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जाति के आगे हारी मजदूर की बेटी पीयू चित्रा की योग्यता, विश्व चैंपियनशिप में नहीं हो पाएंगी शामिल

नई दिल्ली। नेशनल जनमत ब्यूरो 

एथलेटिक्स महासंघों के अंतरराष्ट्रीय संघ (आईएएएफ) ने आगामी विश्व चैंपियनशिप के लिए पीयू चित्रा को भारतीय टीम में शामिल करने के भारतीय एथलेटिक्स महासंघ (एएफआई) के आग्रह को रविवार (30 जुलाई) को ठुकरा दिया। जिससे इस प्रतिष्ठित प्रतियोगिता में इस धाविका के प्रतिनिधित्व को लेकर चल रहे असमंजस पर भी विराम लग गया।

खेल मंत्री विजय गोयल ने एएफआई को केरल उच्च न्यायालय के निर्देश का सम्मान करने को कहा था जिसके बाद राष्ट्रीय महासंघ नेआईएएएफ से चित्रा के मामले में विचार करने का आग्रह किया था। नाम जाहिर नहीं करने की शर्त पर एएफआई के अधिकारी ने बताया, ‘‘हम जो कर सकते थे हमने किया। लेकिन आईएएएफ ने हमारा आग्रह खारिज कर दिया।

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हम कुछ नहीं कर सकते। यह (खारिज करना) उनका अधिकार है और संबंधित नियमों को देखते हुए उन्होंने यह किया होगा।’’ केरल उच्च न्यायालय ने शुक्रवार (28 जुलाई) को केंद्र सरकार को निर्देश दिया था कि अगले महीने लंदन में होने वाली विश्व एथलेटिक्स चैंपियनशिप में चित्रा का प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया जाए।

इस बारे में वरिष्ठ पत्रकार महेन्द्र नाराय़ण सिंह यादव लिखते हैं कि- 

केरल की प्रतिभाशाली धाविका पी यू चित्रा का मामला इस बात का एक और सबूत है कि हमारे देश में लोग प्रतिभाओं के हनन के लिए हमेशा तैयार बैठे रहते हैं। एक तरह से इंतजार करते रहते हैं कि कोई कहीं से उभरता दिखे, और कब वे उसके सिर पर हथौड़ा मारें। देश की बदनामी हो, दुनिया में छवि खराब हो, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतियोगिता में पिछड़े, इस सबकी उन्हें कोई परवाह नहीं।

यही हो रहा है एथलेटिक पी यू चित्रा के साथ। इस देश में प्रतिभाएँ केवल चंद जातियों में ही पैदा होने का हक रखती हैं। अगर, इन जातियों से इतर किसी जाति का कोई छात्र-छात्रा, वैज्ञानिक, या खिलाड़ी आगे बढ़ता दिखा तो सारी ताकतें उसे रोकने में लग जाती हैं।

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पी यू चित्रा केरल के बहुत सामान्य परिवार से आती हैं, लेकिन जाने कैसे प्रतिभा-हंताओं की निगाह से बच गईं और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सफलता के झंडे गाड़ने में सफल हो गईं।

केरल के खेतिहर मजदूर की बेटी चित्रा ने इसी महीने भुवनेश्वर में एशियाई एथलेटिक्स चैम्पियनशिप में 1,500 मीटर स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीत लिया था जो कि भारतीय एथलेटिक्स संघ के पदाधिकारियों को अखर गया। चित्रा ने 4 मिनट 17.92 सेकंड का समय निकाला था।

एशियाई चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक विजेता होने के कारण वह अंतरराष्ट्रीय एथलेटिक्स चैंपियनशिप के लिए वाइल्ड कार्ड एंट्री की हकदार हो गई, लेकिन भारतीय एथलेटिक्स संघ ने नियमों का पेंच फंसाकर चित्रा को भारत की 24 सदस्यों की भारी-भरकम टीम में भी शामिल करने से इन्कार कर दिया।

