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भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ी ‘प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना’, ट्रेनिंग के बाद भी 20 लाख बेरोजगार

नई दिल्ली, नेशनल जनमत ब्यूरो।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बहुचर्चित ‘प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना’ यानी (PMKVY) बुरी तरह फेल हो गई है। पीएम मोदी ने योजना के शुरू करते हुए नौजवानों में उम्मीद जगाई थी कि इस योजना से देश के लाखों युवाओं को रोजगार मिलेगा। लेकिन योजना भ्रष्टाचार की भेंट चढ़कर निर्धारित लक्ष्य पूरा करने के लिए संघर्ष कर रही है।

जुलाई 2017 के पहले हफ्ते तक के आंकड़ों के अनुसार इस योजना के तहत जिन 30.67 लाख लोगों को कौशल प्रशिक्षण दिया गया था उनमें से 2.9 लाख लोगों को ही नौकरी के प्रस्ताव मिले। यानी योजना के तहत प्रशिक्षण पाने वालों में 10 प्रतिशत से भी कम को नौकरी हासिल हो सकी।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दो अक्टूबर 2016 को 1200 करोड़ रुपये के बजट के साथ कौशल विकास योजना शुरू की थी। सूत्रों के अनुसार, कौशल विकास योजना के तहत युवाओं को बहुत कम रोजगार मिलने की बात सरकार अब समझ चुकी है।

फर्जी सेंटर दिखाए गए कागजों में –

राजस्थान में युवाओं को स्किल्ड करने के नाम पर न सिर्फ फर्जी ट्रेनिंग सेंटर दिखाए गए, बल्कि इन सेंटरों पर फर्जी एंट्री दिखाकर लाखों रु. का भुगतान उठाया गया. इसका खुलासा महालेखाकार की गोपनीय जांच रिपोर्ट में हुआ है। सीएजी की टीम ने मार्च 2016 से जुलाई 2016 के बीच जयपुर, अलवर और कोटा में संचालित 18 स्किल डवलपमेंट सेंटर्स (एसडीसी) पर जांच की तो यह घोटाला सामने अाया। यही हाल उत्तर प्रदेश और हरियाणा का है. कई जगह सेंटर एक कमरे में भी बोर्ड लगाकर चल रहे हैं.

40 प्रतिशत छात्र निकले फर्जी-

सेंटर्स से लिए गए रिकॉर्ड के आंकड़ों में सामने आया है कि ज्यादातर सेंटर्स पर लगे बायोमेट्रिक एटेंडेंस सिस्टम में भारी फर्जीवाड़ा हुआ है. जो छात्र सेंटर्स पर थे ही नहीं बायोमेट्रिक मशीन में उनकी हाजिरी लगाकर सरकार से लाखों रुपए का भुगतान उठाया गया. इसमें अफसरों और मंत्रालय से जुड़े लोगों की मिलीभगत भी सामने आई है.

गाइडलाइन के मुताबिक ट्रेनीज की हाजिरी जीपीएस से जुड़ी बायोमेट्रिक मशीन से होना चाहिए और यह मशीन सर्वर पर मैनेजमेंट इंफोरमेशन सिस्टम (एमआईएस) से ऑनलाइन जुड़ा होना चाहिए. लेकिन सैकड़ों सेंटरों पर तो बायोमेट्रिक मशीन तक नहीं है, जबकि इन सेंटरों पर रोजाना सैंकड़ों छात्रों को ट्रेनिंग लेते हुए दिखाया जा रहा था. इनकी ऑनलाइन हाजरी एमआईएस सिस्टम पर भी दर्ज हो रही थी।

जो कोर्स में थे ही नहीं उनके नाम पर भी पैसा लूटा- 

तकरीबन 30 प्रतिशत ट्रेनीज फर्जी थे क्योंकि उनके बायोमेट्रिक इंप्रेशन मशीन में दर्ज थे ही नहीं। लेकिन स्क्रूटनी रिकॉर्ड्स में सामने आया कि सर्वर पर इन सबकी हाजिरी बैच के शुरू होने के दिन से ही दिखाई गई थी.

कोर्स खत्म करने से पहले प्लेसमेंट – 

दरअसल कोर्स का 20 प्रतिशत भुगतना तब होता है जब बच्चों को कहीं प्लेसमेंट मिल जाए. इसलिए फर्जी तरीके से ऑफर लेटर भी बनवाए गए.तीनों प्रदेशों में हजारों ऐसे मामले सामने आए जिवमें ट्रेनीज को रोजगार में समायोजित किए जाने की तारीख उनके कोर्स खत्म होने से पहले की थी। वहीं कुछ मामलों में तो कंपनी के कैंपस प्लेसमेंट तारीख से पहले ही ट्रेनीज को उसमें समायोजित बताया गया।

मंत्रालय की जिम्मेदारी राजीव प्रताप रूड़ी को सौंपी गई थी। लेकिन राजीव प्रताप रूड़ी के कार्यकाल में पीएमकेवीआवाई कुछ खास न कर सकी। जिसके बाद राजीव प्रताप रूड़ी को अपनी कुर्सी गंवानी पड़ी। मोदी मंत्रिमंडल से हटाए जाने के बाद इस मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को दिया गया है।

वहीं राजीव प्रताप रूडी का कहना है कि मंत्रालय का काम नौकरी दिलाना नहीं था बल्कि लोगों को नौकरी लायक बनाना था।

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