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JNU के बाद नौजवानों ने दिल्ली विश्वविद्यालय में भी भगवा सोच को नकारा, अध्यक्ष-उपाध्यक्ष पर NSUI का कब्जा

नयी दिल्ली। नेशनल जनमत ब्यूरो। 

जेएनयू छात्र संघ चुनाव के बाद अब दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ चुनाव में एबीवीपी को बड़ा झटका मिला है। जेएनयू में नौजवानों ने कैम्पस के भगवाकरण की साजिशों को धता बताते हुए चारों प्रमुख पदों पर एबीवीपी को पटखनी दे दी थी। अब डीयू में छात्रों ने अध्यक्ष, उपाध्यक्ष के पदों पर भगवा सोच को सिरे से खारिज कर दिया है।

जेएनयू तो लेफ्ट यानि लाल सलाम का गढ़ रहा है इसलिए वहां एबीवीपी की हार के वो मायने नहीं थे जो डीयू की हार के हैं। डीयू में चार साल से अध्यक्ष, उपाध्यक्ष पद पर एबीवीपी का कब्जा रहा है। ऐसे में दोनों बड़े पदों की हार भगवा नेतृत्व को ये सोचने पर मजबूर कर देगी कि मध्यवर्गीय नौजवान शायद उनके बनाए आडंबरपूर्ण माहौल से बाहर निकलने की कोशिश कर रहा है।

जेएनयू में जहां सभी सीटों पर यूनाइटेड लेफ्ट आईसा, एसएफआई एसडीएफ ने बाजी मारी और सभी चारों पदों पर जीत हासिल की। वहीं बुधवार डीयू में भी एनएसयूआई ने अध्यक्ष पद और उपाध्यक्ष जैसे बड़े पदों पर कब्जा जमाया है।

अध्यक्ष पद की रेस में एनएसयूआई के रॉकी तुसीद ने एबीवीपी के रजत चौधरी को हराया है। इसके अलावा एनएसयूआई के कुणाल सेहरावत ने उपाध्यक्ष पद पर कब्जा किया है। जबकि एबीवीपी के ज्वाइंट सेकेट्ररी पद पर उमाशंकर और सेकेट्ररी पद पर महामेघा नागर कब्जा जमा पाई है।

बता दें कि मतों की गिनती के दौरान दोनों ओर से कड़ा मुकाबला देखने को मिला। शुरुआती राउंड में ABVP ने चारों पदों पर बढ़त बना ली थी लेकिन बाद में NSUI ने बढ़त बनाई।

पिछले साल एबीवीपी ने डूसू के सेंट्रल पैनल में 4 में से 3 सीटों पर कब्ज़ा जमाया था, लेकिन इस बार करारा झटका लगा है। इतना ही नहीं बता दें कि पिछले 4 साल से एबीवीपी डूसू अध्यक्ष पद पर काबिज थी।

वहीं एनएसयूआई की जीत पर कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी ने ट्वीट कर प्रत्याशियों को बधाई दी। उन्होंने ट्वीट पर लिखा दिल्ली विश्वविद्यालय चुनावों में बड़ी जीत और अच्छे पुराने दिनों को वापस लाने के लिए टीम एनएसयूआई को बधाई।

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