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पिछड़े वर्ग का तीसरा बौद्धिक सम्मेलन 18 मार्च को लखनऊ में, देश भर से जुटेंगे सामाजिक चिंतक

लखनऊ, नेशनल जनमत ब्यूरो। 

जातिवाद के पुरोधाओं द्वारा वंचित वर्ग की बहुसंख्यक आबादी को धर्म की चासनी में लपेटकर पढ़ने लिखने से दूर रखा गया ताकि उनको वर्ण व्यवस्था के दकियानूसी फंदे में फंसाकर हर जाति को पुश्तैनी काम में उलझा दिया जाए।

कुर्मी से खेती, नाई से बाल काटना, तेली को तेल निकालना, अहीर को दुग्ध व्यवसाय, गड़रिया को पशुपालन और काछी को सब्जी उगाने के काम में लगाकर उनको शिक्षा से वंचित रखा गया।

वास्तविक शिक्षा से दूर शयननिद्रा में जा चुकी पिछड़े वर्ग की प्रतिभाओं को जगाने के लिए 18 मार्च दिन रविवार को 11 बजे से एस आर एस इण्टरनैशनल स्कूल, 16 बसंत विहार पिकनिक स्पॉट रोड, इंदिरानगर लखनऊ में तीसरे बौद्धिक संघ सम्मेलन का आयोजन हो रहा है।

कार्यक्रम आयोजक वरिष्ठ साहित्यकार राजकुमार सचान होरी कहते हैं कि देश में लगभग 60% से अधिक ही पिछड़ा वर्ग है। इस पिछड़े वर्ग की विभिन्न जातियों में लेखन से जुड़े बौद्धिक लोग जैसे पत्रकार, साहित्यकार, प्रोफेसर, कवि, इतिहासकार एवं अन्य बौद्धिक श्रेणी के कलाकार नाम मात्र हैं।

पिछड़े वर्ग में बुद्धिजीवी पैदा करना है-

इसका मूल कारण यह रहा कि पिछड़े वर्ग की सभी जातियों को खेती-किसानी में सदियों से उलझाए रखा गया। पूर्व प्रशासनिक अधिकारी राजकुमार सचान ने इसी जरूरत को समझते हुए 16 जुलाई 2017 को गाजियाबाद में पिछड़े वर्ग के पत्रकारों, लेखकों, कवियों, रचनाकारों का सम्मेलन आयोजित किया।

गाजियाबाद सम्मेलन के बाद, दूसरा सम्मेलन 28 जनवरी को एचएलएस कॉलेज, देवमनपुर, घाटमपुर जिला कानपुर नगर में आयोजित किया गया।

प्रमुख मुद्दे- 

मिशन है बौद्धिक क्रांति। सकल विश्व का इतिहास गवाह है कि सदैव“बौद्धिक क्रांति के रास्ते ही सामाजिक, राजनैतिक क्रांति होती है “

( 1 ) जनपद स्तर पर समाचार पत्रों का प्रकाशन

(2) पुस्तकों का अधिकाधिक प्रकाशन

(3) काव्य पाठ

राजकुमार सचान होरी का कहना है कि जो समाज अपने बौद्धिक वर्ग का जितना लालन, पालन और पोषण करता है वह स्थाई रूप से अग्रणी होता है और सामाजिक, राजनैतिक क्रांति का रास्ता लेखन से होकर ही गुजरता है। बैठक में समाचार पत्रों, पत्रिकाओं, पुस्तकों के प्रकाशन की समीक्षा भी जायेगी।

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