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कोटे में कोटा लगाएगी OBC PM नरेन्द्र मोदी की सरकार, पिछड़े वर्ग को आपस में बांटने की साजिश

नई दिल्ली, नेशनल जनमत ब्यूरो। 

केंद्र सरकार ओबीसी कोटा खत्म करने के लिए वो सभी हथकंडे अपना रही है। जिससे ओबीसी कोटा खत्म भले ही ना हो लेकिन उसे इस स्थिति में पहुंचा दिया जाए कि उसके होने के मायने ही ना रह जाएं। सरकार ओबीसी कोटे पर कहीं सीधे चोट कर रही तो कहीं उसे चुपके से नुकसान पहुंचाया जा रहा है।

ओबीसी प्रधानमंत्री के राज में तकरीबन सभी परीक्षाओं में ओबीसी को उसके कोटे में ही सीमित करने के बाद अब ओबीसी को क्रीमीलेयर के नाम पर बांटने की साजिश शुरू कर दी है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने क्रीमीलेयर पॉलिसी को अमलीजामा पहनाने की तैयारी कर ली है। अब ओबीसी में कोटे में कोटा बनेगा कटैगराईजेशन के लिए सरकार ने एक आयोग गठित करने क निर्णय लिया है।

कोटे में कोटा लगाकर आरक्षण के प्रति और अपने अधिकारों के प्रति जागरूक हो चुकी जातियों को अलग कैटेगरी में बांट दिया जाएगा, जिससे आरक्षण के लिए संघर्ष करने वाले लोग और जातियों को आपस में कैटेगरी के नाम पर लड़ा दिया जाए।

केंद्र की बीजेपी सरकार ने छह लाख से बढ़ाकर आठ लाख क्रीमीलेयर की सीमा कर दी है। ऐसा माना जा रहा है कि अब मोदी कैबिनेट ने आर्थिक रूप से संपन्न पिछड़ा वर्ग के लोगों को आरक्षण से दूर निकालने का फैसला लिया है। वहीं वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा है कि कमेटी से 12 हफ्ते में रिपोर्ट मांगी गई है।

राष्ट्रपति के पास भेजी गई सिफारिश-

वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा, ”इस बारे में साल 2011 में राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग ने सिफारिश की थी. इस प्रकार की सबकैटगरी बनायी जाए. इसी प्रकार की सिफारिश पार्लियामेंट की स्टैंडिंग कमेटी ने भी साल 2012-13 में की थी. मंत्री परिषद में चर्चा के बाद इसको स्वीकार किया गया. ओबीसी की सूची में सब-कैटिगरी बनाने की दिशा में एक आयोग का गठन करने के लिए राष्ट्रपति के पास सिफारिश भेजी गई है.”

एक तरफ तो सरकार ओबीसी को आरक्षण से वंचित कर रही है दूसरी तरफ ओबीसी को ओबीसी से लड़ाने के लिए वो नये तर्क गढ़ रही है। सरकार का कहना है कि ओबीसी कैटेगरी में मुठ्ठी भर परिवार ही कोटे का लाभ उठाकर सुविधा संपन्न हो रहे हैं। ऐसे परिवार अपने ही वर्ग के हक मार रहे हैँ।

इस बार में नेशनल जनमत का सुझाव ये है कि केन्द्र सरकार जातिवार जनगणना के आंकड़े घोषित करे उससे साफ पता लग जाएगा कि हकमारी कौन कर रहा है औऱ देश के संसाधनों और नौकरियोें पर कौन सी जाति कब्जा जमाए बैठी है।

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