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योगी सरकार का अड़ियल रुख, पशु चिकित्सकों का रोका वेतन, पदाधिकारी बोले झुकेंगे नहीं, इस्तीफा देंगे

नई दिल्ली/लखनऊ, नेशनल जनमत ब्यूरो।  

इस बात में अब कोई दोराय नहीं कि राजनीतिक दल कोई भी हो बड़े-बड़े वायदे करके सत्ता में आते हैं लेकिन सरकार बनते ही उनका रंग ऐसे बदलता है कि अच्छे से अच्छा गिरगिट भी शर्म से मर जाए। मौजूदा बीजेपी सरकार भी इससे अछूती नहीं है। इस समय योगी सरकार पुलिस का इस्तेमाल कानून व्यवस्था को नियंत्रित करने के बजाए आंदोलन और हड़ताल कर रहे कर्मचारियों पर लाठीचार्ज करवाने और धमकी दिलवाने में कर रही है।

उत्तर प्रदेश के सभी पशु चिकित्सक हड़ताल पर हैं, लेकिन योगी सरकार बातचीत से रास्ता निकालने के बजाए पशु चिकित्सकों को काम पर लौटने की धमकी दे रही है। इधर योगी आदित्यनाथ की सरकार अपने रुख पर कायम है उधर पशु चिकित्सक भी झुकने को तैयार नहीं है। फिलहाल सरकार ने पूरे प्रदेश के 2600 के करीब पशु चिकित्सकों का वेतन रोक दिया है।

200 करोड़ का उत्पादन प्रतिदिन प्रभावित- 

उत्तर प्रदेश में पशु चिकित्सकों की राज्य व्यापी हड़ताल 15 सितंबर से जारी है, सरकार के रुख के चलते 25 सितंबर से सम्पूर्ण कार्य बहिष्कार कर दिया गया है। एक मोटे अनुमान के अनुसार पशु चिकित्सकों की हड़ताल से राज्य में 200 करोड़ रूपए प्रति दिन का उत्पादन प्रभावित हो रहा है। हड़ताल का सीधा असर राज्य की मीट इंडस्ट्री पर पड़ रहा है, यहां उत्पादन में 90% तक कमी की बात सामने आ रही है

पशुओं के टीकाकरण का काम ठप्प- 

16 सितंबर से राज्य के पशु चिकित्सालयों में पशु चिकित्सा का काम पूरी तरह ठप्प है। हड़ताल के चलते राज्य में 16 तारीख से प्रस्तावित FMD CP टीकाकरण का काम भी अभी तक शुरू नहीं हो सका है। प्रशासन से वार्ता विफल होने के बाद पशु चिकित्सकों ने अपना आंदोलन और तेज कर दिया है। पशु चिकित्सकों ने चेतावनी दी है की यदि 3 अक्टूबर तक उनकी NPA और डायनामिक ACP की मांग नहीं मानी जाती तो वे सामूहिक इस्तीफा देने के लिए तैयार हैं।

क्या है एनपीए- ( नॉन प्रेक्टिस एलाउंस) 

पशु चिकित्सकों की मांग है कि जिस तरह से प्रेक्टिस ना करने पर चिकित्साधिकारियों को भत्ता मिलता है उसी तरह पशु चिकित्साधिकारियों को भी प्रेक्टिस ना करने पर भत्ते का प्रावधान किया जाए।

जमीन पर दिख रहा है हड़ताल का असर- 

अब उत्तर प्रदेश में पशु चिकित्सकों की हड़ताल का व्यापक असर जमीन पर साफ नजर आने लगा है। पशु चिकित्सकों की इस हड़ताल से राज्य में दूध, अंडे और मांस का उत्पादन बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। राज्य भर में जहां एक ओर पशु चिकित्सा कार्य ठप्प होने से प्रदेश के किसानों को भारी परेशानी तथा आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ रहा है, तो दूसरी ओर राज्य के 90% स्लॉटर हाउस में उत्पादन बंद होने की कगार पर हैं।

किसानों पर भी है हड़ताल का असर- 

पशु चिकित्सकों की हड़ताल का सबसे ज्यादा नुकसान राज्य के गरीब किसानों को हो रहा है। किसान अपने पशुओं के इलाज के लिए झोला छाप डाक्टरों की शरण में जाने को मजबूर हैं। झोला छाप डाक्टर भी किसानों की मजबूरी का फायदा उठा कर उनसे मन माना पैसा वसूल रहे हैं।

उत्तर प्रदेश पशु चिकित्सा संघ के महामंत्री डॉ. अनिल कुमार सिंह ने ‘नेशनल जनमत’ से बातचीत में बताया कि प्रमुख सचिव, पशु पालन विभाग से वार्ता हुई थी, जो असफल रही। प्रमुख सचिव का कहना है की पशु चिकित्सक पहले हड़ताल खत्म कर अपने काम पर लौटें उसके बाद ही उनकी मांगों पर विचार किया जायेगा। डॉ. अनिल कुमार सिंह का कहना है कि, सरकार हमें धमकाकर, हमारा वेतन रोककर आंदोलन को खत्म करना चाहती है। लेकिन हमारी मांगे जायज है इसे हम हर हाल में लेकर रहेंगे।

पदाधिकारियों का स्पष्ट कहना है कि सरकार अगर हमापी मांगे नहीं मानती तो पूरे प्रदेश के पशु चिकित्सक सामूहिक रूप से इस्तीफा सीएम योगी आदित्यनाथ को सौंप देंगे।

सरकार को पूरा समय दिया- 

उत्तर प्रदेश पशु चिकित्सा संघ के अध्यक्ष डॉ. सुधीर कुमार ने बताया कि 15 सितम्बर से 25 सितम्बर तक हमने FMD CP का बहिष्कार कर आंशिक काम बंद किया था। आंशिक कार्य बहिष्कार के बाद भी सरकार ने हमारी जायज मांगे नहीं मानी तब विवश होकर हमें कार्य का पूर्ण बहिष्कार कर हड़ताल का रास्ता अपनाना पड़ा।

फतेहपुर जिले के अध्यक्ष वीपी सचान का कहना है कि सरकार जब तक हमारी NPA और डयनामिक ACP की मांग नहीं मानती तब तक आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि यदि सरकार बलपूर्वक आंदोलन को दबाने का प्रयास करेगी तो सभी डॉक्टर्स सामूहिक इस्तीफा देने के लिए तैयार हैं।

राज्य की अर्थव्यवस्था में पशु चिकित्सकों के योगदान को देखते हुए सरकार को पशु चिकित्सकों की जायज मांगों पर तत्काल गंभीरता पूर्वक विचार करना चाहिए। पशु चिकित्सक प्रधानमंत्री मोदी के 2022 तक किसान की आय को दुगना करने के सपने को पूरा करने में उत्प्ररेक की भूमिका निभा सकते हैं।

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