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तीसरी बार विधायक बने राहुल के करीबी पाटीदार नेता परेश धनानी, विपक्ष के नेता के प्रबल दावेदार

नई दिल्ली, नेशनल जनमत ब्यूरो। 

अमरेली विधानसभा सीट दो कारण से चर्चाओं के केन्द्र में थी। एक तो अमरेली क्षेत्र पाटीदार आंदोलन के प्रमुख केंद्र बिंदुओं में से एक है. दूसरा कांग्रेस ने यहां से फायरब्रांड युवा पाटीदार नेता और माजूदा विधायक परेशभाई धनानी को प्रत्याशी बनाया था।

अमरेली पाटीदारों का गढ़ है, इस सीट पर बीजेपी से बवकुभाई उधाड और कांग्रेस पार्टी के परेश धनानी मैदान में थे। बीजेपी नेे इस सीट पर पूरी ताकत झोंक रखी थी। आखिरकार इस बहुचर्चित सीट अमरेली से युवा नेता परेश धनानी ने अपने निकटतम प्रतिद्वंदी बीजेपी के बवकुभाई उधाड को 12 हजार 23 मतों से शिकस्त दी.

2012 के विधानसभा चुनावों में कांग्रेस पार्टी के परेश धनानी ने भाजपा के दिलीप संघानी को हराकर सीट इस सीट पर कब्जा किया था. परेश धनानी युवा हैं और राहुल गांधी से निकटता और अपनी मेहनत की बदौलत परेश बिहार जैसे राज्य के प्रभारी समेत झारखंड में नोटबंदी अभियान का सच लोगों तक पहुंचाने के लिए पर्यवेक्षक भी बनाए गए थे।

विपक्ष के नेता बनाए जा सकते हैं- 

कांग्रेस के करीबी सूत्र बताते हैं कि वर्तमान में कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव धनानी का पार्टी के भीतर कद बढ़ना तय है। परेश धनानी को विपक्ष का नेता बनाया जा सकता है।

परेश धनानी युवा होने के साथ ही पटेल समाज की समस्याओं पर दिल खोलकर बोलते हैं। लो प्रोफाइल रहने वाले परेश भाई अपने काम से कांग्रेस में एक अलग ही पहचान बना चुके हैं।

प्रचंड बीजेपी लहर में भी कांग्रेस से जीते थे धनानी- 

अमरेली विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र गुजरात विधानसभा में सीट नंबर 95 है. 1985, 1990 और 2007 में अमरेली सीट से दिलीप संघानी जीतते आ रहे थे. वहीं 1995 और 1998 में गुजरात बीजेपी के अध्यक्ष रहे पुरुषोत्तम रुपाला ने ये सीट जीती थी.

परेश धनानी ने 2002 में बीजेपी की प्रचंड लहर के बाद भी ये सीट कांग्रेस के लिए जीत ली थी, लेकिन 2007 में वो संघानी से 4000 वोटों से हार गए थे. 2012 में उन्होंने फिर से बीजेपी के बहुमत के बाद भी ये सीट जीत ली.

संकट मोचक माने जाते हैं धनानी- 

पटेल नेता परेश धनानी को पार्टी में संकटमोचक माना जाता है. किसान परिवार से आने वाले परेश धनानी को राजनीति में लाने का श्रेय पूर्व केंद्रीय मंत्री मनुभाई कोटाडिया को दिया जाता है. अमरेली विधानसभा से साल 2002 में तत्कालीन कृषि मंत्री पुरषोत्तम रुपाला को हराकर उन्होंने प्रदेश की राजनीति में सबका ध्यान अपनी ओर खींच लिया था.

उस समय वो अमरेली जिले के युवा कांग्रेस के अध्यक्ष थे. धनानी गुजरात कांग्रेस के महासचिव रह चुके हैं. अभी वो अखिल भारतीय कांग्रेस में सचिव हैं. पाटीदार समाज से आने वाले धनानी राहुल गांधी के रोडशो में अहम भूमिका निभाते हैं. गुजरात राज्य सभा चुनाव के दौरान भी उन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी.

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