात्रा पर आए मॉरिशस के प्रधानमंत्री प्रविंद जगन्नाथ के सम्मान में आयोजित दोपहर के भोज में शामिल होने के बाद पीएम मोदी से मुलाकात की. वैसे तो ये एक सामान्य प्रक्रिया है जब किसी राज्य का सीएम अपने राज्य की समस्याओं के लिए पीएम से मिलता है. लेकिन इस खबर से देश का जातिवादी चरित्र वाला कॉरपोरेट मीडिया अतिउत्साहित हो गया.

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तकरीबन सभी मीडिया संस्थानों ने इस खबर को ऐसे परोसा मानो नीतीश कुमार प्रधानमंत्री से मुलाकात करने के बाद बीजेपी में शामिल होने की घोषणा करने जा रहे हों. बेवजह इस खबर को सोनिया गांधी के भोज में नीतीश कुमार के शामिल ना होने से जोड़ा गया. जबकि उस भोज में जेडीयू की तरफ से शरद यादव प्रतिनिधित्व कर रहे थे.

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क्यों उत्साहित हो जाता है मीडिया-

दरअसल कॉरपोरेट मीडिया के हित केन्द्र सरकार में छिपे होते हैं और केन्द्र सरकार यानि बीजेपी को लालू-नीतीश महागठबंधन से बहुत दिक्कत है. क्योंकि इसी महागठबंधन ने ना सिर्फ बीजेपी को बिहार से बाहर किया बल्कि अब 2019 के लिए मोदी के खिलाफ नीतीश को नेता बनाने पर विपक्ष को एकजुट भी कर रहा है. ऐसे में कॉरपोरेट मीडिया एक तो अपनी व्यवसायिक मजबूरी से दूसरा अपने जातिवादी चरित्र से मजबूर है. ऐसे में पिछड़ों-दलितों, यादव-कुर्मी का गठजोड़ की सत्ता उसे कैसे पसंद आ सकती है.

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गंगा नदी की गाद और बाढ़ को लेकर पीएम से मिले नीतीश-

नीतीश कुमार ने कहा कि उन्होंने पीएम से गंगा नदी में गाद की समस्या पर चर्चा की. उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार जिस गंगा की अविरलता की बात कर रही है वो गंगा में गाद के जमा होने तक संभव नहीं. नीतीश चाहते हैं कि केंद्र एक बार फिर इस समस्या के अध्ययन के लिए स्थल के निरीक्षण के लिए एक टीम भेजे.

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मॉरीशस से है बिहार का पुराना नाता-

नीतीश ने कहा जब यूपीए की सरकार थी तब भी मॉरिशस के प्रधानमंत्री हों या जापान के प्रधानमंत्री, बिहार के मुख्यमंत्री होने के नाते उन्हें निमंत्रण दिए जाने की परंपरा रही है. मॉरीशस के साथ बिहार का भावनातमक लगाव है. वहां की 52 प्रतिशत आबादी का मूल बिहार है. अभी के प्रधानमंत्री बिहार मूल के हैं. इसलिए मेरा आना स्वाभाविक ही था.

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