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OBC को आबादी के हिसाब से आरक्षण देने की मांग, ग्वालियर से दिल्ली पदयात्रा करेंगे प्रेमचंद कुशवाहा

नई दिल्ली, नेशनल जनमत ब्यूरो। 

पिछड़े वर्ग के विभिन्न सामाजिक संगठनों को एकजुट करके अखिल भारतीय कुशवाहा महासभा के राष्ट्रीय महामंत्री प्रेमचंद कुशवाहा मध्य प्रदेश के ग्वालियर से लेकर देश की राजधानी दिल्ली तक बड़ी पदयात्रा निकालकर ‘आरक्षण बचाओ, आरक्षण बढ़ाओ’ आंदोलन का आगाज करेंगे।

6 मई 2018 से शुरू होने वाली इस  पदयात्रा के लिए प्रेमचंद कुशवाहा ने कुशवाहा, शाक्य, सैनी,मौर्य के साथ ही कुर्मी, यादव, पाल, निषाद, तेली, नाई जैसी ओबीसी की तमाम जातियों के संगठनों से सम्पर्क साधकर सहयोग मांगने की शुरूआत कर दी है।

इस पदयात्रा की जरूरत क्यों पड़ी- 

‘नेशनल जनमत’ से बात करते हुए पदयात्रा के संयोजक आगरा निवासी कुंवर प्रेमचंद कुशवाहा ने कहा कि ओबीसी वर्ग के कोई भी नेता लोक सभा या विधान सभा के सदन में ओबीसी के हक की आवाज बुलन्द क्यों नही करते ?

भारत मे अन्याय अत्याचार के विरोध में जो सामाजिक क्रांति हुई उनके नेता पिछड़े वर्ग के ही लोग थे ! उन्होंने भारत के मूल निवासी दलित पिछड़ो को मानवीय अधिकार दिलाने के लिये जीवन भर संघर्ष किया।

राष्ट्रपिता ज्योतिबा फुले, सावित्री बाई फुले, पेरियार रामासामी नायकर, बिरसा मुंडा, संत गाडगे, छत्रपति शिवाजी महाराज, शाहूजी महाराज, बाबा साहेब अंबेडकर, महामना रामस्वरूप वर्मा, पेरियार ललई यादव, बिहार लेनिन बाबू जगदेव प्रसाद कुशवाहा, जननायक कर्पूरी ठाकुर ऐसे नेता रहे जिन्होंने भारत के मूल निवासी बहुजन समाज को एक नई दिशा दी।

इन जननायकों ने पिछड़ों-दलितों को स्वाभिमान से जीवन जीने की प्रेरणा दी और जीवन भर संघर्ष किया। लेकिन आज इन्ही की संतान शोषक वर्ग के चुंगल से नही निकलना चाहती। निकलना तो दूर उन्हीं के चंगुल में फंसती जा रही है। जिनका विरोध ओबीसी समाज के महापुरुषों किया।

सवर्णो की गुलामी में लगे हैं ओबीसी नेता- 

प्रेमचंद कुशवाहा कहते हैं कि ओबीसी समाज के नेता अपने समाज और वर्ग को भूलकर अगड़ों की जी हजूरी करने में लगे हैं। ओबीसी के नाम पर पिछड़ों के हिमायती ज्यादातर नेता अपने अपने घर को और अपने नाते रिश्तेदारों को आगे बढ़ाने में लगे है।

संविधान निर्माण के समय डॉ. अम्बेडकर ने कहा था कि संविधान में मैने कोई नई बात शामिल नहीं की है। भारत के सामाजिक कार्यकर्ता जो चाहते थे मैंने उन्ही की बात को संविधान में जगह दी है। भारत की अखंडता के लिये जो जरूरी था डॉ. अंबेडकर ने सभी को संविधान में समान अवसर, समान प्रतिनिधित्व देने की व्यवस्था की थी।

पिछड़ों को आबादी के हिसाब से हिस्सेदारी मिले- 

भारत की जनसंख्या के अनुसार भारत में 52 प्रतिशत पिछड़े वर्ग के लोग हैं। संविधान की मूल भावना के अनुसार 52 प्रतिशत आबादी को उचित प्रतिनिधित्व देने के लिए नौकरियों के साथ ही लोकसभा-विधानसभा में आबादी के हिसाब से सीटों का आरक्षण मिलना चाहिए।

क्रीमीलेयर और पचास फीसदी आरक्षण का गैर संवैधानिक बहाना बनाकर पिछड़े वर्ग के लोगो को मूर्ख बनाया जा रहा है। पिछड़े वर्ग के लोगो को आपस में लड़वाया जा रहा है। जिससे पिछड़े वर्ग के लोग अपने मूल मुद्दों से भटक जाएं।

पिछड़ा वर्ग के मानसिक गुलाम स्वजाति नेता, अपनी जात और वर्ग को भूलकर अपनी तिजोरी भरने में लगे रहे। 99 प्रतिशत ओबीसी नेताओं ने किसी भी सदन में ओबीसी के आरक्षण को लेकर अपने अधिकारों की आवाज नही उठाई और खुद मानसिक गुलाम बने रहे और अपना चेहरा दिखाकर अपने समाज को ठगवाते रहे।

पिछड़ों से अपील- 

ओबीसी वर्ग के लोगो से अपील है कि अपने पुरखों के त्याग को याद करो। वर्ना आने वाली ओबीसी वर्ग की नई पीढ़ी हजारों साल पुरानी व्यवस्था में चली जाएगी। इसलिए अब समय सड़क पर आने का है नहीं तो सरकारे आरक्षण खत्म कर देंगी और आप देखते रह जाएंगे।

मध्य प्रदेश से दिल्ली तक यात्रा क्यों?

आगामी समय में मध्यप्रदेश और राजस्थान में विधानसभा के चुनाव होने हैं। ऐसे में ये पदयात्रा दोनों प्रदेशों के ओबीसी मतदाताओं को अपने अधिकारों के प्रति जागरूक करेगी।

ओबीसी की बड़ी तादात को देखते हुए इतना तय है कि ओबीसी समाज अगर अपने अधिकारों के प्रति जागरूक हो गया तो दोनों जगह सत्ता में बैठी बीजेपी के लिए मुश्किलें खड़ी हो सकती हैं।

किसानों का दिमाग खेत-खलिहान-खाद-पानी-बिजली से भटकाकर पाकिस्तान-चीन में उलझा दिया गया है !

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