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दलितों- पिछड़ों की एकता कायम करने के लिए लालू मायावती को भेजेंगे राज्यसभा !

नई दिल्ली-पटना। सोबरन कबीर

राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव और उनके सामाजिक न्याय से जुड़े सवाल बीजेपी के लिए नासूर बने हुए हैं। इतना ही नहीं लालू प्रसाद यादव ही हैं जो 2019 चुनाव के लिए साम्प्रदायिकता विरोधी ताकतों को एकजुट करने की मुहिम में अगुआ बने हुए हैं। इसी मुहिम में शामिल है मायावती जैसी नेता का संसद में बने रहना। दरअसल बीएसपी की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती का राज्यसभा में कार्यकाल अगले साल खत्म हो रहा है। इसलिए लालू प्रसाद यादव ने महागठबंधन के तहत समान विचारधारा के दलों को एकजुट रखने के लिए इस कवायद को तेज कर दिया है।

उ.प्र. से राज्यसभा जाने के लिए 34 विधायक चाहिए-

दो अप्रैल 2018 को मायावती सहित यूपी के 10 राज्यसभा सदस्यों की सदस्यता खत्म हो जाएगी। वर्तमान में बसपा के यूपी विधानसभा में 19 विधायक हैं, जबकि उ.प्र. में 34 विधायकों के समर्थन से ही कोई नेता राज्यसभा पहुंच सकता है.जाहिर है बसपा अपने दम पर मायावती को राज्यसभा नहीं पहुंचा सकती. ऐसे में राजद सुप्रीमों लालू यादव ने बसपा सुप्रीमों को राज्यसभा भेजने का मन बना लिया है. दोनों दलों के नेताओं की इस विषय में बातचीत भी हो चुकी है. देश के राजनीतिक चिंतक इसे उत्तर भारत की राजनीति की बड़ी घटना मान रहे हैं. इससे देश में दलितों और पिछड़ों के एक होने की संभावना बढ़ गई है. बहुजन समाज पार्टी के अभी भले ही कम एमएलए हैं लेकिन यूपी में 22 प्रतिशत वोटों के साथ बीएसपी अभी भी उत्तर भारत की एक बड़ी पार्टी है।

सपा सिर्फ एक को भेज सकती है राज्यसभा-

47 विधायकों के साथ एसपी सिर्फ एक नेता को राज्यसभा भेजने की स्थिति में होगी और इसके बाद एसपी के पास 13 वोट अतिरिक्त होंगे। अगर एसपी की सहयोगी कांग्रेस के 7 वोट भी जोड़ लें तो इसके पास एक राज्यसभा सीट जीतने के बाद 20 वोट बचेंगे। ऐसे में लालू प्रसाद यादव की पहल मायावती को राज्यसभा पहुंचाने में कारगर हो सकती है।

वरिष्ठ पत्रकार दिलीप मंडल ने फेसबुक वॉल पर लिखते हैं-

– लालू जी की बहनजी से बात हुई। बहनजी बिहार से राज्य सभा में आ सकती हैं।
– लालू जी देश भर में ग़ैर भाजपा शक्तियों को जोड़ रहे हैं।
– गुजरात में कांग्रेस के समर्थन में सभी पार्टियाँ प्रचार के लिए जाएगी।
– राहुल गांधी उनके संपर्क में हैं।
– उत्तर भारत में बीजेपी को रोकने का एकमात्र मॉडल लालू जी के पास है। यह सभी मान रहे हैं।
– लालू ही हैं, जिनके नाम से RSS को बुखार चढ़ जाता है। हाफ पेंट गीली हो जाती है।
– बिहार में गठबंधन अटूट बना हुआ है।
क्या इतनी वजह काफ़ी नहीं है, जिसके लिये लालू प्रसाद के खिलाफ छापे डाले जाएँ?

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