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पत्रकार गौरी लंकेश को दफनाने के बाद, पगलाए जाति गिरोह उनका धर्म सूंघने की कोशिश कर रहे हैं

नई दिल्ली। नेशनल जनमत ब्यूरो 

कन्नड़ लेखिका, वरिष्ठ पत्रकार और सामाजिक कार्यकर्ता गौरी लंकेश सिर्फ एक पेशेवर पत्रकार हीं नहीं बल्कि देश में बनाए जा रहे छद्म माहौल के प्रति मुखर रहने वाली विचारक भी थीं। इसलिए उनकी हत्या के विरोध में देश भर में हजारों लोगों प्रदर्शन कर रहे हैं। बेंगलुरू से लेकर दिल्ली तक हत्या के विरोध में जबरदस्त प्रदर्शन किए जा रहे हैं।

वहीं दूसरी तरफ संघी मानसिकता के लोग सोशल मीडिया पर अपनी मानसिक गंदगी निकालकर अपने दक्षिणपंथी संस्कार प्रदर्शित कर रहे हैं। इसी बीच टीवी पर दृश्य आया कि गौरी लंकेश को दफनाया गया है। बस फिर क्या था जातिवादी गिरोहों ने गौरी लंकेश के धर्म को लेकर तरह-तरह की टिप्पणी करना शुरू कर दिया।

वरिष्ठ पत्रकार दिलीप मंडल इसको पागलपन करार देते हुए लिखते हैं कि-

मूर्खता का अतिवाद देखना है तो उत्तर भारतीय ब्राह्मण पुरुषों को देखिए।

कल जब से उन्होंने गौरी लंकेश को दफ़नाने का दृश्य टीवी पर देख लिया है, पगला गए हैं। सूँघने की कोशिश कर रहे हैं कि गौरी लंकेश का धर्म क्या है?

हे मूर्खों, गौरी लंकेश लिंगायत हैं। लिंगायत धर्म में मृतकों को दफ़नाते हैं। वे इसे मनुष्य का प्रकृति के साथ एकाकार हो जाना मानते हैं।
कर्नाटक और उससे सटे महाराष्ट्र के इलाक़ों का बच्चा भी लिंगायतों का यह विधान यह जानता है।

भारत की जनगणना में लिंगायत को हिंदू धर्म की एक जाति के तौर पर गिना जाता है। लिंगायत चाहते हैं कि उनका धर्म अलग से गिना जाए। गौरी लंकेश ने भी इसके समर्थन में लेख लिखा है। कलबुर्गी भी लिंगायत थे। मारे गए।

12वीं सदी में ब्राह्मण धर्म वालों ने लाखों की संख्या में लिंगायतों को मारा। दरअसल, लिंगायत धर्म के संस्थापक वसवन्ना ने एक ब्राह्मण लड़की की चमड़े का काम करने वाले लड़के से शादी करा दी थी। उसके बाद हिंसा भड़क उठी।

लिंगायत ब्राह्मण को नहीं मानते। उनसे पूजा नहीं कराते। उनके मंदिर नहीं हैं। वे जाति नहीं मानते। हालाँकि उनमें भी ब्राह्मणवाद का प्रदूषण आया है।

वे एकेश्वरवादी हैं। गिरीश कर्नाड का नाटक रक्त कल्याण लिंगायतों की हत्या के बारे में ही है।

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