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गोली खाई पटेलों-पाटीदारों ने और मीडिया चमका रहा है RSS वाले शर्मा जी का चेहरा

नई दिल्ली। नेशनल जनमत ब्यूरो।

किसान आंदोलन की जो चिंगारी महाराष्ट्र से फैली थी वो अब मध्यप्रदेश के कई जिलों में फैल चुकी है. इस आंदोलन में पुलिस की फायरिंग में मध्यप्रदेश के 6 किसानों की मौत हुई है. मरने वाले किसानों में पांच किसान पाटीदार पटेल समाज के हैं. पर मीडिया की धूर्तता देखिए, मीडिया बीजेपी के किसान मोर्चा के पूर्व अध्यक्ष शिवकुमार शर्मा को किसान नेता के तौर पर देश भर के सामने दिखा रही है.

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राष्ट्रीय मीडिया बीजेपी नेता शर्माजी को किसान नेता के तौर पर स्थापित करने में जुटा

दिल्ली स्थित सारा राष्ट्रीय मीडिया आरएसएस के किसान संगठन भारतीय किसान संघ के पूर्व अध्यक्ष रहे शिवकुमार शर्मा को किसान नेता के तौर पर स्थापित करने में जुट गया है ताकि असली किसान नेताओं की मांगों और मुद्दों को भूलकर किसान भाजपा के किसान नेता के झूठे झांसे में आ जाऐं.

शर्मा जी को किसान नेता के तौर पर स्थापित करने पर सोशल मीडिया पर फूटा लोगों का गुस्सा

मीडिया द्वारा शर्माजी को किसान नेता के तौर पर स्थापित करने पर सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रिया आ रही है. सोशल मीडिया पर एक्टिव ज्यादातर लोगों का ये कहना है कि जब शर्मा का खेती किसानी से कोई लेना देना नहीं है तो वो किसान नेता कैसे हो सकता है. इसके अलावा मीडिया को पुलिस गोलीवारी में मरने वाले पटेल पाटीदारों में से कोई किसान नेता क्यों नहीं दिखाई देता.

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जानिए वरिष्ठ पत्रकार और सामाजिक चिंतक महेन्द्र यादव क्या कहते हैं…

वरिष्ठ पत्रकार और सामाजिक चिंतक महेन्द्र यादव मीडिया द्वारा शिवकुमार शर्मा को किसान नेता के तौर पर परोसने पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए लिखते हैं कि ‘ 1 जून से शुरू हुए किसान आंदोलन में 7 दिन तक शिवकुमार शर्मा का नाम कहीं नहीं दिखा. मामला तूल पकड़ गया, 9 किसानों के मरने की पुष्टि हो गई तो भाजपा-संघ ने अपने पुराने संघी और कथित किसान नेता शिवकुमार शर्मा को झाड़-पोंछकर पूरे आंदोलन का अगुवा बनाकर पेश कर दिया. अखबारों और न्यू़ज़पोर्टलों पर शिवकुमार शर्मा किसानों के नायक बनाकर पेश किए जा रहे हैं.

जनसत्ता, एबीपी न्यूज़, बीबीसी, और तमाम बडे़ मीडिया में एक साथ एक ही दिन शिवकुमार शर्मा छा गए हैं.
शिवकुमार शर्मा को इसलिए चढ़ाया जा रहा है कि किसानों का आक्रोश किसी गैर भाजपा दल का समर्थन न कर दे, बाकी शर्मा को तो पुराने संबंधों का वास्ता देकर कभी भी साथ में ले लिया जाएगा.

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म.प्र. सरकार में विधि सलाहकार रहे हैं शर्मा – 

शर्मा जी म.प्र. सरकार में विधि सलाहकार रहे हैं. पत्नी मंजुला शर्मा सरकारी कॉलेज की प्रिंसिपल हैं. दो बेटियों में से एक निहारिका स्पोर्ट्स टीचर है, और दूसरी अवंतिका दिल्ली में इंजीनियर है. खेती और किसानों से शर्मा के परिवार का कोई लेना-देना नहीं रहा है, जैसे कि अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के शीर्ष नेताओं में से कोई भी विद्यार्थी नहीं होता.

शिवकुमार शर्मा संघ के भारतीय किसान संघ के म.प्र. में अध्यक्ष रहे. किसान संघ आरएसएस के निर्देश पर अन्य अनुषंगी संगठनों की तरह कभी-कभी भाजपा सरकारों के खिलाफ प्रदर्शन करता रहता है और उन सरकारों के लिए सेफ्टी-वॉल्व का काम करता है.

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इसी क्रम में मई 2012 में भी म.प्र. के बरेली शहर में किसान आंदोलन शर्मा ने कराया था लेकिन उस पर नियंत्रण नहीं रख पाए. आंदोलन भड़क गया तो पुलिस ने फायरिंग की थी और कुछ किसानों की मौत हुई थी. उस समय शिवराज का जलवा था तो उनकी जिद पर शर्मा को संघ से निकाल दिया गया था. जेल भी गए थे.

अब भाजपा को शिवकुमार शर्मा की फिर से ज़रूरत पड़ गई है. किसान नेता के रूप में अपना ही आदमी प्रोजेक्ट हो इससे बढ़िया क्या हो सकता है.
कौन है किसानों के आंदोलन का रणनीतिकार..ये प्रश्न अभी बना ही हुआ है.

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