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इलाहाबाद वि.वि. में नये सत्र से तीन गुना फीस देना होगा, छात्रों ने जताया विरोध

इलाहाबाद। नेशनल जनमत संवाददाता

इलाहाबाद विश्वविद्यालय में नये सत्र से ग्रेजुएशन, पोस्ट ग्रेजुएशन और रिसर्च आदि पाठ्यक्रमों में प्रवेश लेने वालों से बढ़ी हुई फीस ली जाएगी। फीस के नए स्ट्रक्चर को इविवि के विद्वत और कार्य परिषद से मंजूरी मिल चुकी है। नए स्ट्रक्चर में कई मदों की फीस को शामिल करते हुए विकास मद बनाया गया है। खास बात यह है कि विकास मद में सामूहिक बीमा को भी शामिल किया गया है।

ग्रेजुएशन की ट्यूशन फीस को 12 रुपये प्रतिमाह से बढ़ाकर 100 रुपये किया जा रहा है जबकि पोस्ट ग्रेजुएशन में अब 15 रुपये की बजाय 150 रुपये प्रतिमाह और डीफिल में 18 रुपये के स्थान पर 200 रुपये प्रतिमाह ट्यूशन फीस ली जाएगी।

तीन गुना तक बढ़ा दी गई फीस-

अभी तक ग्रेजुएशन में बिना प्रैक्टिकल वाले विषयों के छात्रों से 924 रुपये सालाना फीस ली जाती थी, जिसे अब 2975 रुपये कर दिया गया है। प्रैक्टिकल वाले विषयों की फीस अब तक 1074 रुपये थी, जिसे अब 3125 रुपये कर दिया गया है। फीस से डेलीगेसी शुल्क को हटा दिया गया है। बढ़ी हुई फीस सिर्फ सभी पाठ्यक्रमों के नये छात्रों पर ही लागू होगी।

सोशल मीडिया पर छात्रों ने जताई नाराजगी-

फीस वृद्धि की सूचना मिलते ही छात्रों ने सोशल मीडया पर विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ आक्रोश व्यक्त किया. तमाम छात्रों ने कहा कि विश्वविद्यालय में पढ़ने वाले निर्धन छात्रों को इससे बहुत दिक्कत होगी. एक साथ तीन गुना फीस बढ़ा देना कहीं से जायज नहीं.

विश्वविद्यालय प्रशासन ने बताया मजबूरी-

इविवि प्रशासन का कहना है फीस वृद्धि करना मजबूरी है क्योंकि यूजीसी ने कह दिया है कि विश्वविद्यालयों को अपने कुल बजट की तीस प्रतिशत आय अपने स्रोतों से जुटाना होगा। शेष 70 प्रतिशत धनराशि ही यूजीसी देगा। जाहिर सी बात है कि फीस आय का बड़ा स्रोत है। इसलिए इसमें इजाफा करना इविवि प्रशासन की मजबूरी है।

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