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OBC अधिकारों के लिए लड़ने वाले 4 निलंबित छात्रों की याचिका पर हाईकोर्ट ने JNU से मांगा जवाब

नई दिल्ली। नेशनल जनमत ब्यूरो 

ओबीसी छात्रों के हितों की आवाज उठाने वाले 4 निलंबित छात्र जवाहर लाल नेहरू वि.वि. प्रशासन के तानाशाही रवैये के आगे झुकने को तैयार नहीं हैं। जेएनयू प्रशासन द्वारा रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया से रोके जाने के मामले में चारों छात्रो ने दिल्ली हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। अब दिल्ली हाईकोर्ट ने जेएनयू के इन चारोंं छात्रों के निलंबन के मामले में जेएनयू प्रशासन से  जवाब-तलब किया है।

कोर्ट ने चार शोध छात्रों दिलीप यादव, प्रशांत कुमार, मुलायम सिंह, शकील अंजुम द्वारा दायर की गई याचिका पर सुनवाई करते हुए जेएनयू के चीफ प्रॉक्टर को विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए कहा है. इन चारो छात्रों पर कथित रुप से मीटिंग में बाधा पहुंचाने का आरोप लगाते हुए निलंबित किया गया था फिर रजिस्ट्रेशन की अनुमति देने की शर्त के नाम पर 10 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया। इतना हीं नहीं इन छात्रों को पहले से ही डिग्री, स्कॉलरशिप, लाइब्रेरी और हॉस्टल की सुविधा लेने पर रोक लगा दी गई है।

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जेएनयू प्रशासन पर उठाए सवाल- 

निलंबित शो प्रशांत कुमार ने नेशनल जनमत से बातचीत में बताया कि जस्टिस इंदरमीत कौर ने जेएनयू प्रशासन की तरफ से पेश हुए अधिकारियों से कहा कि आपके द्वारा लगाए गए आरोपों में भ्रम की स्थिति है। पहले आपने एकेडमिक काउंसिल में तोड़ फोड़ करने और व्यवधान के आरोप  छात्रों पर लगाए थे फिर अपने ही आरोप वापस लेकर दूसरे आरोप छात्रोंं पर लगा दिए और उनमें दोषी साबित कर दिया। इसलिए स्थिति स्पष्ट नहीं हो पा रही है। कोर्ट ने जेएनयूू प्रशासन को कहा कि इस मामले में विस्तृत रिपोर्ट पेश करें।

कोर्ट छात्रों से कहा फाइन भर दीजिए- 

हालांकि हाईकोर्ट ने चारों छात्रों से भी फाइन जमा करने की बात कहते हुए कहा कि अभी फाइन भर दीजिए, सुनवाई के दौरान अगर आप सही पाए जाते हैं तो फाइन वापस हो जाएगा।

छात्रों की तरफ से केस की पैरवी कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता कॉलिन गोन्जालविस ने कोर्ट में कहा कि विश्वविद्यालय द्वारा जिन चारों छात्रों को फाइन के आदेश दिए गए हैं वो गरीब परिवारों से आते हैं, उनका भुगतान कर पाने का मतलब ही नहीं है।

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फाइन नहीं देंगे डबल बेंच में अपील की है- 

कोर्ट के इस फैसले पर जेएनयू के छात्र दिलीप यादव ने लिखा, ‘हम चार निलंबित छात्रों (मुलायम सिंह, प्रशांत निहाल, शकील अंजुम और दिलीप यादव) की फांसीवादी प्रशासन के खिलाफ लड़ाई जारी है। हम लोगों ने आखिरकार माननीय दिल्ली उच्च न्यायलय का दरवाजा खटखटाया है, उच्च न्यायलय ने हमारी अर्जी को संज्ञान में लेते हुए जेएनयू प्रशासन से जबाब-तलब किया है।

