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‘मीडिया गिद्धों’ का दावा फिर फेल, ना नीतीश ने इस्तीफा मांगा है, ना ही तेजस्वी इस्तीफा देंगे

नई दिल्ली/ पटना। नेशनल जनमत ब्यूरो 

बिहार की राजनीति पर गिद्ध दृष्टि जमाए बैठे बीजेपी प्रायोजित मीडिया को एक बार फिर से पटखनी देते हुए नीतीश खेमे से स्पष्ट संकेते मिले हैं कि ना ही सीएम नीतीश कुमार की तरफ से डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव से कभी इस्तीफा मांगा गया था, ना ही तेजस्वी यादव इस्तीफा देने जा रहे हैं। सिर्फ ये दिमागी फितूर सवर्ण मीडिया के मठाधीशों का बनाया हुआ था।

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हर रोज सुबह से शाम तक मीडिया की कयासबाजी का दौर जारी रहता था-

नीतीश आज ले सकते हैं बड़ा फैसला….

तेजस्वी का अाज हो सकता है इस्तीफा…

तेजस्वी को बर्खास्त कर देंगे नीतीश कुमार….

महागठबंधन खत्म, तेजस्वी कोो बर्खास्त करेंगे नीतीश….

इन सब कयासों पर जेडीयू के एक राष्ट्रीय महासचिव ने नाम ना छापने की शर्त पर नेशनल जनमत से कहा कि – “सच्चाई ये है कि पूरी नौटंकी मीडिया की गढ़ी हुई है। हकीकत तो आप जानते ही हैं हमारे नेता( नीतीश कुमार) नपा तुला और कम बोलते हैं। हकीकत तो ये है कि नीतीश जी ने कभी तेजस्वी यादव से इस्तीफा मांगा ही नहीं था और ना ही तेजस्वी इस आरोप में इस्तीफा देंगे। अभी तो आरोप लगे हैं कुछ साबित होने दीजिए फिर देखा जाएगा क्या होता है ? ”

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तेजस्वी बोले मैं बेकसूर हूं-  

तेजस्वी यादव ने नीतीश कुमार से सीधे मुलाकात में कहा कि जब उन पर आरोप लगे थे तब वो सरकारी पद पर नहीं थे. ऐसे में प्रिवेन्शन ऑफ करप्पशन एक्ट में वो कैसे दोषी हैं. तेजस्वी ने ये भी बताया कि वो सीबीआई केस के खिलाफ कोर्ट जाएंगे और अग्रिम जमानत की अपील करेंगे. तेजस्वी ने कहा अगर उन्हें जमानत नहीं मिली, तब वो दोषी हैं. वहीं अगर जमानत मिल गई या कोर्ट ने केस खत्म कर दिया तो फिर इस्तीफे का क्या मतलब होगा.

मीडिया ने तमाम तरह  से गढ़ी कहानियां-

गोदी मीडिया ने तो पहले पुरजोर कोशिश की कि बिहार का महागठबंधन किसी तरह से टूट जाए या इसमें दरार  पड़ जाएं। हर रोज जेडीयू और आरजेडी के असंतुष्ट नेताओं से मनमाकिफ बयान लेके उसी फितूर पर खबरें चलना शुरू हो जाती थीं। फिर उसमें कांग्रेस को भी शामिल किया और ना जाने क्या-क्या?

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अब जब मीडिया को लगने लगा है कि उसके दावों की हवा निकल रही है तो अब मीडिया ने खबर चलानी शुरू कि टल गया इस्तीफा। भाई कल तक विश्वस्त सूत्रों के हवाले से इस्तीफा लेने और देने की खबरों को क्या हुआ ? हकीकत तो ये है कि जब इस्तीफा मांगा ही नहीं गया था तो इस्तीफा देने का कोई मतलब नहीं बनता था।

आरजेडी अपने रुख पर कायम उमा भारती दें इस्तीफा- 

इन सबके इतर आरजेडी भी अपने रुख पर कायम है. आरजेडी की दलील है कि जब केंद्रीय मंत्री उमा भारती का नाम बाबरी मस्जिद विध्वंस की साजिश में आता है और उनके खिलाफ केस चलाने की इजाजत दी जाती है तो उनसे इस्तीफा क्यों नहीं मांगा जाता. आरजेडी का मानना है कि तेजस्वी यादव पर लगे भ्रष्टाचार के आरोप इतने गंभीर नहीं हैं कि पद से इस्तीफा दिया जाए.

 

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