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UPSC को भेजे गए प्रस्ताव में OBC/SC/ST के खिलाफ साजिश और ‘वफादार’ नौकरशाही तैयार करने की बू है

नई दिल्ली, नीरज भाई पटेल (नेशनल जनमत) 

जयपुर के एक सम्मेलन में हिन्दुत्ववादी राजनीति के अगुवा बीजेपी के राज्यसभा सांसद सुब्रह्मण्यम स्वामी ने कहा था कि हम आरक्षण को उस स्तर तक ले आएंगे कि उसके होने ना होने की प्रासंगिकता ही खत्म हो जाएगी।

मोदी सरकार के फैसलों में ये बात स्पष्ट तौर पर दिखाई भी दे रही है। पहले आरक्षित वर्ग को आरक्षण के प्रतिशत तक सीमित किया गया। फिर यूजीसी ने शिक्षण संस्थानों में नियुक्ति के लिए नया रोस्टर सिस्टम लागू कर दिया।

इस रोस्टर सिस्टम के तहत विभागवार निकल रही नियुक्तियों में ओबीसी,एससी,एसटी का आरक्षण तकरीबन खत्म ही हो गया है। इसके अलावा पिछले दरवाजे से मेडिकल परीक्षा नीट, आईआईटी और अन्य उच्च शिक्षण संस्थानों में निकाली गई नियुक्तियों में संविधान प्रदत्त आरक्षण पूरा दिया ही नही गया।

अब यूपीएससी में बड़ी साजिश की आहट- 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यालय से आए एक पत्र ने देश के बौद्धिक तबके की नींद उड़ा रखी है। इस पत्र को अगर यूपीएससी मान लेता है तो संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) द्वारा कराई जाने वाली सिविल सेवा परीक्षा में अच्छा प्रदर्शन करना ही आपको IAS-IPS-IRS कैडर नहीं दिलवा पाएगा।

पीएमओ के नये प्रस्ताव के अनुसार प्रोबेशन पर काम कर रहे सफल अभ्यर्थी आखिरकार किस सेवा में जाएंगे और उन्हें कौन सा कैडर मिलेगा येसिविल सेवा के अंक तय नहीं करेंगे बल्कि लाल बहादुर शास्त्री अकादमी मंसूरी में होने वाले अनिवार्य ‘फाउंडेशन कोर्स’ में उनके प्रदर्शन पर आधारित होगा।

अगर प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) के नवीनतम प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया जाता है, तो सैद्धांतिक तौर पर किसी अभ्यर्थी के लिए कम रैंक आने के बावजूद ऊपर की रैंक से मिलने वाली सेवा में पहुंचना संभव हो जाएगा और टॉपर अभ्यर्थी भी आईएएस-आईपीएस से चूक सकते हैं।

मान लीजिए कि सिविल सेवा परीक्षा में किसी अभ्यर्थी की रैंक के मुताबिक उसे सिर्फ इंडियन डिफेंस अकाउंटस सर्विस मिल सकती है, लेकिन इस प्रस्ताव के बाद वह मसूरी या सरदार वल्लभभाई पटेल पुलिस एकेडमी या लोक सेवकों के लिए दूसरी अकादमियों में फाउंडेशन कोर्स में प्रदर्शन के आधार पर प्रतिष्ठित सेवा में छलांग लगा सकता है.

डीओपीटी ने मांगा है सुझाव- 

केंद्र के कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी) ने प्रधानमंत्री कार्यालय के इस प्रस्ताव पर विभिन्न मंत्रालयों से सुझाव मांगा है, डीओपीटी की चिट्ठी में कहा गया है कि पीएमओ ने ‘नीचे दिए गए सुझाव पर विचार मांगा है और इसे इसी साल से लागू करने के लिए जरूरी कदम उठाने की इच्छा जताई है’:

केंद्र सरकार के मंत्रालय ‘इस बात की जांच करें कि क्या सिविल सेवा परीक्षा के आधार पर चयनित प्रशिक्षु अफसरों को सेवा आवंटन/कैडर आवंटन फाउंडेशन कोर्स के बाद किया जा सकता है? फाउंडेशन कोर्स में प्रदर्शन को उचित महत्व किस तरह से दिया जा सकता है?

