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सुप्रीम कोर्ट में प्रशांत भूषण चीफ जस्टिस पर क्यों चिल्लाए, पढ़िए पूरा सच जो मीडिया ने छुपा लिया !

नई दिल्ली, नेशनल जनमत ब्यूरो। 

सुप्रीम कोर्ट में जो कुछ भी हुआ उसे तथाकथित मुख्यधारा की मीडिया आपको कभी नहीं बताएगा। मीडिया ने आपको सिर्फ इतना बताया कि शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान गर्मागर्मी का माहौल दिखा जब वकील प्रशांत भूषण चीफ जस्टिस की बेंच पर चिल्लाए और कोर्ट छोड़कर चले गए।

मामला सिर्फ चिल्लाने और सुनवाई छोड़कर जाने का नहीं है इस चिल्लाहट के पीछे छुपा है भारतीय न्याय व्यवस्था का काला सच। ये घटना ये बताने के लिए काफी है कि जस्टिस कर्णन ने न्यायपालिका में भ्रष्टाचार के जो आरोप लगाए थे उनमें कुछ ना कुछ तो सच्चाई थी। आखिर क्यों जस्टिस कर्णन समेत कई जज दीपक मिश्रा को देश का चीफ जस्टिस बनाने के खिलाफ थे ?

दरअसल मामला ये है कि जजों के नाम पर घूस लेने के मामले को सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस चेलामेश्वर की बेंच ने संविधान पीठ के पास भेजने का फ़ैसला किया था. लेकिन संविधान पीठ ने कहा कि मुख्य न्यायाधीश ही ये फ़ैसला कर सकते हैं.

चीफ़ जस्टिस ही मास्टर ऑफ़ रोस्टर हैं, कोई और बेंच ये तय नहीं कर सकती कि कौन सा केस कौन सी बेंच देखेगी. अब घूस के मामले में दो हफ़्ते बाद तीन जजों की बेंच सुनवाई करेगी.

इसी दौरान प्रशांत भूषण ने मुख्य न्यायाधीश पर आरोप लगाए. वो चिल्ला कर बाहर निकल गए. इस पूरे मामले पर वरिष्ठ पत्रकार दिलीप मंडल ने कुछ तथ्य बताएं हैं जो आपके लिए जानना बेहद जरूरी है-

वो लिखते हैं कि सुप्रीम कोर्ट में 10 तारीख़ को जो हुआ, वो सबको पता होना चाहिए। ये उनके लिख लिख रहा हूं, जिन्हें पता नहीं है।

1. 2015 में प्रसाद एजुकेशन ट्रस्ट ने केंद्र सरकार के पास एक नया मेडिकल कॉलेज खोलने की अर्ज़ी दी। सरकार ने मेडिकल काउंसिल ऑफ़ इंडिया को अर्जी थमा दी। काउंसिल ने मना कर दिया।

2. मई 2016 में सुप्रीम कोर्ट की ओवरसाइट कमेटी ने काउंसिल से अपने फ़ैसले पर पुनर्विचार के लिए कहा। केंद्र सरकार ने इस आधार पर मंजूरी दे दी।

3. इस साल मई में काउंसिल ने कॉलेज का जायज़ा लिया और देखा कि कॉलेज सुनसान है और अस्पताल में ताले बंद हैं। काउंसिल ने केंद्र सरकार को रिपोर्ट दी। सरकार ने कॉलेज की मान्यता रद्द कर दी।

4. केंद्र सरकार ने काउंसिल से कहा कि वो कॉलेज की तरफ़ से जमा बैंक गारंटी को इनकैश कर सकता है।

5. ट्रस्ट ने सुप्रीम कोर्ट में फिर से अपील की। दीपक मिश्रा, अमिताभ रॉय और एएम ख़ानविलकर की खंडपीठ ने केंद्र को फिर से विचार करने को कहा। पीठ ने कहा कि ट्रस्ट के साथ अन्याय हुआ है।

6. प्रसाद एजुकेशन ट्रस्ट के एक ट्रस्टी बी पी यादव ने ओडीशा हाई कोर्ट के रिटायर्ड जज आईएम क़ुद्दुसी से संपर्क साधा। क़ुद्दुसी को सेट किया। क़ुद्दुसी के कहने पर सुप्रीम कोर्ट से मामला वापस लिया और इलाहाबाद हाई कोर्ट में अपील की।

7. 25 अगस्त को हाईकोर्ट ने बैंक गारंटी भुनाने पर रोक लगा दी और आदेश सुनाया कि मेडिकल कॉलेज में दाख़िले होंगे।

8. चार दिन बाद मेडिकल काउंसिल सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। दीपक मिश्रा की अगुवाई वाली पीठ ने हाई कोर्ट के फैसले को बरकरार रखा।

9. 18 सितंबर को मामला सेटल करने के लिए ट्रस्ट फिर से सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। फैसला फिर से ट्रस्ट के पक्ष में गया। फिर से दीपक मिश्रा इसकी अगुवाई कर रहे थे।

10. अगले दिन CBI ने इस मामले में FIR दर्ज की। पांच लोग गिरफ़्तार हुए।

11. न्यायपालिका में इसी भ्रष्टाचार को लेकर प्रशांत भूषण केस लड़ रहे थे। आनन-फानन में चेलमेश्वर की पीठ ख़त्म कर दीपक मिश्रा ने अपनी पीठ में इसकी सुनवाई शुरू कर दी।

12. प्रशांत भूषण ने आरोप लगाया कि पूरे मामले में आप भी पार्टी हैं। दीपक मिश्रा ने कहा कि अदालत की अवमानना का केस लागू कर      दूंगा। प्रशांत भूषण ने कहा- लगाओ। दीपक मिश्रा ने नहीं लगाया।

13. कोर्ट में जिन वकीलों का केस से कोई लेना-देना नहीं था, उनकी भी सुनी गई, लेकिन केस लड़ने वाले प्रशांत भूषण को इग्नोर किया गया. इसी के बाद प्रशांत कोर्ट छोड़कर बाहर निकल गए।

14. भारत के मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा पर पहली बार आरोप नहीं लगा है। इस आदमी का नाम अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री कालिखो पुल ने भी अपने सुसाइड नोट में लिखा था। इतना ही नहीं जस्टिस कर्णन ने भी न्यायपालिका में भ्रष्टाचार के आरोप लगाए थे।

इसके बाद भी दीपक मिश्रा को आउट ऑफ़ द वे जाकर मुख्य न्यायाधीश चुना गया। न्यायपालिका पर भ्रष्टाचार का मामला संगीन है। अगर दीपक मिश्रा ईमानदार हैं तो क़ायदे से उन्हें इस सुनवाई से अलग हो जाना चाहिए था। हम जैसे आम आदमी के दिमाग़ में शक हो रहा है।

भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपी दीपक मिश्रा को सुप्रीम कोर्ट का चीफ जस्टिस बनाया जाना कितना उचित है ?

जिस जज पर लगाए थे जस्टिस कर्णन ने आरोप उसी जस्टिस को सौंप दिया कर्णन का केस

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