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पीएम की काशी: रेहड़ी पटरी हटाने के विरोध में धरना दे रहे छात्रों को, उठा ले गई पुलिस

लखनऊ। नेशनल जनमत ब्यूरो।

लगता है योगीराज में विरोध बर्दाश्त ना करने की सख्त हिदायत दी गई है. लखनऊ वि.वि. के छात्रों को काला झंडा दिखाने पर जेल भेजने के बाद गुरुवार को वाराणसी में बीएचयू के छात्रों और सामाजिक कार्यकर्ताओं को हिरासत में ले लिया गया. छात्र और सामाजिक लोग गरीब रेहड़ी वालों के समर्थन में धरना देने बीएचयू गेट पहुंचे थे.

क्या है मामला- 

प्रधानसेवक के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में नगर निगम और पुलिस की मिली भगत से लंका पर स्थित पटरी व्यवसायियों को पुलिस ने लाठियों के बल पर खदेड़ दिया. इसके अलावा पटरी व्यवसायियों के नेता चिंतामणि सेठ और प्रेम सोनकर को पुलिस ने हिरासत में ले लिया. इस घटना से आक्रोशित सामाजिक कार्यकर्ताओं ने लंका थाने का घेराव भी किया.

इस पूरी घटना के विरोध में बीएचयू के शोधार्थी रामायण पटेल, धनंजय सुग्गु, दिवाकर सिंह, मुकेश कुमार समेत दो दर्जन रेहड़ी पटरी वालों को लंका क्षेत्र से हिरासत में ले लिया है. इससे छात्रो और सामाजिक कार्यकर्ताओं में आक्रोश है.

बना है कानून- 

पटरी व्यवसायियों के लिए संसद में कानून बना हुआ है संसद ने पटरी व्यवसायियों के हित मे फेरी पटरी व्यवसाय अधिनियम2014 नाम से कानून बना रखा है । जो कि इन्हें अपनी आजीविका चलाने का अधिकार देता है ।

बड़ा हो सकता है बवाल- 

पटरी व्यवसायियों के साथ घटी घटना से शहर के व्यापारियों में भारी आक्रोश है । लगातार कानून का हवाला देने पर भी वाराणसी प्रशासन दरकिनार कर रहा है. इनकी आजीविका का एकमात्र साधन इनसे सुनियोजित तरीके से छीना जा रहा है।

बड़े अतिक्रमणकरियो को राहत- 

आंदोलन कर रहे शोधार्थी रामायण पटेल का आरोप है कि वाराणसी में अतिक्रमण के नाम पर सबसे ज्यादा उत्पीड़न केवल पटरी व्यवसायियों का ही हो रहा है. पटरी व्यवसायियो का आरोप जा कि सनबीम ग्रुप के कई स्कूल बिना किसी अनुमति के अबैध जमीनों पर संचालित हो रहे हैं लेकिन इसपर नगर निगम की चुप्पी है. व्यवसाईयों ने बताया कि प्रशासन से पुनर्वास की मांग भी गयी थी लेकिन बिना कोई राहत दिए हमें हमारे धंधे से खदेड़ दिया गया.

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