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महाराष्ट्र में बना ओबीसी मंत्रालय, केन्द्र में कब मंजूरी देंगे ओबीसी पीएम ?

नई दिल्ली। नीरज भाई पटेल

मराठों के आरक्षण संबंधी महाराष्ट्रव्यापी प्रदर्शन के बाद हरकत में आए महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेन्द्र फड़नवीस की मंजूरी के बाद अन्य पिछड़े वर्ग के हितों से जुड़े कार्यों के लिए ओबीसी विभाग बनकर काम कर रहा है. लेकिन केन्द्र में पिछले कई सालों से उठ रही ओबीसी मंत्रालय की मांग पर पीएम नरेन्द्र मोदी चुप्पी साधे हुए हैं.जबकि लोकसभा चुनाव के समय पीएम मोदी और बीजेपी से जुड़े नीति निर्धारकों ने उनकी जाति को ओबीसी सूची में शामिल होने को खूब मुद्दा बनाया था.

सामाजिक न्याय विभाग से अलग हो गया ओबीसी विभाग-

विमुक्त जाति, खानाबदोश जाति और अन्य पिछड़ी जातियों (ओबीसी) के ओबीसी विभाग अलग से काम करेगा.अभी तक यह विभाग सामाजिक न्याय विभाग के अंतर्गत था, जिसका सालाना बजट करीब 12,000 करोड़ रुपये है. सामाजिक न्याय विभाग की 62 योजनाओं में से ओबीसी और वीजेएनटी के लिए 24 योजनाएं थीं.अब ये सभी 24 योजनाएं नए विभाग को मिल गई है. शुरूआती तौर पर सामाजिक न्याय विभाग के प्रमुख दिनेश बाघमारे को ही ओबीसी विभाग की कमान सौंपी गई है.

दिसंबर में कैबिनेट से मिली थी मंजूरी-

ओबीसी विभाग के लिए एक अलग मंत्रालय गठित किए जाने की मांग पर मुख्यमंत्री देवेन्द्र फड़नवीस ने 28 दिसंबर की कैबिनेट बैठक में इसे मंजूरी दी थी और इस विभाग में सभी पद तीन महीने में भरने के निर्देश भी दिए थे. तरह की जानकारी मुख्यमंत्री ने दी है.

पूरी तरह से काम करने में दो हफ्ते लगेंगे- सीएम

सीएम देवेन्द्र फड़नवीस के अनुसार ओबीसी विभाग अलग से काम कर रहा है लेकिन इसके लिए अलग से सचिव, उपसचिव सहित अन्य कई पद भरे जाने हैं जिनमें तकरीबन दो हफ्ते का समय लगेगा. उन्होंने बताया कि जानकारी के अभाव में लोग अभी सामाजिक न्याय विभाग ही अपने काम लेकर पहुंत रहे हैं.

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