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पिछड़ों-गरीबों के मसीहा वीपी सिंह जयंती पर नमन, पढ़िए जातिवादियों के आंख की किरकिरी कैसे बन गए !

नई दिल्ली। नेशनल जनमत ब्यूरो 

पूर्व प्रधानमंत्री विश्वनाथ प्रताप सिंह की आज जयंती है. लोग उन्हें मंडल मसीहा, पिछड़ो-गरीबों के मसीहा ना जाने किन-किन नाम से जानते हैं. लेकिन जातिवादियों के लिए वीपी सिंह विलेन से कम नहीं क्योंकि उन्होंने मंडल कमीशम की सिफारिशें अपनी प्रधानमंत्री रहते हुए स्वीकार कर लीं थीं. खैर सभी अपने-अपने ढ़ंग से सोचने के लिए स्वतंत्र हैं लेकिन नेशनल जनमत उनको ओबसी जातियों का मसीहा मानता है.

सोशल एक्टीविस्ट चन्द्रभूषण सिंह यादव”प्रहरी” का ये शानदार लेख और कविता बीपी सिंह जी को समझने में आपकी मदद करेगी….

25 जून 1931 को राज घराने में जन्मे राजा मांडा अर्थात वीपी सिंह जी को कोटिशः नमन है।जाति से क्षत्रिय और राजघराने के वीपी सिंह जी को नमन करने पर कुछ लोग सवाल उठाते है कि सवर्ण वीपी सिंह को क्यो हम याद करें? बहुत सारे साथी वीपी सिंह जी के अन्य कार्यो को बताते और गिनाते हुए कहते है कि वीपी सिंह को उपेक्षित जाति के लोगो को याद नही करना चाहिए। वीपी सिंह जी ने मण्डल कमीशन लागू कर कोई अहसान नही किया है। वीपी सिंह जी ने देवीलाल जी के काट में मण्डल लागू किया था।ऐसी अनेक बातें वीपी सिंह जी के विरुद्ध हमारे वे साथी उठाते हैं जो मण्डल से लाभ पाने वाली जातियों या वर्गो से हैं।

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मैं अपने ऐसे साथियो के तर्क से कभी भी इत्तफाक नही रखा और इसे उस महापुरुष के साथ अहसानफरामोशी माना क्योकि वीपी सिंह जी ने चाहे जिन परिस्थितियों में मण्डल लागू किया लेकिन लागू किया तो औऱ अपने समाज से कुलद्रोही कह अपमान का जहर पीया तो।

मंडल कमीशन लागू करते ही सवर्णों के लिए विलेन बन गए – 

वीपी सिंह जी देश के बड़े लोगो की नजर में तब तक ईमानदार,बेदाग,फकीर,राजर्षि आदि रहे जब तक वे पिछडो के मण्डल कमीशन को लागू नही किये लेकिन जैसे ही 7 अगस्त 1990 को मण्डल लागू करने की घोषणा किये वैसे ही वो कलंक,मानसिंह के वँशज आदि हो गए और वीपी सिंह को क्षत्रियो ने जाति निकाला कर दिया।

वीपी सिंह जी ने इस देश मे बुद्ध के समता,समानता,बहुजन हिताय-बहुजन सुखाय के सिद्धांत को अमली जामा पहनाया भले ही उनके खुद के जामा को इस देश के अभिजात्य वर्ग ने नोच डाला।वीपी सिंह जी ने मण्डल लागू करने के बाद अभिजात्य समाज द्वारा तिरस्कृत करने तथा पिछड़े वर्ग द्वारा आशातीत सम्मान न देने के बावजूद कभी उफ नही कहा।

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पिछड़ों को चपरासी से लेकर कलेक्टर तक बनने का अवसर दिया- 

वे अपने सामाजिक न्याय के एजेंडे पर अड़े रहे, भले ही राजनैतिक वनवास को प्राप्त हो गए।वीपी सिंह जी ने मण्डल कमीशन को लागू करने के बाद मेरे जैसे अनगिनत लोगो को रोटी दिया। इस देश के असंख्य पिछडो को कलक्टर से चपरासी तक कि सेवा का अधिकारी बनाने वाले वीपी सिंह जी हम सबके अन्नदाता है।यदि बुद्ध ,कबीर,लोहिया ने समता और सम्मान की बात करते हुए सिद्धांत दिया, अम्बेडकर साहब ने उसे कानूनी रूप दिया,वीपी मण्डल जी ने अम्बेडकर साहब के कानून के मुताबिक सिफारिश किया तो वीपी सिंह जी ने उसे मूर्त रूप दिया।

