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पीएम मोदी की यात्राओं से बढ़ा एयर इंडिया का घाटा, निजी हाथों में देने की तैयारी

नई दिल्ली, नेशनल जनमत,ब्यूरो।

पीएम मोदी समेत अन्य मंत्रियों, नेताओं के लटके पड़े ट्रेवल बिल का भुगतान ना होने से एक मात्र सरकारी बिमानन कंपनी एयर इंडिया भारी घाटे में है. ऐसे में इन नेताओं के ठाठ और ऐश ओ आराम के चलते अगर सरकार इसका निजीकरण करती है तो ये आरक्षित वर्ग के लिए बड़ा झटका साबित हो सकता है.

नीति आयोग ने की है निजीकरण की सिफारिश- 

नीति आयोग ने भारी घाटे की शिकार राष्ट्रीय विमानन कंपनी एयरइंडिया में सरकारी हिस्सेदारी घटाने की सिफारिश की है. वित्त मंत्रालय भी सैद्धांतिक तौर पर इस एयरलाइंस के निजीकरण के पक्ष में है. अगर नीति आयोग की सिफारिश मान ली जाती है तो सरकार एयरलाइंस की हिस्सेदारी निजी हाथों दे देगी.

नेताओं के ट्रेवल बिल है घाटे की मुख्य वजह- 

पीएम से लेकर अन्य मंत्रियों के ट्रैवल बिल जिस तरह महीनों लटके रहते हैं, उससे एयर इंडिया पर कर्ज का पहाड़ लदा है, औरों की बात तो छोड़िये पीएम की विमान यात्राओं के बिल का भुगतान ही महीनों लटका रहता है. हाल में पीएमओ को कई बार इसका बिल भेजने के बावजूद भुगतान नहीं हुआ. आरटीआई के तहत डाले गए आवेदनों ने इन तथ्यों का बखूबी खुलासा किया है.

नीति आयोग का कहना है कि सरकार लगातार भारी घाटे में चल रही एयरइंडिया में अपनी हिस्सेदारी बेच दे और यह पैसा स्वास्थ्य और शिक्षा सेक्टर को मजबूत करने में खर्च करे. दरअसल इस संबंध में नीति आयोग की रिपोर्ट ने एयरइंडिया के निजीकरण की बुनियाद रख दी है.

एयरइंडिया पर है 60 हजार करोड़ रुपये का घाटा- 

एयरइंडिया पर 60000 करोड़ रुपये का भारी-भरकम घाटा है. इसके बावजूद सरकारें नेशनल कैरियर कही जाने वाली इस कंपनी में पैसा झोंके जा रही है. इस साल इसकी नकदी में 3000 करोड़ रुपये की कमी का अनुमान है. 2015-16 में एयर इंडिया ने सिर्फ 105 करोड़ रुपये का मुनाफा कमाया, जबकि इसके कर्ज का सालाना ब्याज ही 4000 करोड़ रुपये बैठ रहा है.

नौकरशाही और भ्रष्ट नेताओं के गठजोड़ का परिणाम है ये- 

दरअसल एयरइंडिया का यह हाल बरसों से चली आ रही नौकरशाही और भ्रष्ट नेताओं का इसे अपनी निजी जागीर बना लेने की वजह से हुआ है. बड़े अफसरों के मनमाने रवैये, पेशेवर दक्षता में कमी और नाकारे प्रबंधन ने एयरइंडिया को देश की कर दाता जनता पर बड़ा बोझ बना दिया है.

लंबे वक्त से देश का एक बड़ा वर्ग सफेद हाथी बन चुकी एयर इंडिया के निजीकरण की मांग कर रहा है. लेकिन सरकारी खजाने पर सेंध लगाने वाली इस कंपनी में बड़ी रकम झोंकी जाती रही है. अब इसी आयोग ने एयर इंडिया के निजीकरण की सिफारिश की है. अब देखना है कि पीएमओ की ओर से एयरइंडिया का बिल लटकाने के इस दौर में मोदी सरकार इस सिफारिश पर कितना आगे बढ़ती है.

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