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गुजरात में BJP का प्लान B: भूख, बेरोजगारी, मंहगाई के जवाब देने के बदले पूरी राजनीति को धर्म से रंग दो

लखनऊ। अनूप पटेल (नेशनल जनमत) 

जब से ये बात आम हुई कि देश कि अर्थव्यवस्था बहुत कमजोर हो गयी है, उसकी विकास दर 3.7% हो गयी है। तीन साल में कोई भी आउटस्टैंडिंग प्लान नही कर पाए हैं, सिवाय स्वच्छता अभियान का भोंपू बजाकर। इन्ही बातों से गुजरात चुनाव में अपना नुकसान देख रही बीजेपी ने प्लान-B पर काम करना शुरू कर दिया है।

बीजेपी का गुजरात का छुपा एजेंडा ये है कि जनता के भूख, बेरोजगारी, मंहगाई जैसे मुद्दों पर जवाब देने के बदले पूरी राजनीति को धर्म से रंग दो। हर कहीं मोदी और आदित्यनाथ माडर्न बाबा बने घूम रहे है। गुड़ गवर्नेंस की खुद ही धज्जियां उड़ा रहे है। योगी हेलीकॉप्टर को ही पुष्पक विमान के रूप में दिख रहे है और अयोध्या से रामराज्य ला रहे है।

मोदी भोले बनकर जहर पीने की नौटंकी भी कर रहे है। लेकिन जनता ने इन दोनों को कलाकारी करने के लिए तो चुना नहीं था। आम हिन्दू इन दोनों ढोंगियों से ज्यादा धार्मिक है। सुबह पूजा पाठ कर लेता है जब भी विपत्ति में पड़ता है तो अपने ईष्ट को याद कर लेता है। लेकिन उन्हें अपनी जीविका की भी चिंता है।

किसान को किसानी की, जवानों को अपनी सुरक्षा की, नौजवानों को नौकरी की चिंता की है। जबकि मोदी-योगी टाइम पास कर रहे है। सत्ता का दुरुपयोग करके धार्मिकता का राजनैतिक फायदा लेने का एजेंडा शुरू कर दिया है।

गुजरात में पाटीदार, दलित, मुस्लिम और व्यापारी भाजपा सरकार से नाखुश तो है ही इस बार वहां के प्रमुख मंदिर भी भाजपा से खुश नही है। मंदिर के पुजारी इस बार कांग्रेस के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष राहुल गांधी का जोरदार स्वागत कर रहे है। राहुल गांधी की जहां जहां राजनैतिक सभाये हो रही है वहां के आस -पास के मंदिरों में राहुल गांधी जा रहे है।

मंदिरो की आरती और भजन-वंदना में भी शामिल हो रहे है। इस वजह से आम गुजरातियों में कांग्रेस के प्रति रुझान फिर से शुरू हुआ है। अभी तक भाजपा लगातार कांग्रेस को हिदू-विरोधी साबित करती रही है लेकिन इस बार दाल नही गल रही है। भाजपा और आक्रामक हो गयी है। गुजरात प्रदेश अध्यक्ष समेत अन्य भाजपा नेता राहुल गांधी को मिल रहे समर्थन से चिंतित नजर आ रहे है।

राहुल गांधी का विदेशी होने का मुद्दा फिर से उठा रहे है और कह रहे है कि एक विदेशी हिन्दू संस्कृति को क्या जानेगा। लेकिन गुजराती जनता से जवाब भी मिल रहा है। युवा विशेषकर पटेल समुदाय भाजपा पर काफी आक्रामक है।

राहुल गांधी के विदेशी होने का मुद्दा उछालने पर गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रूपाणी का विदेशी मूल का होना उछलने लगा है। विजय रूपाणी मूल रूप म्यामांर के है। भाजपा को राहुल गांधी का विरोध तुरंत बंद करना पड़ा।

राहुल गांधी की सक्रियता और गुजरात चुनाव- 

राहुल गांधी जैसे जैसे गुजरात में सक्रिय होते जा रहे है, वैसे ही कांग्रेस भाजपा का विकल्प बनती नज़र आ रही है। राहुल गांधी के मंदिरों में लगातार जाने से भाजपा की धर्म वाली राजनीति को चुनौती मिलने लगी है। इसका संकेत मोदी के पिछले महीने के शेड्यूल देखने से पता चलता है।

मोदी इस समय रैली कम पूजा-यज्ञ ज्यादा करने लगे है। काशी, अयोध्या, द्वारका, केदारनाथ पर मोदी का जाना और तेज़ हो गया है। इसी महीने के अंत मे मोदी की स्वामीनारायण सम्प्रदाय के प्रवर्तक के जन्मस्थान पर जाने की योजना है। गुजरात में स्वामीनारायण सम्प्रदाय के लगभग 10% अनुयायी है।

चुनावी समय में गुजरात में इस सम्प्रदाय की महत्ता बढ़ जाती है। स्वामीनारायण का जन्म उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले के छपिया स्थान में हुआ था। इस बार इस महोत्सव में लगभग दो लाख गुजराती आयेंगे। मोदी की नजर इस महोत्सव में आने वाले गुजरातियों पर है।

मोदी के सामने ये चुनौती है कि राहुल गांधी कहीं हिन्दुओं के बीच लोकप्रिय न हो जाएं। जबकि राहुल गांधी भाजपा सरकार के जनविरोधी फैसलो और बढ़ती बेरोजगारी पर भी सवाल उठा रहे है।

मोदी भले ही अपने को सबसे बड़ा धार्मिक पंडा साबित कर दें, लेकिन भूख, बेरोजगारी, भ्रष्टाचार के सवालों का जवाब नही दे पा रहे हैं जिससे बीजेपी को वोट देने वाला हर हिन्दू उत्पीड़ित है।

( लेखक अनूप पटेल यूपी के बांदा निवासी हैं और वर्तमान में जीआईडीएस लखनऊ में कार्यरत एक युवा विचारक हैं) 

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