You are here

जानिए, उरई रोडवेज डिपो में हर साल क्यों मनाया जाता है महेन्द्र सिंह निरंजन का निर्वाण दिवस !

लखनऊ, नेशनल जनमत ब्यूरो। 

इतिहास गवाह है कि संघर्ष करने वाला व्यक्ति इतिहास के पन्नों मे दर्ज हो जाता है और डरपोक व्यक्ति सत्ता में होने के बाद भी कुर्सी से चिपक कर मर जाता है लेकिन उसका कोई नामलेवा भी नहीं होता।

यशकायी महेन्द्र सिंह निरंजन को शहीद ऐसे ही नहीं कहा गया पुलिसिया रौब के खिलाफ उनके संघर्ष को याद करने के लिए आज 14 साल बाद भी उरई डिपो इम्पलाइज यूनियन के उनके साथी 1 फरवरी को हर साल उनका निर्वाण दिवस मनाते हैं।

कोंच का बहुचर्चित कोतवाली कांड पुलिस की बर्बर मानसिकता का जीता जागता उदाहरण है। एक फरवरी 2004 कोंच के इतिहास के पन्नों में काले दिन के रूप में दर्ज है।

इसी दिन तत्कालीन कोतवाल डीडी सिंह राठौर ने क्षेत्र की तीन हस्तियों को निर्दोष होते हुये भी केवल इसलिये मौत के घाट उतार दिया था कि उन्होंने कोतवाल की निरंकुशता और मनमानी पर सवाल खड़े करने और निर्दोषों को रात भर लॉकअप में बंद रखने का विरोध किया था।

14 साल बाद भी लोगों के जहन में याद ताजा है- 

चौदह साल का लंबा अंतराल गुजर जाने के बाद भी यहां के लोगों के जेहन में पहली फरवरी 2004 की वह घटना आज भी ताजा है जब कोतवाली में महेन्द्रसिंह निरंजन, सुरेन्द्रसिंह निरंजन और दयाशंकर झा को कोतवाल ने बड़ी बेरहमी से गोलियों से छलनी कर दिया था।

उक्त घटना को अनहोनी समझ कर भुलाने के लिये चौदह साल का लंबा समय भले ही काफी माना जाता हो लेकिन उन घावों के निशानों का क्या जो जब भी सामने आते हैं, उस काले दिन की बुरी यादें बरबस ही लोगों के जेहन में उतर कर रीढ़ में सिहरन पैदा कर देती हैं।

क्या हुआ था 1 फरवरी 2004 को ?

दरअसल, 31 जनवरी 2004 की रात तत्कालीन कोतवाल डीडी सिंह राठौर ने रोडवेज कर्मचारी यूनियन के मंडलीय नेता महेन्द्र सिंह निरंजन व वरिष्ठ सपा नेता सुरेन्द्र सिंह निरंजन के दामाद शिवकुमार निरंजन को बिना कारण बताए ही रात भर कोतवाली के लॉकअप में बंद रखा था।

पहली फरवरी को जब घमंड में चूर कोतवाल डीडी सिंह राठौर से जवाब मांगा गया तो उन्हें इसमें स्वर्ग सिधार चुके डीडी सिंह राठौर को अपनी तौहीन लगी और बाद विवाद बढ़ता गया। स्वाभिमानी महेन्द्र सिंह निरंजन ने कोतवाली के अंदर ही गाली-गलौच पर उतर आए डीडी सिंह राठौर की कॉलर पकड़ ली।

इसके बाद कोतवाल और उनके पुत्र ने सुरेन्द्र सिंह निरंजन, उनके बड़े भाई महेन्द्र सिंह निरंजन तथा उनके मित्र दयाशंकर झा को कोतवाली में घेरकर अपने पुत्र के साथ गोली मार दी।

इस घटना के बाद लोगों ने कोतवाली घेरना शुरू कर दिया और आसपास के गांवों से ट्रेक्टर से भरकर लोग कोतवाली पहुंचने लगे। भीड़ डीडी सिंह राठौर का हिसाब बराबर करना चाहती थी लेकिन स्थानीय प्रशासन की समझ से कोतवाल डीडी सिंह राठौर और उनके पुत्र को गिरफ्तार कर भीड़ के प्रकोप से बचा लिया गया।

