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मोदी सरकार नोटबंदी का जश्न मनाने को तैयार, लेकिन 1 साल बाद भी सारे नोट नही गिन पाया RBI, गिनती जारी

नई दिल्ली, नेशनल जनमत ब्यूरो। 

8 नवंबर को नोटबंदी का एक साल पूरा हो रहा है, लेकिन उससे पहले ही सत्ता पक्ष और विपक्षी दलों के बीच सियासी घमासान छिड़ गया है। कांग्रेस समेत 18 विपक्षी दलों ने जहां 1 साल पूरा होने पर काला दिवस मनाने का ऐलान किया है, वहीं बीजेपी ने इस दिन का जश्न मनाने की घोषणा कर दी है।

बीजेपी के जश्न मनाने की घोषणा के बीच एक महत्वपूर्ण खबर ये निकल कर आ रही है कि नोटबंदी के 1 साल पूरा होने के करीब पहुंचकर भी रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया पूरे नोटों की गिनती नहीं कर पाई है। जबकि लाल किले की प्राचीर से पीएम मोदी पता नही कौन से आंकड़े देश की जनता को बता चुके हैं।

रिजर्व बैंक की आधिकारिक घोषणा के अनुसार आरबीआई ने 30 सितंबर तक 500 रुपए के 1,134 करोड़ नोट तथा 1000 रुपए के 524.90 करोड़ नोटों का सत्यापन कर लिया है।

देश में नोटबंदी के लगभग एक साल पूरे होने को हैं लेकिन रिजर्व बैंक अभी भी वापस आए नोटों की गिनती एवं जांच का काम पूरा नहीं कर सका है। केंद्रीय बैंक ने सूचना का अधिकार (आरटीआई) के तहत पूछे गए एक सवाल के जवाब में यह जानकारी दी।

रिजर्व बैंक ने कहा कि वह 30 सितंबर तक 500 रुपए के 1,134 करोड़ नोट तथा 1000 रुपए के 524.90 करोड़ नोट का सत्यापन कर चुका है। इनके मूल्य क्रमश: 5.67 लाख करोड़ रुपए और 5.24 लाख करोड़ रुपए हैं।

उसने आगे कहा कि दो शिफ्ट में सभी उपलब्ध मशीनों में नोटों की गिनती एवं जांच की जा रही है। आरटीआई के तहत रिजर्व बैंक से नोटबंदी के बाद वापस आए नोटों की गिनती के बारे में पूछा गया था। गिनती समाप्त होने के समय के बारे में उसने कहा, ‘‘वापस आए नोटों की गिनती की प्रक्रिया जारी है।’’

विपक्ष ने कहा सदी का सबसे बड़ा घोटाला- 

वहीं, नोटबंदी को सदी का सबसे बड़ा घोटाला करार देते हुए विपक्ष ने कुछ दिनों पहले घोषणा की कि इस फैसले के एक साल पूरे होने पर विपक्षी दल आठ नवंबर को काला दिवस मनाएंगे तथा देश भर में विरोध-प्रदर्शन करेंगे।

विपक्ष का दावा है कि नोटबंदी के कारण अर्थव्यवस्था एवं नौकरियों को नुकसान पहुंचा है। गुलाम नबी आजाद ने संवाददाताओं को संबोधित करते हुए कहा था कि पिछले साल आठ नवंबर को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 1000 रूपए और 500 रूपए के नोटों को प्रचलन से बंद किए जाने की घोषणा की थी।

विपक्ष ने तभी नोटबंदी के फैसले के कारण अर्थव्यवस्था की हालत बुरी होने, बेरोजगारी बढ़ने और सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) कम होने की आशंका जताई थी।

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