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PM को गुंडा कहना मानहानि नहीं है, अगर कोई साबित कर दे कि प्रधानमंत्री वास्तव में गुंडा है

नई दिल्ली। नेशनल जनमत ब्यूरो। 

वरिष्ठ पत्रकार गौरी लंकेश की हत्या के बाद उनको अपशब्द कहने वालों को ट्विटर पर फॉलो करने के कारण प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी आलोचना का शिकार हो रहे हैं। इस बीच सोशल मीडिया पर खबर चला चालू  हुई कि पत्रकार रवीश कुमार ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को गुंडा कहा है।

हालांकि रवीश कुमार ने खुद सामने आकर कहा कि उन्होंने गौरी लंकेश को अपशब्द कहने वालों को गुंडा कहा है ना कि प्रधानमंत्री को। लेकिन इस बात को या कहें कि गुंडा विमर्श को एक कदम आगे बढ़ते हुए वरिष्ठ पत्रकार व सामाजिक चिंतक दिलीप मंडल लिखते हैं कि सोशल मीडिया पर मुकदमेबाजी से कैसे बचें? एक शिक्षक के नोट्स-

प्रधानमंत्री को गुंडा कहना प्रधानमंत्री की मानहानि नहीं है अगर कोई यह साबित कर दे कि प्रधानमंत्री गुंडा है। वरना नहीं कहना चाहिए।
मानहानि के केस में Truth is defence है।

जैसे मैं यह कह सकता हूं कि प्रधानमंत्री दंगाइयों का संरक्षक है क्योंकि उन्होंने मुख्यमंत्री रहते गुजरात के दंगों को रोकने में ढिलाई बरती। तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने उन्हें फटकार लगाते हुए राजधर्म की याद दिलाई थी।

प्रधानमंत्री को मैं नोटबंदी का हत्यारा बोल सकता हूं। मेरे लिए 200 से ज़्यादा परिवार गवाही देंगे। अपने चुनावी वादों को पूरा न करने के लिए मैं नरेंद्र मोदी को झूठा और दग़ाबाज़ कह सकता हूँ। विकास की गति को पीछे ले जाने के लिए मैं उन्हें निकम्मा कह सकता हूँ।

हर अकाउंट में 15 लाख रु देने वाला वादा न निभाने के लिए मैं उन्हें बेईमान कह सकता हूँ। दलितों और मुसलमानों की गाय के नाम हो रही हत्याओं को न रोकने के लिए मैं उन्हें नाकारा और निकम्मा बोल सकता हूँ।

मैं उन्हें अंबानी और अडानी का दलाल बोल सकता हूं क्योंकि यह बात मैं साबित कर सकता हूं। मैं उन्हें अमित शाह जैसे बदनाम आदमी का साथी बोल सकता हूँ।

प्रधानमंत्री झुट्ठा है, इसे तो मैं सैकड़ों तरीक़े से साबित कर दूँगा। अब इसके लिए नरेंद्र मोदी मुझ पर मानहानि का केस थोड़ी करेंगे। नरेंद्र मोदी को बहुत आसानी से अनपढ़ और अज्ञानी कहा जा सकता है। उनके गणेश की सर्जरी, सिकंदर के बिहार जाने, तक्षशिला के बिहार में होने जैसे उनके बयान सबूत के तौर पर काम आएँगे। साबित हो जाएगा।

अगर कोई बात साबित नहीं कर सकते तो बोलने से परहेज़ कीजिए।

– दिलीप मंडल

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