जिले भर में जलीं थीं कई बसें- 

इस घटना के बाद जिले भर में आग सी लग गई और जगह जगह धरना-प्रदर्शन आगजनी आदि की घटनाओं से पूरा जिला कई दिनों तक सहमा रहा था। बाद में जनमानस के आक्रोश को देखते हुए दोनों को उरई जेल से हमीरपुर जेल शिफ्ट कर दिया गया।

इसके बाद पिता और पुत्र को समय और काल चक्र ने उनके कुकर्मों की सजा दी। बेटे की एक्सीडेंट में तो कोतवाल की जेल में ही मौत हो गई।

गुस्से को सकारात्मक रूप दिया विजय सिंह एडवोकेट ने- 

जनमानस की भावनाओं और गुस्से को सकारात्मक रूप देते हुए कर्मयोगी विजय सिंह निरंजन एडवोकेट ने महेन्द्र सिंह, सुरेन्द्र सिंह के गांव तीतरा खलीलपुर को अपने कर्मयोगी की तपोस्थली बना लिया। इसके बाद दानदाताओं के सहयोग से शहीद महेन्द्र सिंह, सुरेन्द्र सिंह, दयाशंकर मेमोरियल (एमएसडी) महाविद्यालय इसी स्थान पर शुरू किया गया।

विजय सिंह निरंजन के कर्मयोग का फल ही है कि जिले के निजी महाविद्यालयों में एमएसडी महाविद्यालय सबसे बड़े भवन के साथ शानदार तरीके से संचालित है अब इसकी तीन शाखाएं ललितपुर जिले के ग्रामीण और आदिवासी बहुल इलाकों में चल रही हैं।

एक महाविद्यालय पाली में छत्रपति शिवाजी एमएसडी महाविद्यालय, दूसरा जाखलौन में इन्दपाल सिंह एमएसडी महाविद्यालय, तीसरा मिर्चवारा में सरदार पटेल एमएसडी महाविद्यालय नाम से है।

चूंकि महेन्द्र सिंह निरंजन रोडवेज यूनियन के मंडलीय नेता थे इसलिए उनकी स्मृति में उरई डिपो में साथियों ने एक प्रतिमा लगवाई और 2005 से हर साल 1 फरवरी को उनका निर्वाण दिवस परिवहन विकास दिवस के रूप में मनाया जाने लगा।

आज कोतवाली कांड की चौदहवीं बरसी पर तीनों शहीदों के नाम पर संचालित महेन्द्र सिंह, सुरेन्द्र सिंह, दयाशंकर मेमोरियल महाविद्यालय तीतरा खलीलपुर में भी उन्हें याद करने के लिये कार्यक्रम होंगे।

कार्यक्रमों के माध्यम से उनके साहस और अन्याय के खिलाफ उनके संघर्षों को याद कर नई पीढ़ी को जुल्म और ज्यादती के खिलाफ आबाज बुलंद करने की नसीहत देते हैं।

( उरई के युवा पत्रकार शैलेन्द्र पटेल के सहयोग के साथ नीरज भाई पटेल द्वारा लिखित) 

आरक्षण पर सुनियोजित हमले के खिलाफ प्रदेश भर के बुद्धिजीवियों को एकजुट कर रहा है ‘जनाधार संगठन’

लखनऊ: कांग्रेस का पिछड़ा वर्ग सम्मेलन 4 फरवरी को, राहुल सचान को मिली समन्वय की जिम्मेदारी

जीजाबाई जयंती पर बुंदेलखंड की महिलाओं ने घूंघट से बाहर निकलकर अपने हक की आवाज बुलंद की

PMO को बताना होगा कि प्रधानमंत्री के साथ विदेशी दौरों पर प्राइवेट कंपनियों से कौन-कौन जाता है ?

उत्तर प्रदेश सरकार ने किया अधीनस्थ सेवा आयोग का गठन, पूर्व IAS अरुण कुमार सिन्हा बने सदस्य</

Related posts

Share
Share