क्या PM केयर्स फंड मोदी का निजी फंड है? अब संसदीय समिति को फंड की जांच करने से रोका !

नेशनल जनमत ब्यूरो, नई दिल्ली

देश में 1948 से स्थापित प्रधानमंत्री राष्ट्रीय आपदा कोष ( PMNRF) होने के बाद भी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पीएम केयर्स फंड क्यों बनाया ? इसका जवाब देने से बीजेपी के नेता हमेशा कतराते रहे हैं इसलिए इसकी विश्वसनीयता हमेशा संदेह के घेरे में रहती है।

पीएम केयर्स फंड का कैग द्वारा न कोई ऑडिट होगा, न सूचना के अधिकार के तहत उसकी कोई जानकारी मांगी जा सकती है, न ही किसी वेबसाइट पर यह जानकारी सांझा की जाती है कि कितना पैसा आया, कितना कहां खर्च हुआ और कितना बचा है ?

RTI से मांगी गई जानकारी में SBI के उच्चाधिकारियों ने जो जानकारी भेजी थी वो भी एक तरह से उसे प्राइवेट फंड की तरह मान चुकी है। अब संसद की सबसे मजबूत व स्थाई मानी जाने वाली लोक लेखा समिति यानि PAC को भी पीएम केयर्स फंड के बारे में जानकारी जुटाने से इनकार कर दिया गया है।

संसदीय समितियों में से लोक लेखा समिति सबसे अहम महत्पूर्ण होती है। यह समिति ऑडिटर जनरल द्वारा पेश की गयी रिपोर्टों की जांच-पड़ताल करती है। लोक लेखा समिति अब तक 2जी स्पेक्ट्रम और पीएसी जैसे तमाम मामलों की जांच कर चुकी है।

PM Care फंड कार्यप्रणाली और इसकी अपारदर्शी व्यवस्था को लेकर चिंता जाहिर करने के बाद लोक लेखा समिति द्वारा इसकी जांच कराने की मांग रखी गयी थी। लेकिन 10 जुलाई को कोरोना संकट के आने के बाद पहली बार हुई समिति की बैठक में इस मामले की जांच के लिए सभी सदस्यों की सर्वसम्मति बनाने में नाकाम रही.

संसदीय समिति की बैठक में बीजेपी की अध्यक्षता कर रहे भूपेंद्र यादव ने पीएम केयर्स फंड की जांच पड़ताल के प्रस्ताव को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि पीएम केयर्स की फंडिंग संसद द्वारा स्वीकृत नहीं है और इस वजह से लोक लेखा समिति इस मामले की जांच नहीं कर सकती है।

कोरोनावायरस के दौरान सरकार ने इससे निपटने के लिए कई फैसले लिए है। इस दौरान केंद्र सरकार द्वारा सबसे अहम फैसला प्रधानममंत्री रहत कोष के होते हुए एक अलग PM care फंड बनाने का फैसला था।

जिसपर विभिन्न राजनीतिक दलों, संगठनों एवं व्यक्तियों द्वारा पीएम केयर्स फंड की कार्यप्रणाली और इसकी अपारदर्शी व्यवस्था को लेकर चिंता जाहिर की गयी थी। गौरतलब है कि इन सब के बावजूद संसद की लोक लेखा समिति फंड की जांच की सहमति नहीं बना पायी।

लोक लेखा समिति (पीएसी) के अध्यक्ष कांग्रेस सांसद अधीर रंजन चौधरी ने सदस्यों से देश के बारे में सोचने और अपनी अंतरात्मा से काम करने और इस महत्वपूर्ण विषय पर आम सहमति बनाने की अपील की थी।

मीडिया रिपोर्ट्स बताती हैं कि पारदर्शिता के नाम पर सत्ता में आयी पार्टी बीजेपी के सदस्यों का स्पष्ट तौर पर कोरोना संकट के सरकारी प्रबंधनों की जांच-पड़ताल पर असमर्थन था। उन्होंने अधीर रंजन चौधरी के प्रस्ताव को रोक दिया।

PM care फंड कैग के अधीन नहीं होता है। इसलिए विपक्षी दलों के राजनेताओं का दावा है कि कोरोनावायरस से निपटने के लिए उठाए गए कदमों की जांच से बीजेपी इसलिए बचना चाहती है क्योंकि जांच से पीएम केयर्स फंड पर बारीकी से नजर रखी जा सकती है।

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