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कब तक चुप बैठोगे, अब NIT काउंसलिंग में भी खेल, OBC-SC स्टूडेंट को रोकने की महीन साजिश

नई दिल्ली। नेशनल जनमत ब्यूरो 

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा था आरक्षण खत्म नहीं होने दूंगा. बिल्कुल सच है नहीं होगा। लेकिन उसके आगे प्रधानमंत्री ने ये नहीं बताया था कि आरक्षण खत्म तो नहीं होने दूंगा लेकिन लेने भी नहीं दूंगा। पूरे देश के संस्थानों में आरक्षित वर्ग के साथ बड़ा खेल किया जा रहा है। आरक्षित वर्ग को ये भरोसा दिलाया जा रहा है कि उनका कोटा सुरक्षित है लेकिन हकीकत ये है कि सवर्णों को 50 प्रतिशत और ओबीसी, एससी, एसटी को सिर्फ उनके कोटे में ही सीमिति किया जा रहा है।

उससे भी बारीक साजिश इलाहाबाद के मोतीलाल नेहरू इंजीनियरिंग कॉलेज से सामने आई है। सामाजिक चिंतक और एक्टीविस्ट मोहम्मद जाहिद अपनी फेसबुक पर इस साजिश की आपबीती बता रहे हैं पढ़िए। घटना से तस्वीर स्पष्ट है कि सरकार की मंशा आरक्षित वर्ग का जीवन स्तर ऊंचा उठाने और उनको संस्थानों में जगह देने की बिल्कुल नहीं है बल्कि सरकार का प्रयास किसी तरह से  आरक्षित वर्ग को कारण या बहाना निकालकर रोक देने की है।

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इलाहाबाद स्थित मोतीलाल नेहरू इन्जीनियरिंग कालेज में अपने भांजे के लिए एनआईटी की काउंसलिंग के लिए एम एम हाल के मुख्य द्वार पर जैसे ही पहुँचा एक गाँव का गरीब बूढ़ा व्यक्ति एक रोती हुई लड़की के साथ हाल से बाहर आ रहा था, लड़की बेतहाशा रोए जा रही थी। मैं हैरान था कि काउंसलिंग के लिए आए छात्र छात्राओं में कोई रो भी कैसे सकता है ?

हाल के अंदर कुछ छात्र और छात्राएं बेहद परेशान और निराश थे। मुझे लगा कि कोई बहुत बड़ी समस्या है, हाल में तीन तरफ से काउंटर लगे हुए थे। काउंटर नंबर 1 पर एनआईटी में उत्तीर्ण छात्र छात्राएं अपनी उपस्थिति दर्ज कराकर बैंक में एडमिशन फीस जमा करने के लिए भेजे जा रहे थे। फिर काउंटर नंबर 2 पर डाक्युमेन्टेशन की प्रक्रिया पूरी की जा रही थी।

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मैं अपने भांजे की एडमिशन फीस जमा करके फिर हाल में पहुंचा तो कुछ छात्र आक्रोशित थे उनमें से  3-4 छात्राएं रो रहीं थीं। पता करने पर मैं आश्चर्यचकित हो गया कि देश का प्रतिष्ठित संस्था किस तरह अव्यवस्थित और भेदभादभाव पूर्ण तरीके से काउंसलिंग करा रही है।

आखिरी दिन की काउंसलिंग में स्टूडेंट के सामने आया नियम-

दरअसल 1 जुलाई से 3 जुलाई तक सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक होने वाली इस काउंसिलिंग का आज आखिरी दिन था और राज्य सरकारों द्वारा जारी जाति प्रमाण पत्र को यह संस्था अस्वीकार कर रही थी। संस्थान का कहना था कि केंद्रीय जाति प्रमाण पत्र की बनवा कर लाओ। अजीब सी अव्यवस्था है अपने ही राज्य द्वारा जारी जाति प्रमाण पत्र उसी राज्य की एक शैक्षणिक संस्था अस्वीकार कर रही थी। जाहिर सी बात है परेशान सभी बच्चे दलित और ओबीसी थे।

इनकी एक वर्ष की मेहनत और परीक्षा के सफल परिणाम सब एक अव्यवस्था के कारण बर्बाद होने जा रहे थे। 2-3 दिन में केंद्रीय सरकार द्वारा जारी जाति प्रमाण पत्र प्राप्त करना भारत जैसे अव्यवस्था वाली व्यवस्था में असंभव ही है।

अपनी मेहनत और लगन से एनआईटी पास करने वाले यह छात्र परेशान थे और छात्राएं रो रहीं थीं। दरअसल दलितों और ओबीसी के लिए आरक्षण,  कटआफ या फीस में कटौती करना सरकार आरक्षित वर्ग पर अहसान मानती है। जबकि संस्थानो की जातिवादी ब्राह्मणवादी व्यवस्था ऐसे ऐसे दांवपेंच चलाती है कि ऐसे पिछड़े और दलित छात्र परेशान हों।

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पिछड़े ग्रामीण क्षेत्रों और अनपढ़ मां बाप के यह छात्र छात्राएं बदल गये नियम कानून से अनभिज्ञ ही होते हैं। ऐसे दलित और पिछड़ी जातियों के छात्र अचानक हाइटेक व्यवस्था में खुद का सामंजस्य नहीं बना पाते।

यदि आप आरक्षण , कटआफ और फीस में उन छात्रों को लाभ दे रहे हैं तो इस मामले में भी इतनी सख्ती ठीक नहीं। तमाम नियम कानून सुदूर ग्रामीण क्षेत्र के पिछड़े दलित हिन्दी मीडियम के छात्र समझ नहीं पाते।

इनके लिए काउंसलिंग के पहले ओरिएंटेशन प्रोग्राम भी कराने की व्यवस्था की जानी चाहिए जिससे उनको एडमिशन और डाक्युमेन्टेशन की पूरी प्रक्रिया की जानकारी हो और आज जैसी स्थिति से यह बच सकें।

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निश्चित ही यह दलित और ओबीसी छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ है। देशभर में 30 एनआइटी संस्थाओं में लगभग यही स्थिति होने की संभावना है तो सोचा जा सकता है कि कितने दलित और ओबीसी छात्रों का भविष्य खतरे में आ गया।

यह देश की हाइटेक व्यवस्था है जो आईआईटी के बाद सबसे सम्मानित और उत्कृष्ट संस्थानों में गिनी जाती है।
संस्थाओं को ऐसे परेशान और वापस कर दिए गये ओबीसी और दलित छात्रों को एक अवसर और देना चाहिए।

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