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जाट, मराठा, गुर्जर, पाटीदार आरक्षण की मांग का कारण केन्द्र की कृषि विरोधी नीति है-नीतीश कुमार

पटना। नेशनल जनमत ब्यूरो

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार इन दिनों बीजेपी पर हमलावर हैं. बीजेपी की बिहार में चुनाव कराने की चुनौती को स्वीकार करते हुए नीतीश ने कल ही कहा था कि हिम्मत है तो बीजेपी यूपी में चुनाव कराए मैं बिहार में चुनाव कराने के लिए तैयार हूं. अब नीतीश कुमार ने केन्द्र सरकार की कृषि विरोधी नीतियों को आड़े हाथों लेते हुए कहा है कि जाट, मराठा, गुर्जर और पाटीदार आरक्षण की मांग के पीछे मुख्य वजह देश की कृषि समस्या ही है.केन्द्र सरकार इस समस्या को सुलझाने के लिए सही कदम नहीं उठाना चाहती.

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केंद्र सरकार पर किसानों की उपेक्षा करने का लगाया आरोप-

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने केंद्र सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा है कि देश में किसानों की हालत खराब है. केंद्र सरकार किसानों के प्रति उदासीन है. किसान आंदोलनों को लेकर मोदी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि किसानों को अपने उत्पादन का उचित मूल्य नहीं मिल रहा है. किसानों की उपज के लिए अपर्याप्त और कम खरीद मूल्य वर्तमान कृषि संकट का आधार है.

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बिहार में किसान कर्ज नहीं लेते-

नीतीश ने कहा कि जिस किसान ने कर्ज नही लिया होता वो बहुत ज्यादा खराब स्थिति में नहीं आते . बिहार में किसान कर्ज नहीं लेते हैं. उन्होंने ये भी कहा कि इस देश के जाट मराठा, गुर्जर और पाटीदार आरक्षण की मांग कर रहे है, उसके पीछे कारण कृषि संकट ही है. केन्द्र सरकार की नीतियां इस संकट को बढ़ाने के लिए जिम्मेदार है.

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कर्ज माफी एकमात्र समाधान नही- 

नीतीश कुमार ने कहा कि किसानों के लिए कर्ज माफी अकेला समाधान नहीं है. अलग-अलग जगहों पर अलग समस्याएं हैं. कहीं किसानों की लागत बढ़ गई है और उत्पादन मूल्य में वृद्धि नहीं हो रही है. उन्होंने कहा कि मोदीजी ने चुनाव के समय कहा था कि लागत पर 50 प्रतिशत जोड़कर समर्थन मूल्य की घोषणा की जाएगी.

नीतीश कुमार ने बताया कि उन्होंने जीएम सीड को लेकर केंद्र को पत्र लिखा है कि नई प्रकार की बीमारियां शुरू हो गई है. कृषि में यह अवधारणा है कि इन बीजों से जितना उत्पादन बढ़ेगा वो उतना ही गलत है. साथ ही उन्होंने पत्र में लिखा कि फसल बीमा योजना किसानों के लिए नहीं है. हमें किसानों के हित को ध्यान में रखकर बेहतर नीति बनानी होगी.

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