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ओवैशी ने ‘किसी के बाप का नहीं है हिंदुस्तान क्या कह दिया’, ब्राह्मणवादी मीडिया विधवा विलाप करने लगा

नई दिल्ली। नेशनल जनमत ब्यूरो।

गौरक्षकों द्वारा सारे देश में बेगुनाह मुसलमानों की हत्या के विरोध में अकबरुद्दीन ओवैशी ने हैदराबाद में आयोजित एक रैली में इतना भर क्या कह दिया कि ‘ ये देश किसी के बाप का नहीं हैं। ये देश जितना माथे पर तिलक लगाने वाले किसी हिंदू का है उतना ही टोपी पहनने वाले और दाढ़ी रखने वाले किसी मुसलमान का है’। अकबरूद्दीन ओवैशी की भाषा पर हालांकि सवाल किेए जा सकते हैं पर उनके द्वारा की गई बातों पर किसी को कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए।

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सामाजिक चिंतक मोहम्मद जाहिद ने इस पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि ओवैशी के भाषण का भगवा ताकतें फायदा उठाकर अपनी ताकत और बढ़ा सकती हैं।

मोहम्मद जाहिद अपनी फेसबुक वॉल पर लिखते हैं कि…

कल से गोदी मीडिया अपने काम पर लग गया , केंद्रीय सरकार की विफलता पर चर्चा ना हो इसके लिए वह हर ऐसे मुद्दे को दिन भर चलाएगा , पैनल डिस्कशन कराएगा और प्रचारित करेगा कि देश का ध्यान भाजपा सरकारों की विफलता पर जाए ही ना और देश फालतू के गैरजरूरी मुद्दे में उलझ कर रह जाए। और दरअसल उसको कुछ बेवकूफ लोग ऐसा करने का मौका भी देते हैं।

मीडिया को अब यही मौका तेलंगाना के विधायक अकबरुद्दीन ओवैसी ने दिया है , इसके पहले आज़म खान भी मीडिया को ऐसा ही मौका दे चुके हैं।
समझना होगा कि हम मुसलमान भाजपा के लाभ के टूल ना बनें और यह भी समझना होगा कि एक मामुली सी क्षेत्रिय पार्टी का एक विधायक यदि मुसलमान है तो उसके एक बयान का इस्तेमाल मीडिया कैसे भाजपा की विफलताओं पर पर्दा डालने के लिए कर सकती है।

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इस समय कम से कम देश के मुसलामानों और मुस्लिम नेताओं को मोदी पर नाम लेकर कुछ भी अमर्यादित टिप्पणी करने से बचना चाहिए।
वैसे मैं अकबरुद्दीन ओवैसी और उनके भड़काऊ भाषणों और पूरी मीम पार्टी की राजनीति का प्रबल और घनघोर विरोधी रहा हूँ परन्तु कल उन्होंने जो कहा उससे बिलकुल सहमत हूँ।

सुन ले संघ , विश्व हिन्दू परिषद और मोदी यह हिन्दुस्तान तेरे बाप का नहीं है हम सबका है :- अकबरुद्दीन ओवैसी

देखा जाए तो यह बयान देशप्रेम का संदेश ही देता है और ट्विटर पर हिन्दुस्तान से अलग “द्रविनाडू” नामक अलग देश की माँग करने के लिए ट्रेन्ड कराए हैसटैग की अपेक्षा अपने हिन्दुस्तान पर प्यार और अपनापन का संदेश ही देता है , हाँ “सुन ले” की जगह “सुन लीजिये” कहा गया होता तो अधिक उचित होता , “तेरे” की जगह “आप” कहा जाता तो सुखद लगता , दरअसल आंध्रप्रदेश , तमिलनाडु , कर्नाटक , केरल और तेलंगाना जैसे दक्षिणी राज्यों में हिन्दी भाषा में ऐसी त्रुटियाँ होती रहती हैं , इसे प्रधानमंत्री के लिए अपशब्द नहीं कहा जा सकता।

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि देश में हर जगह मुसलमान गाय के नाम पर मारे जा रहे हैं , अब तक 28 का आँकड़ा पार कर चुका है , मुस्लिम बेहद गुस्से में हैं और इस गुस्से को दिखाने की जगह गोदी मीडिया “तेरे” को पकड़ कर दिन भर प्रधानमंत्री पर अभद्र भाषा का जो आरोप लगा रही है वह अकबरुद्दीन ओवैसी के इस भाषण से अधिक निन्दनीय है।

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सच तो यह है कि यह संगठन और प्रधानमंत्री पिछले 38 महीने से हो रही मुसलमानों मुसलमानों की हत्याओं पर जैसे मूक समर्थन दे रहे हैं उससे यह “आप” कह कर संबोधित करने के हकदार भी नहीं परन्तु एक तो हमें अपनी तहज्रीब और दूसरे देश के प्रधानमंत्री के पद की गरिमा का ध्यान रखना चाहिए। बेहतर है खामोश ही रहें। महत्वपूर्ण बात यह है कि संसद को उन्होंने मुसलमानों के विरुद्ध साजिश करने का अड्डा बताया , कुछ सच नहीं कहे जाने चाहिए , दुनिया खुद देखती है और महसूस करती है।

बाकी उन्होंने मुसलमानों के इत्तेहाद की बात की , तो ज़रूरी है उनको खुद देखना चाहिए अपनी पार्टी के इत्तेहाद की कोशिशों पर अब तक के पलीता लगाने के इतिहास पर। अभी 2 जुलाई को जन्तर मंतर पर उनका ताजा उदाहरण सबके सामने है। सैद्धांतिक रूप से उनकी कट्टर राजनीति का प्रबल विरोधी होने के बावजूद मैं अकबरुद्दीन ओवैसी के कल के उस भाषण में कुछ ऐसा नहीं देखता जिसे मीडिया अपने आकाओं को बचाने के लिए उछाल रही है।

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अगले 18 महीने बाद लोकसभा चुनाव 2019 की रणभेदी बजने वाली है , मैं समझता हूँ कि कम से कम ओवैसी बंधुओं , आज़मखान जैसे लोगों को कटुसत्य जैसे बयानों से बचना चाहिए जिससे भाजपा को यूरिया और पोटास ना मिल सके। सोचना चाहिए कि भाजपा को मुसलमान विरोध जिताएगा और हिन्दू विरोध हराएगा।

बाकी जो अकबरुद्दीन ओवैसी ने कहा है वह तो मशहूर शायर राहत इंदौरी का सबसे मकबूल शेर है।

अगर ख़िलाफ़ हैं होने दो जान थोड़ी है।
ये सब धुआँ है कोई आसमान थोड़ी है।।
लगेगी आग तो आएँगे घर कई ज़द में।
यहाँ पे सिर्फ़ हमारा मकान थोड़ी है।।
मैं जानता हूँ के दुश्मन भी कम नहीं लेकिन।
हमारी तरहा हथेली पे जान थोड़ी है।।
हमारे मुँह से जो निकले वही सदाक़त है।
हमारे मुँह में तुम्हारी ज़ुबान थोड़ी है।।
जो आज साहिबे मसनद हैं कल नहीं होंगे।
किराएदार हैं ज़ाती मकान थोड़ी है।।
सभी का ख़ून है शामिल यहाँ की मिट्टी में।
किसी के बाप का हिन्दोस्तान थोड़ी है।।

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मुसलमानों को अगले 18 महीने संयम और समझदारी से काम लेना चाहिए , हमारे हिन्दू भाई ही इनका काम तमाम खुद कर देंगे।

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