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ये कैसा राष्ट्रहित? मित्र उद्योगपतियों के लिए मोदी सरकार ने खोला बैंकों का खजाना, कर्जा 300 गुना बढ़ा

नई दिल्ली। नेशनल जनमत ब्यूरो 

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के तीन साल के कार्यकाल में एक बात तो साफ है कि पीएम  बनने से पहले नरेन्द्र मोदी ने घूम घूमकर जो वायदे किए थे उसमें एक भी पूरे होने वाले नहीं है। वायदे के विपरीत मोदी सरकार हर वो काम कर रही है जो उसने मना किया था।

किसानों-गरीबों की सरकार होने का दंभ भरने वाली बीजेपी सरकार से किसानों का अपना कर्जा माफ करने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगाना पड़ रहा है लेकिन मित्र उद्योगपतियों के लिए मोदी सरकार ने सरकारी बैंकों का खजाना खोल दिया है। इस बात को सरकार ने संसद के अंदर खुद कबूला है।

केंद्र में मोदी सरकार आने के बाद बैंकों का कर्जा 300 फीसदी तक बढ़ गया है। लोकसभा में वित्त मंत्रालय ने स्वीकार किया है कि साल 2014 से लेकर अब तक पिछले तीन सालों में सरकारी बैंकों का कर्जा 300 प्रतिशत बढ़कर 6 लाख 41 करोड़ रुपए तक पहुंच चुका है। जबकि साल 2014 में यह कर्जा लगभग 2 लाख 16 करोड़ रुपए था।

10 बड़े बिजनेस समूहों पर 5 लाख करोड़ बकाया है- 

10 बड़े बिजनेस समूहों पर 5 लाख करोड़ का बक़ाया कर्ज़ा है. किसान पांच हज़ार करोड़ का लोन लेकर आत्महत्या कर ले रहा है. इन पांच लाख करोड़ के लोन डिफॉल्टर वालों के यहां मंत्री से लेकर मीडिया तक सब हाजिरी लगाते हैं.

भूषण स्टील- 44,477 करोड़, एस्सार स्टील- 37,284 करोड़, भूषण पावर- 37,248 करोड़, एल्क्ट्रो स्टील-10,274, मोनेट इस्पात- 8,944 करोड़. कुल मिलाकर इन पांच कंपनियों पर बैंकों का बकाया हुआ 1, 38, 227 करोड़. एस्सार स्टील पर 22 बैंकों का बकाया है.

इसके अलावा अनिल अंबानी के रिलायंस ग्रुप पर अकेले 1, 21, 000 करोड़ का बैड लोन है. इस कंपनी को 8,299 करोड़ तो साल का ब्याज़ देना है. कंपनी ने 44,000 करोड़ की संपत्ति बेचने का फ़ैसला किया है.

रूइया के एस्सार ग्रुप की कंपनियों पर 1, 01,461 करोड़ का लोन बक़ाया है. गौतम अडानी की कंपनी पर 96,031 करोड़ का लोन बाक़ी है. कहीं 72000 करोड़ भी छपा है. मनोज गौड़ के जेपी ग्रुप पर 75,000 करोड़ का लोन बाकी है

पश्चिम बंगाल सांसद कल्याण बनर्जी द्वारा पूछे गए सवाल- 

(क) क्या भारतीय स्टेट बैंक की निवल गैर-निष्पादनकारी परिसम्पत्तियां (एन.पी.ए) घटकर 3.71 प्रतिशत हो गई है और यदि हां, तो तत्संबंधी ब्यौरा क्या है:
(ख) क्या सरकारी विभाग/उपक्रम शीर्ष चूककर्ताओं में से हैं जिनके चलते एनपीए बन रहा है।
(ग) यदि हां तो पिछले पांच वर्षों तथा चालू वर्ष के दौरान सार्वजनिक क्षेत्र तथा निजी क्षेत्र के बैंकों के एनपीए का क्या ब्यौरा है?
(घ) इनके एनपीए में कमी लाने के लिए सरकार द्वारा क्या कार्रवाई की गई है/की जा रही है?
(ड.)100 बड़े गैर-निष्पादनकारी कॉर्पोरेट ऋण खातों के शीघ्र समाधान के लिए पर्यवेक्षण समिति की रिपोर्ट की मुख्य विशेषताएं क्या हैं?

इसके जबाव में वित्तमंत्रालय की तरफ से कहा गया है-

(क) से (ड.): 31 मार्च, 2017 की स्थिति के अनुसार भारतीय स्टेट बैंक की एनपीए कुल अग्रिम का 3.72 प्रतिशत हैं। 31 मार्च 2017 की स्थिति के अनुसार बैंक के शीर्ष 25 एनपीए में कोई सरकारी विभाग/उपक्रम नहीं है। विगत पांच वर्षों और वर्तमान वर्ष के दौरान सरकारी क्षेत्र के बैंकों और निजी क्षेत्र के बैंकों की एनपीए का ब्यौरा निम्नानुसार है-

बैंकों को दबावग्रस्त अस्तियों के त्वरित समाधान के लिए कॉर्पोरेट ऋण पुनर्संरचना, जेएलएफ का गटन, दीर्घावधिक परियोजना ऋणों की लचीली संरचना(5/25 योजना), एसडीआर और दबावग्रस्त आस्तियों की संपोषणीय संरचना (एस4ए) जैसे साधन उपलब्ध कराए गए हैं।

इस क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए सड़क (रुकी हुई परियोजना में एनएचएआई के हस्तक्षेप से एकबारगी निधि निवेश), विद्युत क्षेत्र (उदय योजना), इस्पात क्षेत्र (न्यूनतम आयात की मूल्य की अधिसूचना) जैसे क्षेत्रों के लिए क्षेत्र विशिष्ट उपाय किये गये हैं। ताकि दबाव में कमी आए। वर्ष 2016 में केंद्र सरकार ने दबावग्रस्त आस्तियोंके समयबद्ध तथा न्यायालय द्वारा पर्यवेक्षित समाधान के लिए दिवाला तथा शोधन अक्षमता संहिता, 2016(संहिता) को अधिनियमित किया है।

आरबीआई ने उधारदताओं को राहत देने के उद्देश्य से समाधान प्रक्रिया की अन्य पक्ष पुनरीक्षा आरंभ करके योजनागत समाधान के पश्चात् खातों के समाधान के पर्यवेक्षण के लिए एक पर्यावलोकन समिति (ओसी) का गठन किया है।

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