You are here

किसानों को योगा सिखाने वालों दम है तो करके दिखाओ इस किसान पुत्र की तरह ‘भैंस शीर्षासन’

नई दिल्ली। नेशनल जनमत ब्यूरो।

अन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस के मौके पर ये तश्वीर सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रही है. लोगों का कहना है कि इस देश की 60 फीसदी आबादी कृषि कर्म मे जुड़ी है और दिन -रात खेत में मेहनत करती है, इसलिए उसे योग करके अपने शरीर को दुरुस्त करने की जरूरत नही हैं. ये योग की नौटंकी उन्ही को मुबारक हो जो दिन-रात एसी में बैठकर तोंदू होते जा रहे हैं.

सोशल मीडिया पर वायरल हुई इस तस्वीर पर लोगों ने किसानों की समस्याओं को दरकिनार कर योगा करने वाले पीएम पर खूब भड़ास निकाली. राहुल निषाद का तर्क था कि मानसिक तनाव मुख्य रूप से शहरी जीवन की दिक्कत है. इसलिए मानसिक शांति के लिए गांव के लोगों को योग करने की जरूरत नहीं है.

आशीष मौर्या ने लिखा कि है किसी योगाचार्य में हिम्मत जो ये भैंसा शीर्षासन  करके दिखा सके.

वैसे तो योग भारतीय पुरातन संस्कृति का हिस्सा रहा है. पर इस बात का जिक्र कोई नहीं करना चाहता कि खेतिहर समाज में योग कितनी घुसपैठ कर पाया है. कोई भी इस बात का प्रमाण देने में सक्षम नहीं है कि भारत में कृषि औऱ पशुपालन के कर्म में लगे लोग कभी योग के प्रति आकर्षित रहे हैं. या यूं कहें कि मेहनतकश लोगों को इसकी कोई जरूरत नहीं.

इसे भी पढ़ें…नोएडा , भविष्य बताने वाला निकला खालों का तस्कर, फर्जी ज्योतिषी कल्लीकृष्णन गिरफ्तार

एक अनुमान के मुताबिक योग प्राचीन काल में भी शारीरिक रूप से कम मेहनत करने वाले लोगों के संस्कार मे ही रहा होगा. प्राचीन काल में व्यापारी वर्ग भी योग से जुड़ा रहा होगा , इस विषय पर एकमत नहीं है. प्राचीन काल मे संचार और यातायात के समुचित साधन उपलब्ध न होने के कारण व्यापार भी मेहनत का कर्म माना जाता था. ऐसा मानना गलत नहीं होगा कि प्राचीन काल में योग मात्र कुछ लोगों के लिए शारीरिक -मानसिक जुगाली का साधन रहा होगा.

इसे भी पढ़ें…कर्ज के बोझ तले मर रहा किसान, लेकिन भगवान को पहनने के लिए हैं लाखों के कपड़े

यही हालात आज भी है . हालांकि आज योग को लेकर माहौल बदला है. संचार औऱ यातायात के अच्छे साधन उपलब्ध होने के कारण आज व्यापार मेहनत का काम नहीं रह गया. इसलिए आज व्यापारी वर्ग भी योग का उपभोक्ता बनकर उभरा है. लेकिन पहले की ही तरह आज भी किसान और पशुपालन का कर्म करने वाले लोग योग के आज भी उपभोक्ता नहीं है.

इसे भी पढ़ें…क्या सांसे अंदर बाहर करना ही है योग ? जानना है पूर्ण योग तो पढ़िए सुनील कुमार का ये लेख

वरिष्ठ पत्रकार दिलीप मंडल लिखते हैं कि- 

बालकृष्ण के पीछे जो उनकी कार खड़ी है, रैंज रोवर, उसकी क़ीमत 2.20 करोड़ रुपए है। और आप कहते हैं कि योगा से फ़ायदा नहीं होता!

एक्ट्रेस नेहा धूपिया लिखती हैं कि- 

अपने ट्वीट में नेहा ने लिखा, ‘एक बारिश होती है और शहर थम जाता है। अच्छी सरकार सिर्फ सेल्फी लेने या हमें योगा कराने के लिए नहीं है। सरकार को यह देखना चाहिए कि नागरिक कितने सुरक्षित हैं।’

Related posts

Share
Share