महान थे वीपी सिंह- 

मेरी नजर में वीपी सिंह महान थे जिन्होंने खुद जहर पीकर हम सब असंख्य पिछडो को अमृत दिया।इसीलिए मैं वीपी सिंह जी के लिए यह कहता हूं कि-
“इक बून्द भर चीज थी,सागर तुम्ही ने की।
होती नही जो बात उजागर तुम्ही ने की।
मिट ही चुके थे हम कि हमे जिंदगी वापस,
अपने गले सलीब लगाकर तुम्ही ने की।।”
मैं वीपी सिंह जी को उनके जन्मदिन पर पूरे शिद्दत के साथ याद करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करता हूँ।

इस कविता में पूरा निचोड़ है वीपी सिंह के व्यक्तित्व का- 

मैंने मण्डल कमीशन लागू करने के बाद वीपी सिंह जी के सम्मान में एक गीत लिखा था जो उन्हें उनके जन्मदिन पर समर्पित है-

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“नई ज्योति हममे जला देने वाले,नई चेतना हममे ला देने वाले।
नमन है,नमन है,नमन है तुम्हारा,गरीबो के हक को दिला देने वाले।।
सूरज की किरणें ना पँहुची जहां तक,
नजर तेरी बारीक पँहुची वहां तक।
अंधेरा-अंधेरा रहा ढंक के जिसको,
खुली रौशनी मिल गयी आज उसको।।

सुधा रस सभी को पिला देने वाले,नई ज्योति हममे जला देने वाले।
नमन है,नमन है,नमन है तुम्हारा,गरीबो के हक को।दिला देने वाले।।
सदियों से मारा था जिनको जमाना,
मेहनत के बदले में अपमान पाना।

यही था नियम सृष्टि का आज अब तक,
अगर तुम न होते तो चलता ये कब तक?
हथौड़ा इसी पर चला देने वाले,नई ज्योति हममे जला देने वाले।
नमन है,नमन है,नमन है तुम्हारा,गरीबो कद हक को दिला देने वाले।।

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हमारी थी मेहनत,कमाई हमारी,
खाते थे छककर मलाई हमारी।
आदेश देने ही पेशा था इनका,
जुल्मोसितम का ही ठेका था इनका।।

मुक्ति सभी का करा देने वाले,नई ज्योति हममे जला देने वाले।
नमन है,नमन है,नमन है तुम्हारा,गरीबो के हक को दिला देने वाले।।

हर वर्ष आती थीं पतझड़ बहारें,
वर्षा की होती थीं सुन्दर फुहारे।
हमें कुछ न मालूम होता था यह सब,
आयी थी सर्दी और गर्मी यहां कब?
अहसास इनका करा देने वाले,नई ज्योति हममे जला देने वाले।
नमन है,नमन है,नमन है तुम्हारा,गरीबो के हक को दिला देने वाले।।

एमपी,एमएलए और मंत्री बनेंगे,
एसपी,कलक्टर और सन्तरी बनेंगे।
दलितों की सत्ता में हो भागीदारी,
ये ललकार गूंजी जहां में तुम्हारी।।
चमन में कली को खिला देने वाले,नई ज्योति हममे जला देने वाले।
नमन है,नमन है,नमन है तुम्हारा,गरीबो के हक को दिला देने वाले।।

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हिन्दू-मुसलमान हो चाहे ईसाई,
रहें सिक्ख, जैनी सभी एक भाई।
करें काम कोई न अफवाह सुनकर,
दिलो को जो बांटे, करें चोट उनपर।।
आपस मे सबको मिला देने वाले,नई ज्योति हममे जला देने वाले।
नमन है,नमन है,नमन है तुम्हारा,गरीबो के हक को दिला देने वाले।

बुद्धा और गांधी की तुम नीति लेकर,
लोहिया-अम्बेडकर की तुम सीख लेकर।
चले ज्योति “समता” का “प्रहरी उठाये,
राहों में जालिम थे कांटे बिछाए।।
कठिन मग में पग को जमा देने वाले,नई चेतना हममे ला देने वाले।
नमन है,नमन है,नमन है तुम्हारा गरीबो के हक को दिला देने वाले।।”

 

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