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पाटीदार बनकर राजघाट पर फूंक रहे थे हार्दिक पटेल का पुतला, पूछा तो बता नहीं पाए ‘हार्दिक कौन है’

नई दिल्ली, नेशनल जनमत ब्यूरो। 

मोदी-शाह की जोड़ी वाली बदली हुई बीजेपी जो ना करा दे वो कम ही है। 22 साल के बीजेपी शासन के लिए नासूर बन चुके 24 साल के हार्दिक पटेल को नुकसान पहुंचाने का कोई भी मौका बीजेपी छोड़ना नहीं चाहती।

सीडी कांड के बाद भी हार्दिक की लोकप्रियता में कोई खास फर्क ना होता देख विरोधी सतही राजनीति पर उतर आए हैं। दिल्ली स्थित राजघाट पर हार्दिक पटेल के पुतला दहन के नाम पर बुलाए गए भाड़े के लोगों ने खुद ही इस सुनियोजित नौटंकी की पोल खोल दी।

पाटीदार अनामत आंदोलन समिति के संयोजक हार्दिक पटेल गुजरात विधानसभा चुनाव में कितना बड़ा फैक्टर साबित होते हैं ये तो 18 दिसंबर को मतगणना के नतीजे आने के बाद ही पता चलेगा। लेकिन विरोधियों की हरकतों ने बता दिया है कि हार्दिक की लोकप्रियता वे बीजेपी की नींद उड़ा के रखी है।

ऐसा ही कुछ नजारा बुधवार को देखने को मिला। विरोधियों की घटिया राजनीति का स्तर गुजरात से दिल्ली तक पहुंच गया। दरअसल राजघाट पर हार्दिक के खिलाफ पादीदारों के नाम से भाड़े की भीड़ बुलाकर प्रदर्शन करवाया गया।

खुद को पटेल समुदाय का सदस्य बताने वाले कुछ लोग राजघाट पर हार्दिक पटेल के खिलाफ बैनर पोस्टर और पुतला लेकर पहुंच गए. गले की पूरी ताकत के साथ पहले हार्दिक पटेल के खिलाफ नारे लगाए गए. बाद में हार्दिक के पुतले पर चप्पल-जूतों से जमकर भड़ास निकाली गई. फिर पुतले को आग के हवाले कर दिया गया.

ये सब चल ही रहा था उसी समय कुछ जागरूक पत्रकारों ने हार्दिक के खिलाफ आक्रोश प्रकट करने वालों का मन टटोलना चाहा। इसके लिए सबसे पहले बात की गई प्रदर्शन में हिस्सा ले रही महिला पूजा गौड़ से ये महिला अपने छोटे बच्चे को गोद में लिए दिल्ली के तिमारपुर इलाके से राजघाट पर प्रदर्शन में हिस्सा लेने पहुंची थी.

उनसे जब आने का मकसद पूछा गया तो जवाब मिला, ‘हम लोगों को बोला गया कि राजघाट चलना है, घर पर खाली बैठे थे इसलिए चले आए.’ अब ऐसे युवा से बात की गई जिसने सरदार पटेल की तस्वीर वाली सफेद टी शर्ट पहन रखी थी.

विरोध पादीदारों का था नाम था संतोष झा- 

पटेल समुदाय का बताने वाले शख्स का नाम था संतोष झा। जब इस युवा से पूछा गया कि जिसके खिलाफ आप जोर शोर से नारे लगा रहे हैं, उनके बारे में क्या जानते हैं तो मुस्कुराते हुए जवाब मिला, “ये पहले बीजेपी में थे, अब कांग्रेस के साथ पता नहीं क्यों चले गए.

हम तो हार्दिक पटेल के खिलाफ प्रदर्शन करने आए हैं.” संतोष झा ने आगे बड़ी शराफत से ये भी स्वीकार कर लिया कि वो नहीं जानते हार्दिक पटेल कौन हैं?

प्रदर्शनकारियों के समूह के जरा पीछे की ओर गए तो राजकुमार नाम के शख्स खड़े दिखाई दिए. अपने ख्याल में खोए राजकुमार से जब पूछा गया कि वो यहां क्यों आए हैं. बड़ी मासूमियत के साथ जवाब मिला- ‘नारे लगाने आए हैं.’ उनसे सवाल किया गया कि क्या इस काम के लिए कुछ मेहनताना भी मिलेगा? इस पर राजकुमार ने कहा, ‘नारे लगाने के लिए आए हैं, पैसा दिया नहीं हैं, काम हो जाने के बाद देंगे.’

यही किस्सा आगे भी बढ़ा. प्रदर्शनकारियों में पुरुष जहां पुतले जलाने और नारे लगाने में व्यस्त थे, वहीं एक कोने में कुछ महिलाएं बच्चों के साथ बैठी दिखीं. उनसे जब पूछा गया कि क्या वे हार्दिक पटेल के बारे में जानती हैं तो ज्यादातर ने जवाब ‘नहीं’ में दिया. जब महिलाओं से ये जानना चाहा कि क्या वे पटेल समुदाय से हैं, इसका जवाब भी ‘ना’ में मिला.

नारे लगाने के 100-100 रुपये मिलेंगे- 

ये सब चल रहा था तो कुछ लड़कियां भी वहां आ गईं. ये लड़कियां भी बस में बैठ कर राजघाट पर प्रदर्शन करने आई थीं. जब इन लड़कियों से उनके आने का मकसद पूछा गया तो उन्होंने माना कि घर पर कोई काम नहीं था इसलिए यहां रैली में चली आईं.

जब उनसे पूछा गया कि प्रदर्शन में हिस्सा लेने के लिए क्या कुछ पैसे भी मिलेंगे, तो लड़कियों ने जवाब दिया कि रैली खत्म होने के बाद पैसे मिलेंगे. एक लड़की ने खुल कर बता भी दिया- ‘एक घंटे के 100 रुपए मिलेंगे.’

(सौजन्य आज तक डॉट इन )  

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