इस बात की गुंजाइश की भी जांच की जाए कि क्या अखिल भारतीय सेवाओं के अफसरों को सेवा और कैडर आवंटन सिविल सेवा परीक्षा और फाउंडेशन कोर्स दोनों के सम्मिलित अंकों के आधार पर किया जा सकता है?’

विभिन्न मंत्रालयों में डीओपीटी की इस चिट्ठी के पहुंचने के दो दिन बाद, नौकरशाहों के व्हाट्सऐप समूहों में यह बहस का प्रमुख मुद्दा बन गया है.

क्यों चिंतिंत हैं भविष्य के नौकरशाह- 

पूर्वाग्रह और पक्षपात- 

पूर्व आईएएस तपेन्द्र प्रसाद शाक्य कहते हैं कि एलबीएसएनएए और दूसरी अकादमियों में किया जाने वाला मूल्यांकन पूर्वाग्रहों से युक्त होता है. उनका कहना है कि इस देस में जाति एक सच्चाई है, ऐसे में अकादमी के शिक्षकों या निदेशकों से बहुत सारे सवाल पूछने वाले और उनकी बात से सहमति ना रखने वाले के साथ पक्षपात हो सकता है

वफादार नौकरशाही की चाह- 

विशेष सचिव स्तर के एक आईएएस ने ‘नेशनल जनमत’ से कहा कि मोदी सरकार पूरे देश को संघ की मानसिकता के अनुसार चलाना चाहती है। ऐसे में डर इस बात का है सरकार की मानसिकता के अनुरूप बैठे अकादमियों के डायरेक्टर बड़ी सेवाओं का दरवाजा उन लोगों के लिए खोल देंगी, जिनका नजरिया इस सरकार के अनुरूप होगा, और यह धीरे-धीरे एक ‘वफादार’ या प्रतिबद्ध नौकरशाही का निर्माण करेगा.

पूर्व वरिष्ठ पीसीएस ऑफिसर वीपी सिंह ने बताया कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से नजदीकी तौर पर जुड़े संकल्प कोचिंग सेंटर पूरे देश में खुल गए हैं और कई सेवारत और रिटायर्ड नौकरशाह इनमें नियमित तौर पर लेक्चर देने के लिए जाते हैं.

यह कदम नौकरशाहों की नई पीढ़ी का दम घोंट देगा. अब कोई भी प्रशिक्षु फाउंडेशन कोर्स के दौरान खराब मूल्यांकन और खराब सेवा में भेज दिए जाने के डर से सवाल पूछने की हिम्मत नहीं करेगा.

सिफारिश औऱ जुगाड़ इस देश का सत्य है- 

सिफारिश और जुगाड़ इस देश का अटल सत्य है ऐसे में कुछेक जातियों में प्रभावशाली नौकरशाहों की भरमार है जो अपने करीबी नाते-रिश्तेदार, भाई-भतीजे की सिफारिश अकादमियों के निदेशकों से करने में सझम होंगे बाकी सामान्य परिवार से आने वाले कई होनहार अच्छे प्रदर्शन के बाद भी नीचे किए जा सकते हैं।

पीएचडी करने वाले यूपी के एक वर्तमान नौकरशाह कहते हैं कि पीएचडी करने के दौरान गुरुजी लोगों की कृपा से ही डिग्री संभव है। इसमें इनके घर सब्जी पहुंचाने से लेकर उनके घर के तमाम काम और जाति का फैक्टर भी प्रभावी होता है। फाउंडेशन कोर्स के आधार पर फैसला लेना इसी चापलूसी संस्कृति को बढ़ावा देगा।

यूपी कैडर के एक तेजतर्रार युवा आईएएस का कहना है कि यह प्रस्ताव मोदी सरकार के दूसरे सारे कदमों की तरह से अधपका और खराब इरादों से भरा है. वे कहते हैं, ‘यह व्यवस्था को अच्छा तो नहीं बनाएगा, इसे बर्बाद बेशक कर देगा.’साथ ही ओबीसी-एससी-एसटी के लिए घातक साबित होगा।

( नेशनल जनमत के संपादक नीरज भाई पटेल ने विभिन्न नौकरशाहों से बातचीत के आधार पर लिखा है )

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