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दलित-पिछड़ा एकता के लिए लालू यादव ने बढ़ाया हाथ, बोले मायावती को बिहार से भेजेंगे राज्यसभा

नई दिल्ली/पटना/। नेशनल जनमत ब्यूरो 

बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की अध्यक्ष मायावती के राज्यसभा से इस्तीफे पर नाराजगी जाहिर करते हुए लालू यादव ने ट्विट और पत्रकार वार्ता के माध्यम से बड़ा हमला बोला है। राजनीतिक जानकारो की मानें तो इस समय निरंकुश और घमंडी सरकार से खिलाफ दलित-पिछड़ा एकता को मजबूत करने के लिए आरजेडी अध्यक्ष का ये कदम स्वागतयोग्य है।

राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव ने वाजिब और स्वभाविक बताते हुए कहा कि बीजेपी दलित विरोधी पार्टी है. लालू ने यह भी कहा, ‘मायावती चाहेंगी तो हम बिहार से उन्हें दोबारा राज्यसभा भेजेंगे।

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वहीं पटना में पत्रकारों से बात करते हुए लालू ने कहा, ‘दलितों की आवाज दबाई जा रही है, बीजेपी अहंकार में डूबी हुई है. मायावती के साथ राज्यसभा में जो व्यवहार किया गया, उससे साफ है कि बीजेपी दलित विरोधी पार्टी है.’

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लालू ने कहा कि चाणक्य ने कहा था कि जिस सभा में जायज बातों को ना सुना जाए और बहुमत का भय दिखाकर लोगों को बोलने नहीं दिया जाए, वह कोई सभा नहीं है. लालू ने कहा कि आज का दिन इतिहास के पन्नों में काले दिन के तौर पर दर्ज किया जाएगा, क्योंकि आज उच्च सदन में गरीबों और दलितों की स्थापित नेता मायावती को गरीबों की बात को उठाने नहीं दिया गया.

इस्तीफे की वजह- 

उल्लेखनीय है कि यूपी के सहारनपुर में दलित विरोधी हिंसा को लेकर बात रखने के दौरान बार-बार टोके जाने और सांसदो के हंगामे से नाराज बसपा प्रमुख मायावती ने राज्यसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है. उन्होंने अपना इस्तीफा राज्यसभा के सभापति हामिद अंसारी को सौंप दिया है.

मायावती ने कहा, मैं शोषितों, मजदूरों, किसानों और खासकर दलितों के उत्‍पीड़न की बात सदन में रखना चाहती थी. सहारनपुर के शब्‍बीरपुर गांव में जो दलित उत्‍पीड़न हुआ है, मैं उसकी बात उठाना चाहती थी, लेकिन सत्ता पक्ष के सभी लोग एक साथ खड़े हो गए और मुझे बोलने का मौका नहीं दिया गया.

बसपा प्रमुख ने कहा, मैं दलित समाज से आती हूं और जब मैं अपने समाज की बात नहीं रख सकती हूं, तो मेरे यहां होने का क्‍या लाभ है. राज्यसभा सचिवालय के सूत्रों ने बताया कि मायावती का इस्तीफा स्वीकार करने का निर्णय सभापति करेंगे.

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विपक्ष मायावती के साथ – 

नाराज मायावती जैसे ही सदन से बाहर गईं कांग्रेस पार्टी के सदस्यों ने भी सदन से वॉक आउट कर दिया. मायावती के समर्थन में कांग्रेस पार्टी के नेता गुलाम नबी आजाद ने कहा कि देश में दलितों, किसानों और अल्पसंख्यकों पर अत्याचार हो रहा है. उन्हें बोलने नहीं दिया जा रहा है और न ही विपक्षी दलों को बोलने दिया जा रहा है.

वहीं मायावती पर हमला करते हुए बीजेपी नेता और केंद्रीय मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने कहा कि मायावती ने उपसभापति का अपमान किया है और उन्हें इसके लिए माफी मांगनी चाहिए. इस पूरे मामले पर कांग्रेस के अलावा लेफ्ट और आरजेडी के नेताओं ने भी मायावती का साथ दिया.

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