You are here

OBC पीएम का कैबिनेट सचिवालय बना जातिवाद का अड्डा, 53 अधिकारियों में एक भी OBC नहीं

नई दिल्ली। नेशनल जनमत ब्यूरो 

दिल से किसी विचार को मानने और किसी स्वार्थ के लिए कुछ बन जाने का दिखावा करने से व्यक्ति के अंदर की मानसिकता नहीं बदलती। लोकसभा चुनाव के समय खुद को चीख-चीखकर पिछड़ी जाति का साबित करने पर तुले ओबीसी पीएम के राज में भी ओबीसी के साथ भेदभाव ना केवल जारी है बल्कि पहले से कहीं ज्यादा बढ़ भी गया है।

कैबिनेट मंत्रिमंडल में सवर्णों के वर्चस्व का आरोप पहले ही मोदी सरकार के मंत्रिमंडल पर लगता रहा है। आरटीआई से मिली जानकारी ने इस जातिवादी रवैये पर मोहर लगा दी है। आरटीआई से मिली जानकारी के अनुसार के प्रधानमंत्री के केन्द्रीय सचिवालय में टॉप के 53 अधिकारियों में एक भी अधिकारी ओबीसी वर्ग का है ही नहीं जबकि वरिष्ठ अधिकारियों के बाद एससी के 7 अधिकारी कार्यरत हैं।

इसे भी पढ़ें-ये कौन सी योग्यता? हारी हुईं ईरानी के पास 2 मंत्रालय, 7वीं बार के MP संतोष गंगवार सिर्फ राज्यमंत्री

देखिए कैबिनेट सचिव पीके सिन्हा से लेकर टॉप 26 अधिकारियों में सभी सवर्ण- (प्रथम सूची) 

इस सूची मे ं26 अधिकारियों में से 26 सवर्ण हैं, ओबीसी, एससी, एसटी शून्य

इसे भी पढ़ें-MP में हार्दिक की सक्रियता से बढ़ रहीं हैं BJP की धड़कनें, शाजापुर में किसान महापंचायत पार्ट-2 आज

कैबिनेट सचिवालय से ही देश का काम काज चलता है- 

भारत सरकार (कामकाज का आबंटन) नियम, 1961 के प्रावधानों के तहत मंत्रिमंडल सचिवालय प्रधानमंत्री के अधीन कार्य करता है। इसका प्रशासनिक प्रमुख कैबिनेट सचिव होता है जो सिविल सर्विसेज बोर्ड का पदेन अध्यक्ष भी है। कैबिनेट सचिव का कार्य होता है-

कैबिनेट सचिवालय विभिन्न मंत्रालयों के बीच समन्वय स्थापित करते हुए और मंत्रालयों के बीच मतभेदों को दूर करते हुए सरकार को निर्णय लेने में मदद करता है तथा सचिवालय की स्थाई/तदर्थ समितियों के जरिए आपस में सहमति बनाए रखता है। इस विधि से नई नीतियों की पहल को प्रोत्साहित भी किया जाता है।

कैबिनेट सचिवालय यह सुनिश्चित करता है कि सभी मंत्रालयों/विभागों की प्रमुख गतिविधियों के बारे में हर महीने एक सारांश बनाकर राष्ट्रपति, उप-राष्ट्रपति और मंत्रियों को उससे अवगत कराया जाए। देश में किसी बड़े संकट के समय उसका प्रबंधन करना तथा ऐसी परिस्थितियों में विभिन्न मंत्रालयों की गतिविधियों में समन्वय स्थापित करना भी कैबिनेट सचिवालय का एक काम है।

कैबिनेट सचिव, सिविल सर्विसेज का प्रमुख भी होता है। इसलिए विभिन्न मंत्रालयों के बीच समन्वय को बढ़ावा देने के लिए कैबिनेट सचिवालय एक उपयोगी माध्यम है।

इसे भी पढ़ें- BJP सांसदों ने PM मोदी को दिखाया आईना, बोले जनता हमारा और विधायकों का मजाक बना रही है

टॉप 26 के बाद एससी के कुछ अधिकारियों के नाम- (दूसरी सूची)- 

इस सूची में शामिल 27 अधिकारियों में से

सामान्य- 20 , एससी- 7 , ओबीसी- 0, एसटी- 0

इसे भी पढ़ें-मायावती का राज्यसभा से इस्तीफे का ऐतिहासक निर्णय और मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी की भूमिका

मोदी मंत्रिमंडल में गृह को छोड़कर सभी महत्वपूर्ण मंत्रालय ब्राह्मणों के पास- 

मोदी सरकार के मंत्रिमंडल में राजनाथ सिंह राजपूत को छोड़कर सभी प्रमुख मंत्रालय ब्राह्मणों के कब्जे में हैं। लोकसभा चुनाव हारे अरुण जेटली को वित्त और रक्षा व स्मृति ईरानी को सूचना प्रसारण और कपड़ा मंत्रालय जैसे दो-दो मंत्रालयों की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इनके अलावा जनेऊ नेक्सस से सुषमा स्वराज, सुरेश प्रभु, नितिन गडकरी, अनंतकुमार, कलराज मिश्र, प्रकाश जावडेकर, महेश शर्मा, राजीव प्रताप रूढ़ी, बंडारू दत्तात्रेय और महेंद्र नाथ पांडे के रूप में ब्राह्मण मंत्रियों का दबदबा बरकरार है। कैबिनेट मंत्रिमंडल में भी ओबीसी की उपेक्षा की गई है।

(नोट– ये कैबिनेट सचिवालय द्वारा आरटीआई के जवाब में दी हुई अंतिम सूची है। इसके बाद डाली गई किसी भी आरटीआई का जवाब मोदी सरकार ने नहीं दिया है। इसलिए यही उपलब्ध और प्रमाणिक आरटीआई है)

Related posts

Share
Share