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एथलेटिक्स महासंघ की चयन समिति की बैठक में उड़नपरी पीटी उषा और अंजू बॉबी जॉर्ज भी मौजूद थीं, लेकिन वो भी इसी नियम का हवाला देते हुए चित्रा को चयनित न किए जाने को उचित ठहरा रही हैं। लंदन में होने जा रही विश्व एथलेटिक्स चैंपियनशिप के लिए क्वालीफाइंग टाइम 4 मिनट 7 सेकंड का बताया जा रहा है, लेकिन इस तथ्य को ध्यान में नहीं रखा जा रहा है कि चित्रा वाइल्ड कार्ड एंट्री के जरिए पहले से ही क्वालीफाइड हैं।

केरल के खेतिहर मजदूर उन्नीकृष्णन और वसंता कुमारी की चार संतानों में से तीसरे नंबर की चित्रा ने बचपन से ही अपने माता-पिता को खेतों में मजदूरी करते देखा है। सुविधाओं के घोर अभाव और गरीबी के बावजूद चित्रा ने एथलेटिक्स में रुचि बनाए रखी और समय-समय पर शानदार प्रदर्शन किया। उत्तर प्रदेश विधान परिषद और केरल सरकार की ओर से उसे स्कूली प्रतियोगिताओं में विलक्षण प्रदर्शन के लिए टाटा नैनो कार भी पुरस्कार में दी गई थी।

केरल सरकार ने भारतीय एथलेटिक्स संघ से अनुरोध भी किया कि वाइल्ड कार्ड एंट्री प्राप्त चित्रा को लंदन जाने से न रोका जाए, लेकिन संघ अपनी बात पर अड़ा रहा। राज्य के खेल मंत्री ए सी मोदेन ने दोनों पर्यवेक्षकों की भूमिका पर भी नाराजगी जताई, लेकिन उन पर कुछ असर नहीं पड़ा।

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खुद मुख्यमंत्री पी विजयन इस मामले पर प्रेस कॉन्फ्रेंस कर चुके हैं, लेकिन संघ के अधिकारी तय किए रहे कि चित्रा को विश्व चैंपियनशिप में किसी भी हालत में नहीं जाने देना है। मुख्यमंत्री ने इस मामले में केंद्र सरकार को पत्र भी लिखा था।

चित्रा की ओर से उसके कोच एन एस सिजानी ने इसके बाद केरल हाईकोर्ट में भी याचिका लगाई। हाईकोर्ट ने भी केंद्र सरकार से कहा है कि वो अपने अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए चित्रा की विश्व चैंपियनशिप में भागीदारी सुनिश्चित करे। अदालत ने केंद्र से विभिन्न खेल संगठनों के धन के स्रोत की व्याख्या करने को भी कहा है।

इसके बाद केंद्रीय खेलमंत्री विजय गोयल ने भी भारतीय एथलेटिक्स संघ के अध्यक्ष श्रीअदिले सुमारीवाला से बात की और उनसे कहा कि वो चित्रा के रास्ते में अड़ंगा न लगाएँ।

मुख्यमंत्री विजयन ने ये भी कहा था कि राज्य सरकार चित्रा की मदद के लिए हर कोशिश करेगी, क्योंकि वह आर्थिक रूप से बेहद कमजोर हैं। इस समय चित्रा और उसके कोच अदालत के चक्कर काट रहे हैं, जबकि पूरे मामले से अनजान उसके माता-पिता आज भी खेतों में मजदूरी कर रहे हैं।

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केरल की स्टार धाविका चित्रा 2014 में रांची में हुई राष्ट्रीय प्रतियोगिता से शानदार प्रदर्शन करके चर्चा में आई थीं। उसके बाद उन्होंने कई प्रतियोगिताओं में शानदार प्रदर्शन दोहराया लेकिन भारतीय एथलेटिक्स संघ उनसे प्रभावित नहीं दिखता।

ताजा स्थिति यह है कि केरल हाईकोर्ट के निर्देश, और केंद्र सरकार की सलाह के बावजूद, भारतीय एथलेटिक्स संघ ने अभी तक चित्रा को लंदन में 4 से 13 अगस्त के बीच होने वाली विश्व एथलेटिक्स चैंपियनशिप में शामिल होने देने को मंजूरी नहीं दी है।

अब नया बहाना ये की हमने तो प्रयास किया लेकिन आईएएएफ ने प्रस्ताव ठुकरा दिया है।

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