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साझा विरासत में शामिल हुए 17 दलों के नेता बोले, जनता साथ आ गई तो कोई हिटलर नहीं जीत सकता

नई दिल्ली। नेशनल जनमत ब्यूरो 

जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) के पूर्व अध्यक्ष व राज्यसभा सांसद शरद यादव के ‘साझा विरासत बचाओ सम्मेलन’ में 17 विपक्षी दलों के नेता एकजुट हुए। इस दौरान देश की साझा विरासत बचाने को लेकर देश की जनता से एकजुट होने की अपील की गई।

इस दौरान शरद यादव  ने इशारों-इशारों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को हिटलर करार दिया। उन्होंने कहा हिंदुस्तान और विश्व की जनता एक साथ खड़ी हो जाती है तो कोई हिटलर भी नहीं जीत सकता।

राज्यसभा में जेडीयू के पार्टी संसदीय दल के नेता पद से हटाए गए शरद यादव के नेतृत्व में गुरुवार को दिल्ली के कॉन्स्टीट्यूशन क्लब में ‘साझा विरासत बचाओ सम्मेलन’ में कई विपक्षी दलों के नेता एकत्रित हुए।

कई बड़े नेता शामिल- 

पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी, राज्यसभा में विपक्ष के नेता गुलाम नबी आजाद, समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय महासचिव रामगोपाल यादव, सीपीआईएम के राष्ट्रीय महासचिव सीताराम येचुरी, सीपीएम डी राजा, नेशनल कांफ्रेंस के नेता फारूख अब्दुल्लाह और एनसीपी नेता तारिक अनवर सहित कई विपक्षी नेता शरद यादव की साझी विरासत कार्यक्रम में शामिल हुए।

शरद यादव ने कहा, ‘बहुत बंटवारे हुए लेकिन ऐसा बंटवारा मैंने जीवन में नहीं देखा| साझा विरासत संविधान की आत्मा है| ऐसी बैठक का आयोजन अब देशभर में किया जाएगा। किसान और दलितों पर अत्याचार किया जा रहा है| किसान आत्महत्या कर रहे हैं।‘

इस मौके पर शरद यादव ने कहा, ‘लोगों को लग रहा था कि मैं खिसक न जाऊं, मंत्री न बन जाऊं। लेकिन में मैंने आपके साथ रहने का फैसला किया| उन्होंने अपनी बात रखते हुए कहा कि जब हिंदुस्तान और विश्व की जनता एक साथ खड़ी हो जाती है तो कोई हिटलर भी नहीं जीत सकता।‘

साझी विरासत बचाओ सम्मेलन को सम्बोधित करते हुए शरद यादव कहा कि कुछ लोग सामाजिक सौहार्द के माहौल को बिगाड़ने का प्रयास कर रहे हैं| इसका सामाजिक समरसता चाहने वाले लोगों को अहिंसक तरीके से जवाब देना चाहिये। अहिंसा बहादुरों का हथियार है और विरोध के लिए इसका ही उपयोग किया जाना चाहिये।

उन्होंने कहा कि संविधान में साझी विरासत की बात कही गई है और संविधान गीता, कुरान और बाइबिल जैसे धार्मिक ग्रंथों के समान है। यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि आस्था के नाम पर हिंसा बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

यह अच्छी बात है लेकिन वह जो कहते हैं, वह जमीन पर नहीं दिखता है। जहां उनकी पार्टी भाजपा की सरकारें हैं, उन्हें भी यह संदेश दिया जाना चाहिए।

 

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