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पशु बैन से बढ़े अावारा जानवर, पशुपालक जातियों और किसानों के लिए खतरे की घंटी

नई दिल्ली। नेशनल जनमत

पशु बाजारों में वध के लिए पशुओं की खरीद-फरोख्त पर लगे बैन ने चौतरफा असर दिखाना शुरू कर दिया. इसने चमड़ा, मांस और दूध कारोबार, तीनों को तो अपनी चपेट में लिया ही है. लेकिन इसका सबसे ज्यादा असर गांव में रह रहे पशुपालकों और किसानों पर पड़ रहा है. पशुबैन से आवारा जानवरों की बढ़ती संख्या से फसलों का नुकसान किसानों के लिए आत्महत्या करने का कारण बन रहा है.

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गौगुंडों के प्रकोप से पशुपालक परेशान-

बाजार से मवेशियों को लाने के खतरे ने देश के सबसे बड़े दूध बाजार कोलकाता में दूध सप्लाई घटा दी है. कारोबारियों का कहना है कि वे यूपी के पशु हाटों से मवेशी लाते हैं. लेकिन गौरक्षक और पुलिस यह नहीं देखती कि ये मीट के लिए लाए जा रहे हैं या दूध के लिए. पहले यहां डेढ़ लाख लीटर दूध लाया, ले जाया जाता था. लेकिन सप्लाई घट कर आधी रह गई है. दूध के के दाम 50-55 रुपये प्रति लीटर से बढ़ कर 70 रुपये तक पहुंच गए हैं.

दूध का संकट-

पशु बैन से पूरे देश में दूध का भारी संकट पैदा हो सकता है. और इससे जुड़े कारोबारों की रफ्तार अगर ठप नहीं तो बेहद सुस्त हो गई है.

1991 से ही कानपुर देहात में दूध का कारोबार कर रहे डेयरी फार्म के मालिक राजेश पटेल कहते हैं कि पहले मेरे फार्म से 2000 लीटर दूध आता था लेकिन अब यह घट कर 1000 लीटर रह गया है. मुझे अपने यहां काम करने वालों को तनख्वाह देनी पड़ती है. अगर यही हालात रहे तो कब तक तनख्वाह देंगे.

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दरअसल, दूध कारोबार का एक चक्र होता है। जब मवेशी कम दूध देने लगते हैं या बंद कर देते हैं तो किसान उन्हें बेच कर दूध देने वाला नया मवेशी खरीद लेते हैं। इससे उनकी आय का स्त्रोत बना रहता है। लेकिन अब मवेशी न बेच पाने की स्थिति में उनकी रोजी-रोटी पर संकट आ खड़ा हुआ है।

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बुंदेलखंड के गांवों में बढ़ रहे आवारा जानवर-

पशु वध की खरीद-फरोख्त बैन होने से बुंदेलखंड के किसान बदहाली में हैं. हर गांव में अन्ना जानवरों की संख्या बढ़ रही है. अब किसानों के साथ दो ही विकल्प हैं या तो जानवरों को अन्ना छोड़े. इससे उनके खेत की फसल बर्बाद होगी. दूसरा विकल्प जानवरों को घर पर बांध कर खिलाएं इससे किसानों को आर्थिक नुकसान होगा.

ऐसे में सरकार के थोपे हुए फैसले से किसानों और पशुपालकों में सबसे ज्यादा निराशा है.

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