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OBC छात्र हितों के लिए संघर्ष करने वाले वाले दिलीप यादव की पीएचडी पर, JNU प्रशासन की रोक

नई दिल्ली। नेशनल जनमत ब्यूरो

जवाहर लाल नेहरु विश्वविद्यालय में पीएचडी समेत अन्य परीक्षाओं में इंटरव्यू में होने वाले भेदभाव को रोकने और जेएनयू में किसी भी ओबीसी प्रोफेसर की नियुक्ति ना होने की मांग को लेकर प्रदर्शन करने वाले सामाजिक न्याय के योद्धा दिलीप यादव को जेएनयू प्रशासन ने अब पीएचडी पूरी करने से रोक दिया है।

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इस बारे में दिलीप यादव लिखते हैं कि- 

जेएनयू प्रशासन ने मेरा रजिस्ट्रेशन रोक दिया, MA, M.PhilL की डिग्री देने से मना कर दिया और PhD में 9 B देने से भी मना कर दिया यानि मेरी PhD जमा नही करवाना चाहता. कारण बस ये है कि हम लोगो ने UGC गैजेट और इंटरव्यू में जातिगत भेदभाव का विरोध किया था, उसी प्रोटेस्ट के लिए प्रशासन द्वारा ऐसा किया जा रहा है.

जेएनयू प्रशासन अपनी ताकत के दम पर जेएनयू से बिना PhD जमा कराएं कैंपस से बाहर निकालना चाहता है. लेकिन संघ के इशारों पर काम करने वाले प्रशासन में बैठे लोग हम वो लोग नही जो आपसे डर जाए और अपनी लड़ाई डिग्री के डर से छोड़ दे. अब हम लड़ेगे और पूरी ताकत से लड़ेगे. जितना जुल्म करना है उतना जुल्म कर लो..
हमारी लड़ाई जारी रहेगी

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क्या था मामला- 

दरअसल 26 दिसंबर को जेएनयू में विद्वत परिषद की बैठक के दौरान 9 छात्रों ने हिस्सेदारी की मांग को लेकर प्रदर्शन किया था. छात्रों का आरोप था कि पीएचडी में जो वायवा होता है उसमें ओबीसी-एससी छात्रों के साथ भेदभाव होता है. इसलिए पीएचडी के लिए होने वाले वायवा के अंकों को कम करके उसे लिखित परीक्षा में जोड़ा जाए. इसके अलावा यूजीसी द्वारा पीएचडी के नियमों में बार-बार बदलाव करके ओबीसी-एससी के छात्रों की संख्या कम करने के  लिए की जा रहीं साजिशों का विरोध भी किया था।

ओबीसी का कोई प्रोफेसर नहीं जेएनयू में –

प्रदर्शन में शामिल छात्र मुलायम सिंह ने बताया कि अब्दुल नासे कमेटी की रिपोर्ट में इस बात को माना गया है कि ओबीसी-एससी के छात्रों के साथ वायवा में भेदभाव किया जाता है इसलिए 100 प्रतिशत वायवा को चयन का आधार नहीं बनाया जा सकता. मुलायम सिंह ने कहा कि इतने सालों से आरक्षण मिलने के बाद भी जेएनयू कैम्पस में ओबीसी का कोई भी प्रोफेसर क्यों नहीं है? छात्रों ने कहा कि प्रशासन भेदभाव के चलते ओबीसी-एससी के लोगों को ऊपर आने ही नहीं देता.

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निलंबित किए गए थे 9 छात्र-

प्रदर्शन करने वाले छात्रों के खिलाफ मीटिंग में जबरदस्ती घुसकर अनुशासनहीनता का आरोप लगाते हुए जेएनयू प्रशासन ने विश्वविद्यालय की शैक्षणिक गतिविधि और हॉस्टल से निलंबित कर दिया था. इसके बाद छात्रों द्वारा मांग करने पर कि जांच से पहले उन्हे कैसे दोषी ठहराया जा सकता है. छात्रों को अंतरिम रजिस्ट्रेशन की छूट दे दी गई थी.

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इसके बाद इन सभी नौ छात्रों को प्रशासन ने कमेटी की जांच रिपोर्ट भेजी थी. जांच में सभी को बताया गया था कि उनके ऊपर लगे अनुशासनहीनता के आरोप सही पाए गए हैं. इसलिए 8 जून तक आप सभी लोग अपने जवाब प्रॉक्टर ऑफिस में उपलब्ध करा दें.

ये 9 थे सामाजिक न्याय के सिपाही-

छात्र बिरसा, अंबेडकर, फुले स्टूडेंट एसोसिएशन (बाप्सा) और यूनाइडेट ओबीसी स्टूडेंट फोरम से जुडे हैं-

शकील अंजुम
मुलायम सिह यादव
दिलीप कुमार यादव
दिलीप कुमार
भूपाली विट्ठल
मृत्युंजय सिंह यादव
दावा शेरपा
एस राहुल
प्रशांत कुमार

इनमें से 4 छात्रों ने फाइन जमा करने से मना कर दिया था उन पर तलवार अभी भी लटक  रही है- 

दिलीप यादव ,

मुलायम सिंह ,

प्रशांत कुमार ,

शकील अंजुम

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इसे बारे में वरिष्ठ पत्रकार दिलीप मंडल लिखते हैं कि-

राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी के साथ दिलीप यादव

मोदी सरकार के दिमाग़ में शनि बैठ गया है। जावडेकर द्रोणाचार्य की भूमिका में हैं और छुरी लेकर अँगूठा काटने बैठ गए हैं।

कैंपस में सामाजिक न्याय की लड़ाई को राष्ट्रपति भवन तक पहली बार पहुँचाने वाले और देश में वंचितों की प्रमुख आवाज़ बन चुके स्कॉलर दिलीप यादव को जेएनयू से निकालने की साज़िश की गई है। उनका रजिस्ट्रेशन रोक दिया गया है।

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