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भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ी कौशल विकास योजना, उ.प्र., हरियाणा और राजस्थान में करोड़ों का घोटाला

नई दिल्ली। नेशनल जनमत ब्यूरो

देश के युवाओं को स्वरोजगार के लिए प्रशिक्षण देने वाली प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना (PMKVY) भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गई है. मोदी सरकार ने 1 करोड़ युवाओं के कौशल विकास के नाम पर इस योजना को शुरू किया था. लेकिन मोदी सरकार की इस महत्वाकांक्षी योजना को देखरेख के अभाव में अफसरों ने फेल करने में कोई कसर नहीं छोड़ी.

हालांकि केन्द्रीय कौशल विकास एवं उद्यम मंत्री राजीव प्रताप रुडी इस घोटाले पर भले ही चुप्पी साधे हो. लेकिन मंत्रालय से जुड़े विश्वस्त सूत्रों की मानें तो बड़े स्तर पर फर्जीवाड़ा सामने आने के बाद उत्तर प्रदेश, हरियाणा और राजस्थान मे) आगे कोई भी नया सेंटर नहीं दिया जा रहे हैं. साथ ही तीनों राज्यों के सभी सेंटरों पर गड़बड़ियों की जांच भी कराई जा रही है.

फर्जी सेंटर दिखाए गए कागजों में –

राजस्थान में युवाओं को स्किल्ड करने के नाम पर न सिर्फ फर्जी ट्रेनिंग सेंटर दिखाए गए, बल्कि इन सेंटरों पर फर्जी एंट्री दिखाकर लाखों रु. का भुगतान उठाया गया. इसका खुलासा महालेखाकार की गोपनीय जांच रिपोर्ट में हुआ है। सीएजी की टीम ने मार्च 2016 से जुलाई 2016 के बीच जयपुर, अलवर और कोटा में संचालित 18 स्किल डवलपमेंट सेंटर्स (एसडीसी) पर जांच की तो यह घोटाला सामने अाया। यही हाल उत्तर प्रदेश और हरियाणा का है. कई जगह सेंटर एक कमरे में भी बोर्ड लगाकर चल रहे हैं.

40 प्रतिशत छात्र निकले फर्जी-

सेंटर्स से लिए गए रिकॉर्ड के आंकड़ों में सामने आया है कि ज्यादातर सेंटर्स पर लगे बायोमेट्रिक एटेंडेंस सिस्टम में भारी फर्जीवाड़ा हुआ है. जो छात्र सेंटर्स पर थे ही नहीं बायोमेट्रिक मशीन में उनकी हाजिरी लगाकर सरकार से लाखों रुपए का भुगतान उठाया गया. इसमें अफसरों और मंत्रालय से जुड़े लोगों की मिलीभगत भी सामने आई है.

गाइडलाइन के मुताबिक ट्रेनीज की हाजिरी जीपीएस से जुड़ी बायोमेट्रिक मशीन से होना चाहिए और यह मशीन सर्वर पर मैनेजमेंट इंफोरमेशन सिस्टम (एमआईएस) से ऑनलाइन जुड़ा होना चाहिए. लेकिन सैकड़ों सेंटरों पर तो बायोमेट्रिक मशीन तक नहीं है, जबकि इन सेंटरों पर रोजाना सैंकड़ों छात्रों को ट्रेनिंग लेते हुए दिखाया जा रहा था. इनकी ऑनलाइन हाजरी एमआईएस सिस्टम पर भी दर्ज हो रही थी।

जो कोर्स में थे ही नहीं उनके नाम पर भी पैसा लूटा- 

तकरीबन 30 प्रतिशत ट्रेनीज फर्जी थे क्योंकि उनके बायोमेट्रिक इंप्रेशन मशीन में दर्ज थे ही नहीं। लेकिन स्क्रूटनी रिकॉर्ड्स में सामने आया कि सर्वर पर इन सबकी हाजिरी बैच के शुरू होने के दिन से ही दिखाई गई थी.

कोर्स खत्म करने से पहले प्लेसमेंट – 

दरअसल कोर्स का 20 प्रतिशत भुगतना तब होता है जब बच्चों को कहीं प्लेसमेंट मिल जाए. इसलिए फर्जी तरीके से ऑफर लेटर भी बनवाए गए.तीनों प्रदेशों में हजारों ऐसे मामले सामने आए जिवमें ट्रेनीज को रोजगार में समायोजित किए जाने की तारीख उनके कोर्स खत्म होने से पहले की थी। वहीं कुछ मामलों में तो कंपनी के कैंपस प्लेसमेंट तारीख से पहले ही ट्रेनीज को उसमें समायोजित बताया गया।

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