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ओबीसी हितों के लिए प्रदर्शन करने वाले 9 योद्धाओं को जेएनयू से निकालने की तैयारी !

नई दिल्ली। नेशनल जनमत ब्यूरो

जवाहर लाल नेहरु विश्वविद्यालय में पीएचडी समेत अन्य परीक्षाओँ में वायवा के अंकों को कम करने और जेएनयू में किसी भी ओबीसी प्रोफेसर की नियुक्ति की मांग को लेकर प्रदर्शन करने वाले सामाजिक न्याय के नौ योद्धाओं को जेएनयू प्रशासन ने चुपचाप विश्वविद्यालय से निकालने की तैयारी कर ली है.

दरअसल 26 दिसंबर को जेएनयू में विद्वत परिषद की बैठक के दौरान इन सभी छात्रों ने हिस्सेदारी की मांग को लेकर प्रदर्शन किया था. छात्रों का आरोप था कि पीएचडी में जो वायवा होता है उसमें ओबीसी-एससी छात्रों के साथ भेदभाव होता है. इसलिए पीएचडी के लिए होने वाले वायवा के अंकों को कम करके उसे लिखित परीक्षा में जोड़ा जाए.

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ओबीसी का कोई प्रोफेसर नहीं जेएनयू में –

प्रदर्शन करने वाले छात्र दिलीप कुमार ने बताया कि अब्दुल नासे कमेटी की रिपोर्ट में इस बात को माना गया है कि ओबीसी-एससी के छात्रों के साथ वायवा में भेदभाव किया जाता है इसलिए 100 प्रतिशत वायवा को चयन का आधार नहीं बनाया जा सकता. इसके अलावा छात्रों की मांग थी कि आरक्षण मिलने के इतने दिन बाद भी जेएनयू कैम्पस में ओबीसी का कोई भी प्रोफेसर क्यों नहीं है. छात्रों ने कहा कि प्रशासन भेदभाव के चलते ओबीसी-एससी के लोगों को ऊपर आने ही नहीं देते.

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निलंबित कर दिये थे छात्र-

प्रदर्शन करने वाले छात्रों के खिलाफ मीटिंग में जबरदस्ती घुसकर अनुशासनहीनता का आरोप लगाते हुए जेएनयू प्रशासन ने विश्वविद्यालय की शैक्षणिक गतिविधि और हॉस्टल से निलंबित कर दिया था. इसके बाद छात्रों द्वारा मांग करने पर कि जांच से पहले उन्हे कैसे दोषी ठहराया जा सकता है. छात्रों को अंतरिम रजिस्ट्रेशन की छूट दे दी गई थी.

हिस्सेदारी की मांग के सिपाही- 

छात्र बिरसा, अंबेडकर, फुले स्टूडेंट एसोसिएशन (बाप्सा) और यूनाइडेट ओबीसी स्टूडेंट फोरम से जुडे हैं-
शकील अंजुम
मुलायम सिह यादव
दिलीप कुमार यादव
दिलीप कुमार
भूपाली विट्ठल
मृत्युंजय सिंह यादव
दावा शेरपा
एस राहुल
प्रशांत कुमार

 

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ओबीसी एससी छात्रों के साथ होने वाले भेदभाव को लेकर प्रदर्शन करने वाले इन सभी नौ छात्रों को प्रशासन ने कमेटी की जांच रिपोर्ट भेजी है. जांच में सभी को बताया गया है कि आपके ऊपर लगे अनुशासनहीनता के आरोप सही पाए गए हैं. इसलिए 8 जून तक आप लोग अपने जवाब प्रॉक्टर ऑफिस में उपलब्ध करा दें.

इसे बारे में अपने फेसबुक पर जानकारी देते हुए दिलीप यादव लिखते हैं कि-

10 दिन Lucknow मे उत्तर प्रदेश विधान सभा मार्च के लिये रुकने के बाद दिल्ली पहुंचकर सोचा था एक दो दिन अराम करेगे फिर PhD का काम किया जायेगा लेकिन हमारे Proctor तो JNU से निकालने का पूरा बन्दोवस्त कर रही है.. 8 june के बाद कुछ सजा का फरमान जारी करेगी…
हम लड़ेगे समाज के अधिकारो के लिये चाहे कितना भी कहर ढ़ा लो हम सब पर.

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