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कब समझोगे? धर्म, अध्यात्म, आत्मा-परमात्मा, पुनर्जन्म, मोक्ष सब बाबाओं के धन उगाहने के साधन हैं

नई दिल्ली, नेशनल जनमत ब्यूरो। 

हरियाणा में शुक्रवार को कोर्ट द्वारा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम को बलात्कार के आरोप में दोषी ठहराए जाने के बाद पूरे देश में हिंसा का माहौल है। बाबा राम रहीम के समर्थकों ने की हिंसा अब तक 30 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है।

बाबा को दोषी करार दिए जाने के बाद अंतर्राष्ट्रीय शोधार्थी और जाने माने समाज विज्ञानी संजय श्रमन जोठे ने बाबागिरी को धन उगाहने वाला व्यवसाय करार दिया है।

उन्होंने लिखा-

धर्म,अध्यात्म, आत्मा परमात्मा, पुनर्जन्म और मोक्ष की बकवास को शिखर पर पहुंचाकर उसके आधार पर धन बटोरने का पहला मॉडल आचार्य रजनीश उर्फ ओशो ने दिया था। उनके बाद सभी बाबाओ और पोंगा पंडितों ने उस मॉडल को फॉलो किया।

धर्म और मोक्ष जैसी इंसान विरोधी धारणा को सुनहरे शब्द जाल में लपेटकर सजाने की शुरुआत ओशो से ही हुई है। आजकल के बाबाओ की जो लीला हम देख रहे हैं वो उसी खेल का विस्तार है।

ऑरेगोन अमेरिका में इन रजिस्टर्ड भगवान के आश्रम में भी उसी खतरे की आशंका उठ खड़ी हुई थी जो अभी पंचकूला में चल रहा है तत्कालीन अमेरिकन मीडिया और जांच एजेंसियों की रिपोर्ट बताती है कि किस तरह वहां हथियार, ड्रग्स आदि का जमावड़ा हो रहा था।

लेकिन मजे की बात ये कि लोगों की भक्ति का बुखार उतरता ही नहीं। सालों साल मूर्खता जारी रहती है। अभी जो लोग पंजाब हरियाणा दिल्ली को जला रहे हैं, भारत को मिटाने की धमकी दे रहे हैं वे भी “धार्मिक” लोग हैं।

गुरु पूर्णिमा, कावड़ यात्रा, जन्माष्टमि के अलावा अन्य सभी व्रत त्योहार मनाते हैं। उन सबका ये परिणाम हो रहा है आंख खोलकर देख लीजिए।

पुरानी कर्मकांडी बुद्धि में रहस्यवाद और ह्यूमन पोटेंशियल मूवमेंट की खुराक मिलाकर ओशो ने जो जहरीला कॉकटेल बनाया है वो धूर्त बाबाओं की सफलता की गारंटी बन गया है। जब तक उस मॉडल का पोस्टमार्टम नहीं किया जाएगा तब तक ये बाबागिरी की फफूंद पैदा होती रहेगी।

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