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सामाजिक चिंतक PCS डॉ. राकेश पटेल ने लघु कथा संग्रह ‘डॉड़ का इनार’ में कई अहम पहलुओं को छुआ है

लखनऊ, नेशनल जनमत ब्यूरो। 

जीवन की आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए भले ही आप कोई भी सम्मानित प्रोफेशन चुन लें, लेकिन आप समाज के दुख, दर्द, तकलीफ को अपने नजरिए से देखने-समझने के आदी हैं तो आपके अंदर का लेखक,कवि, पत्रकार, साहित्यकार या अन्य किसी भी विधा का कलाकार कचोटते मन की तकलीफों को समाज के सामने लेकर आ ही जाएगा।

उत्तर प्रदेश सरकार के पीसीएस अधिकारी डॉ. राकेश पटेल (राकेश कबीर) ऐसे ही लोगों में से एक हैं। राकेश कबीर के नाम से अपने मन का लेखर बाहर निकालने वाले राकेश पटेल सामाजिक न्याय की विचारधारा के लेखक व रचनाकार हैं।

नौकरी की जिम्मेदारियों का उम्दा तरीके से निर्वहन करते हुए वक्त निकालकर अपने अंदर के लेखक और कवि मन को शब्दों में उकेरते रहते हैं। जिसके माध्यम से समाज की वास्तविक तकलीफों को लोगों के सामने ला खड़ा करते हैं।

विभिन्न समसामयिक विषयों पर लिखा उनका कविता संग्रह ‘नदियां बहती रहेंगी’ का विमोचन 17 दिसंबर को लखनऊ के कैफी आजमी सभागार में लेखकों, कवियों, पत्रकारों और तमाम बुद्धिजीवियों की मौजूदगी में हुआ था अब उनका लघु कथा संग्रह ‘डांड़ का इनार’ ऑनलाइन उपलब्ध है। notnul.com पर जाकर 17 कहानियों के इस संग्रह को आप आसानी से डाउनलोड करके पढ़ सकते हैं।

क्या है खास- 

‘नेशनल जनमत’ से बात करते हुए युवा लेखक राकेश पटेल ने बताया कि उन्होंने अपने जीवन के वास्तविक अनुभवों को इस कथा संग्रह में कलमबद्ध करने का प्रयास किया है। जिसमें जातिगत सिस्टम से लेकर समाज के अन्य भेदभाव को भी छुआ गया है।

इस लघु कथा संग्रह में 17 लघु कथाएं हैं।  इन कहानियों में शिक्षा के स्तर में हिंदी इंग्लिश का भेद, जाति आधारित शोषण,अवैध सम्बन्ध, हास परिहास, मोबाईल से जुड़े किस्से, भीख मांगकर भी सबसे ऊंचे पायदान पर बैठे साहूकार की कहानियां शामिल हैं।

इसके अलावा तमाम दैनिक जीवन की घटनाओं पर आधारित कहानियां जो अपने छोटे कलेवर में भी जीवन के एक हिस्से का फलसफा सा दे जाती हैं।

कौन हैं डॉ. राकेश कबीर- 

डॉ॰ राकेश कबीर (राकेश कुमार पटेल ) युवा कवि और कहानीकार हैं । उनकी कविताएँ , लेख और कहानियाँ हिन्दी और अंग्रेज़ी की अनेक पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित और चर्चित होती रही हैं। उनकी कविताओं में सामाजिक अन्याय, रूढ़िवाद और पाखंडों का जहां तीव्र विरोध मिलता है ,वहीं श्रमजीवी समाजों के संघर्षों के प्रति गहरा राग और विश्वास पाया जाता है।

उनका जन्म महाराजगंज जिले के लक्ष्मीपुर एकडंगा गाँव के एक संघर्षशील किसान के घर हुआ। गोरखपुर विश्वविद्यालय से समाजशास्त्र में स्नातकोत्तर उपाधि प्राप्त करने के बाद वे जवाहरलाल नेहरु विश्विद्यालय चले गए, जहाँ से उन्होंने ‘भारतीय सिनेमा में प्रवासी भारतीयों का चित्रण’ विषय पर एम. फिल और ‘ग्रामीण सामाजिक संरचना में निरंतरता एवं परिवर्तन’ विषय पर पीएचडी की उपाधि प्राप्त की।

सिनेमा, इतिहास, समाज और संस्कृति के विभिन्न आयामों पर गहरी दिलचस्पी रखनेवाले राकेश कबीर की प्रकाशित कृतियों में ‘नदियां बहती रहेंगी’ (कविता) और ‘खानाबदोश सफ़र’ (कहानी) हैं । वे उत्तर प्रदेश प्रशासनिक सेवा में हैं और फिलहाल सीतापुर के सिटी मजिस्ट्रेट हैं।

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