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गजब UP ! CM के प्रमुख सचिव पर रिश्वत मांगने का आरोप, आरोप लगाने वाला ही गिरफ्तार, आरोप वापस

लखनऊ, नेशनल जनमत ब्यूरो। 

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की पुलिस ने भ्रष्टाचार मिटाने के लिए नया फॉर्मूला तैयार कर लिया है। इस फॉर्मूले का इस्तेमाल करते ही रिश्वत मांगने का आरोपी एक दम से पाक साफ हो जाता है।

इसी फॉर्मूले का इस्तेमाल करके मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव एस पी गोयल पर रिश्वतखोरी का संगीन आरोप लगाने वाले अभिषेक गुप्ता ने शाम ढलते-ढलते यू टर्न ले लिया। अभिषेक ने  उसके अारोप निराधार हैं, माफी मांगी सो अलग।

इस फॉर्मले का नाम है पुलिस का डर। इससे अच्छे से अच्छा भ्रष्टाचार खत्म हो जाता है। आरोप लगाया पुलिस ने पकड़ा बस फिर क्या था आरोप वापस ले लिया गया।

दरअसल लखनऊ के इंदिरा नगर निवासी अभिषेक गुप्ता ने हरदोई में पेट्रोल पम्प जमीन की फाइल स्वीकृति के लिए मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव एस पी गोयल पर 25 लाख रुपये रिश्वत मांगने का आरोप लगाया था।

इस मामले में राज्यपाल राम नाईक ने योगी को पत्र भी लिखा था। इसी के बाद गौरतलब है कि लखनऊ के इंदिरा नगर निवासी अभिषेक गुप्ता ने हरदोई में पेट्रोल पम्प के लिए जमीन की फाइल स्वीकृति के लिए मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव एस पी गोयल पर रिश्वत मांगने का आरोप लगाया।

रातों रात दर्ज हुई युवक पर एफआईआर- 

इस मामले में राज्यपाल राम नाईक ने सीएम योगी को एक पत्र लिखा। शिकायती पत्र सीएम योगी को 30 अप्रैल को फॉरवर्ड कर दिया गया था, जो कल कहीं से सोशल मीडिया पर लीक हो गया। इसके बाद कल रातोंरात अभिषेक के खिलाफ एफआईआर दर्ज हो गई।

बीजेपी मुख्यालय के प्रभारी भारत दीक्षित ने एफआईआर में कहा है कि अभिषेक अपने निजी काम के लिए बीजेपी के वरिष्ठ नेताओं के नाम का इस्तेमाल कर मुख्यमंत्री दफ़्तर के आला अफसरों पर दबाव डाल रहा है.

बता दें कि, अभिषेक के नाना ओम प्रकाश गुप्ता की ओर से माफीनामा दिया गया है। जिसमें नाना ने उसकी मानसिक स्थित ठीक न होने का हवाला दिया है। उन्होंने कहा कि मेरे नाती ने एक करोड़ का लोन ले रखा है। जिसकी 1 लाख रुपए महीना किस्त आ रही है।

 

हरदोई रोड स्थित पेट्रोल पंप के सामने की जमीन को विनिमय करने की पत्रावली शासन की ओर से निरस्त होने की वजह से अभिषेक की मानसिक स्थित खराब हो गई। इसी बौखलाहट में उसने प्रमुख सचिव एसपी गोयल पर पत्रावली पास कराने के लिए 25 लाख रुपए मांगने का गलत आरोप लगा दिया।

इस मामले पर सवाल उठाते हुए वरिष्ठ पत्रकार महेन्द्र यादव लिखते हैं कि दीनदयाल उपाध्याय के साथी और जिंदगी भर भाजपा और संघ का प्रचार करते रहे ओमप्रकाश गुप्ता को अपने नाती अभिषेक गुप्ता की जान बचाने के लिए रो-रोकर हाथ जोड़ने पड़े।

जानते तो थे ही कि एनकाउंटर कराने में देर नहीं लगती। जेलब्रेक का आरोप लगाकर बस घोड़ा दबाना होता है। अभिषेक गुप्ता वही हैं जिन्होंने मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव पर रिश्वत मांगने का आरोप लगा दिया था। पुलिस ने तुरंत उठा लिया।

ओमप्रकाश गुप्ता जी को जल्दी समझ में आ गया। फौरन नाती की तरफ से माफीनामा दिया। वरना…..

नेशनल जनमत के सवाल-

1- माफी मांगते ही अभिषेक गुप्ता पर लगी धाराएं कैसे खत्म हो गईं ?

2- क्या किसी मामले में दवाब बनाने के लिए पुलिस का प्रयोग करना उचित है ?

3- युवक के आरोपों के पीछे की सच्चाई जानने की कोशिश क्यों नहीं की गई ?

4- क्या पुलिस की गिरफ्तारी के पीछे मकसद सिर्फ आरोपी से माफी मंगवाकर सरकार की किरकिरी रोकना था ?

5- आरोप मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव पर था, एफआईआर बीजेपी कार्यालय की तरफ से क्यों कराई गई ?

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