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इलाहाबाद वि.वि. के VC ने PM को लिखा पत्र, मेरे पहले के कुलपतियों ने 250 करोड़ का भ्रष्टाचार किया है

नई दिल्ली। नेशनल जनमत ब्यूरो 

इलाहाबाद विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर रतनलाल हांगलू ने विश्वविद्यालय में छात्रसंघ और शिक्षक संघ के बीच चल रहे गतिरोध के बीच प्रधानमंत्री को पत्र लिखा है। पत्र लिखकर प्रोफेसर हांगलू ने दावा किया है कि मेरे पहले जो कुलपति रहे हैं उन्होंने 250 करोड़ का भ्रष्टाचार किया है। इतना ही नहीं उन्होंने कहा कि 2005 से विश्वविद्यालय भ्रष्टाचार का अड्डा बन गया है।

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आप खुद पढ़िए कुलपति ने अपने पत्र में क्या लिखा है?

पैसा पढ़ाने के लिए मिलता है। जो पैसा आया उसका मिस यूज हुआ है। कई शिक्षकों ने गलत तरीके से करोड़ों रुपए जुटा लिए हैं। काफी पैसा भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गया है। हमने एक रिपोर्ट बनवा कर माननीय पीएम को भेजी है। शिक्षा मंत्रालय और माननीय राष्ट्रपति को भी भेजा है । चाहे सीबीआई जांच करानी हो या कोई और जांच करानी हो सरकार इसपर फैसला लें।

कई फर्जी और घोस्ट एंप्लाई बनाकर वेतन लिया गया है। कई लोग कोर्ट से ऑर्डर लेकर फर्जी कर्मचारी बनकर बैठे हैं। कई लोग बिना इंटरव्यू, बिना सिलेक्शन कमेटी के लेक्चरर बन गए। तो यूनिवर्सिटी में अगर हम लोग ही गलतियां करें तो ये ठीक नहीं है ।

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करीब 2.5 सौ करोड़ से ज्यादा का घपला हुआ होगा। 9 करोड़ 12 का पेमेंट ऐसा हुआ है जिसे देना ही नहीं चाहिए था । करीब 200 करोड़ कुछ टीचर्स ने यहां से फिक्सेशन कराकर ले गए । इनमें से बहुत से टीचर्स की मौत हो गई या रिटायर हो गए हैं । और मैं देख रहा हूं कि वही टीचर जो हमारे खिलाफ कंप्लेन कर रहे हैं वही उसमें शामिल हैं । 78 लाख रुपए की एलटीसी ही खराब है ।

सीएजी ने इसे प्वाइंच आउट भी किया है। मैंने सीएजी को भी ऑडिट के लिए लिखा था। कई जगह एलॉटेड पैसा शून्य है और हम करोड़ों में खर्च कर रहे हैं। हम रोजाना जो पैसे खर्च करते हैं उसका हिसाब रखते हैं। RTGS के थ्रू हम पैसे खर्च करते हैं, तो इस तरह से हमें पता चला कि पैसा कहां गया है। मैं चाहूंगा कि सीबीआई जांच हो और ऐसे लोगों को सजा मिले।

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साल 2005 से इलाहाबाद विश्वविद्यालय में भ्रष्टाचार चलता आ रहा है। जब यूनिवर्सिटी सेंट्रल बनी तब से घपला शुरू हुआ । बेतहाशा पैसा आया और उसे खूब लूटा गया । 9 करोड़ 12 लाख रुपए से ज्यादा ऐसे सेल्फ फाइनेंस इंस्टिट्यूट को सैलरी दी गई जो यूनिवर्सिटी के हिस्सा ही नहीं था । बाहर कोई भी संस्था चला रहा हो और आप यूनिवर्सिटी का पैसा दे रहे हो ये कहां सही है।

35 से 40 करोड़ रुपए तक एडवांस लोन लेकर लौटाया ही नहीं गया। जब से मैं आया हूं करीब 6 करोड़ 90 लाख रुपए रिकवर भी किया है । बहुत पैसा अभी तक रिटर्न नहीं आ पाया। 78 लाख रुपए फ्रॉड एलटीसी था और टीचर के फिक्सेशन पर करीब 200 करोड़ रुपए गया है। इसमें सरकार को कुछ कठोर कदम उठाने होंगे।

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इन पैसों की जांच होनी चाहिए, ये पब्लिक मनी है और ये लोग इसी लिए बार बार यहां उपद्रव कराते थे कि मेरा ध्यान इन मामलों से हटे। लेकिन इससे कोई फर्क नहीं पड़ता है मुझे जो काम करना है वो करुंगा। एक छात्र ने चिल्लाते हुए कहा कि हमें उपद्रव के लिए 5 लाख रुपए मिला है, भ्रष्टाचारी लोग उपद्रव करा रहे हैं।

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