दिलीप आगे लिखते हैं कि प्रशासन के द्वारा पक्षपातपूर्ण ढंग से पूरे मामले की जांच कराये जाने की हमारी दलील को स्वीकार किया है। लेकिन हम लोग इस फैसले से संतुष्ट नहीं हैं क्योंकि हाईकोर्ट ने फिलहाल हमसे फाइन भरने का निर्देश दिया है। अत: इस फैसले के विरुद्ध हम लोगों ने दिल्ली उच्च न्यायलय की डबल बेंच में अपील दायर की है। इस दौरान वंचितो के अधिकारों के लिए लड़ाई जारी रहेगी। चाहे हमको अपनी डिग्री क्यों न गवांनी पड़े। आज अगर हम फांसीवादियो के सामने झुकेंगे तो कल हमारे समाज को और झुकाया जाएगा।’

क्या है मामला- 

दरअसल 26 दिसंबर को जेएनयू में विद्वत परिषद की बैठक के दौरान 9 छात्रों ने हिस्सेदारी की मांग को लेकर प्रदर्शन किया था. छात्रों का आरोप था कि पीएचडी में जो वायवा होता है उसमें ओबीसी-एससी छात्रों के साथ भेदभाव होता है. इसलिए पीएचडी के लिए होने वाले वायवा के अंकों को कम करके उसे लिखित परीक्षा में जोड़ा जाए. इसके अलावा यूजीसी द्वारा पीएचडी के नियमों में बार-बार बदलाव करके ओबीसी-एससी के छात्रों की संख्या कम करने के  लिए की जा रहीं साजिशों का विरोध भी किया था।

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ओबीसी का कोई प्रोफेसर नहीं जेएनयू में –

प्रदर्शन में शामिल छात्र मुलायम सिंह ने बताया कि अब्दुल नासे कमेटी की रिपोर्ट में इस बात को माना गया है कि ओबीसी-एससी के छात्रों के साथ वायवा में भेदभाव किया जाता है इसलिए 100 प्रतिशत वायवा को चयन का आधार नहीं बनाया जा सकता. मुलायम सिंह ने कहा कि इतने सालों से आरक्षण मिलने के बाद भी जेएनयू कैम्पस में ओबीसी का कोई भी प्रोफेसर क्यों नहीं है? छात्रों ने कहा कि प्रशासन भेदभाव के चलते ओबीसी-एससी के लोगों को ऊपर आने ही नहीं देता.

निलंबित किए गए थे 9 छात्र-

प्रदर्शन करने वाले छात्रों के खिलाफ मीटिंग में जबरदस्ती घुसकर अनुशासनहीनता का आरोप लगाते हुए जेएनयू प्रशासन ने विश्वविद्यालय की शैक्षणिक गतिविधि और हॉस्टल से निलंबित कर दिया था. इसके बाद छात्रों द्वारा मांग करने पर कि जांच से पहले उन्हे कैसे दोषी ठहराया जा सकता है. छात्रों को अंतरिम रजिस्ट्रेशन की छूट दे दी गई थी.

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इसके बाद इन सभी नौ छात्रों को प्रशासन ने कमेटी की जांच रिपोर्ट भेजी थी. जांच में सभी को बताया गया था कि उनके ऊपर लगे अनुशासनहीनता के आरोप सही पाए गए हैं. इसलिए 8 जून तक आप सभी लोग अपने जवाब प्रॉक्टर ऑफिस में उपलब्ध करा दें.

ये 9 थे सामाजिक न्याय के सिपाही-

छात्र बिरसा, अंबेडकर, फुले स्टूडेंट एसोसिएशन (बाप्सा) और यूनाइडेट ओबीसी स्टूडेंट फोरम से जुडे हैं-

शकील अंजुम
मुलायम सिह यादव
दिलीप कुमार यादव
दिलीप कुमार
भूपाली विट्ठल
मृत्युंजय सिंह यादव
दावा शेरपा
एस राहुल
प्रशांत कुमार

इनमें से 4 छात्रों ने फाइन जमा करने से मना कर दिया था- 

दिलीप यादव , मुलायम सिंह ,प्रशांत कुमार ,शकील अंजुम ने फाइन जमा करने के बजाए संघर्ष का रास्ता चुना और हाईकोर्ट से न्याय मिलने की उम्मीद में हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।

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